केन नदी की लहरों में चला 12 दिन का ‘पंचतत्व सत्याग्रह’: प्रशासन झुका

रिपोर्ट, उदय नारायण अवस्थी, छतरपुर
केन नदी की लहरों में चला 12 दिन का ‘पंचतत्व सत्याग्रह’: प्रशासन झुका, 10 दिन के लिए आंदोलन स्थगित अमित भटनागर की चेतावनी आश्वासन से मुकरा प्रशासन तो होगा जबरदस्त महाआंदोलन छतरपुर/पन्ना जय किसान संगठन के बैनर तले केन-बेतवा लिंक परियोजना सहित मझंगाय, रुँझ और नैगुवा परियोजना मे प्रशासनिक मनमानी व भ्रष्टाचार के विरोध में चल रहा आदिवासी-किसान आंदोलन 12 दिनों के बाद आज महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंचा। पन्ना और छतरपुर जिले की सीमा से लगी केन नदी की लहरों के बीच चल रहे इस ऐतिहासिक ‘पंचतत्व सत्याग्रह’ ने प्रशासन को झुकने पर मजबूर कर दिया, जिसके बाद आंदोलन को 10 दिनों के लिए स्थगित कर दिया गया है। यह आंदोलन ऐसे समय में चला, जब प्रशासन द्वारा क्षेत्र में धारा 144 (वर्तमान में धारा 163) लागू कर दी गई थी, इसके बावजूद हजारों आदिवासी, किसान और महिलाएं डटे रहे और शांतिपूर्ण लेकिन दृढ़ संघर्ष जारी रखा। जल सत्याग्रह: केन नदी में खड़े होकर विरोध मिट्टी सत्याग्रह: अपनी जमीन बचाने का संकल्प चिता आंदोलन: विस्थापन को मृत्यु के समान बताना भूख/चूल्हा बंद आंदोलन: गांवों में सामूहिक उपवास वायु सत्याग्रह (सांकेतिक फांसी): प्रशासन को चेतावनी इन सभी अहिंसक लेकिन प्रभावशाली तरीकों ने आंदोलन को न केवल स्थानीय बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। हजारों लोगों की भागीदारी, नहीं टूटा हौसला जय किसान संगठन के नेतृत्व में पन्ना और छतरपुर जिले के हजारों आदिवासी, किसान और विशेष रूप से महिलाएं अपने छोटे-छोटे बच्चों के साथ इस आंदोलन में लगातार शामिल रहीं। कम संसाधनों और प्रशासनिक दबाव के बावजूद न संख्या घटी, न आंदोलन का उत्साह कम हुआ प्रशासन ने मानीं प्रमुख मांगें लगातार बढ़ते दबाव और जनसमर्थन के चलते प्रशासन को वार्ता के लिए आगे आना पड़ा। बैठक के बाद निम्न बिंदुओं पर सहमति बनी— पारदर्शी सर्वे जिसमें डिप्टी कलेक्टर/ तहसीलदार स्तर के जिला स्तरीय उच्च अधिकारी द्वारा 7 दिन में सर्वे पूर्ण करने का आश्वासन, गांव के बदले गांव, विशेष पैकेज मुआवजा बढ़ाने पर सहमति, कटआफ डेट 1अप्रैल 2026 आदि प्रमुख मांगों पर सहमति बनी। जो मांगे जिला स्तर की थी उसे पर कलेक्टर ने तुरंत आदेश करते हुए जिले के एसडीएम सहित प्रमुख अधिकारियों को एक-दो गांव सौंपते हुए कल से ही सर्वे करने के आदेश जारी कर दिए हैं, जो मांगे प्रदेश व केंद्र स्तरीय हैं उसे पर प्रदेश व केंद्र के जिम्मेदार अधिकारियों के साथ किसानों के प्रतिनिधिमंडल के साथ जिला प्रशासन बातचीत का चैनल स्थापित करेगा। 10 दिन के लिए आंदोलन स्थगित पूर्व में कई बार आश्वासन से मुकरने के कारण लोगों में अविश्वास बना रहा, इसके बाद तय हुआ कि अगले दिन बैठकर सभी से एक बातचीत की जाएगी, इसके बाद गुरुवार को बड़ी संख्या में लोग आंदोलन स्थल पर इकट्ठा हुए सामूहिक चर्चा के बाद यह निर्णय लिया गया कि प्रशासन को अंतिम अवसर दिया जाए। इसलिए आंदोलन को 10 दिनों के लिए स्थगित किया गया है। केन नदी को साक्षी मानकर लिया संकल्प आंदोलन की समाप्ति पर अमित भटनागर और हजारों आंदोलनकारियों ने केन नदी में उतरकर नदी को साक्षी मानते हुए संकल्प लिया कि—वे जल, जंगल, जमीन और आदिवासी अधिकारों पर किसी भी अन्याय को स्वीकार नहीं करेंगे 10 दिनों तक प्रशासन का पूरा सहयोग करेंगे, लेकिन यदि प्रशासन ने पुनः झूठे आश्वासन दिए—तो इस बार आंदोलन और भी व्यापक और उग्र रूप में किया जाएगा “यह आंदोलन रुका है, खत्म नहीं हुआ है। हमने प्रशासन को 10 दिन का समय दिया है। अगर इस बार भी प्रशासन अपने आश्वासन से मुकरा, तो इस बार सिर्फ आंदोलन नहीं होगा—जबरदस्त महाआंदोलन होगा।” — अमित भटनागर, नेतृत्वकर्ता (जय किसान संगठन) यह रहे शामिल आंदोलन के नेतृत्व कर्ता अमित भटनागर, पार्षद दिव्या अहिरवार, लक्ष्मी आदिवासी, कमला आदिवासी,बड़ी बहू आदिवासी, जनपद सदस्य दयाराम आदिवासी, इमरती आदिवासी, सुन्ना अहिरवार, कल्लो आदिवासी, धीरज आदिवासी, पार्षद रामपाल, राजेंद्र आदिवासी, हिसाबी राजपूत, जगदीश आदिवासी, मंगल यादव, दीपक द्विवेदी, रामावतार आदिवासी, राहुल अहिरवार, बाबू आदिवासी, लल्लू आदिवासी सहित हजारों की संख्या में आदिवासी किसान महिलाएं सम्मिलित रही।

