June 14, 2026

सीबीआई की रेड भूल कर फिर शुरू हुआ मौत का परिवहन, एनटीपीसी रिहंद ने दोबारा खोला प्रदूषण का नरक सहमे ग्रामीण

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सीबीआई की रेड भूल कर फिर शुरू हुआ मौत का परिवहन, एनटीपीसी रिहंद ने दोबारा खोला प्रदूषण का नरक सहमे ग्रामीण

रिपोर्ट मनोज सिंह राणा

​बीजपुर (सोनभद्र)।भ्रष्टाचार और लापरवाही के जिस दलदल पर पिछले साल देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी सीबीआई ने हथौड़ा चलाया था एनटीपीसी रिहंद प्रबंधन ने उसी काले कारोबार को दोबारा हरी झंडी दे दी है।एनटीपीसी के राख बंधे से राख का परिवहन शुरू होते ही पूरे बीजपुर और आस-पास के इलाकों में दहशत खौफ और भारी आक्रोश का माहौल है।ऐसा लग रहा है कि जिम्मेदार अधिकारियों के दिलों से न तो कानून का डर रह गया है और न ही इंसानी जिंदगियों की कोई कीमत बची है।​याद हो कि पिछले वर्ष राख परिवहन में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं,भ्रष्टाचार और नियमों की धज्जियां उड़ाने की गंभीर शिकायतों के बाद सीबीआई की टीम ने एनटीपीसी रिहंद में ताबड़तोड़ छापेमारी की थी।सीबीआई के इस कड़े ऐक्शन के बाद राख का यह जानलेवा परिवहन पूरी तरह ठप हो गया था जिससे क्षेत्रीय जनता ने राहत की सांस ली थी और पर्यावरण को एक नया जीवन मिला था।​लेकिन चंद महीनों की शांति के बाद साठगांठ का खेल फिर शुरू हो चुका है।ग्रामीणों का आरोप है कि जांच की आंच ठंडी पड़ते ही ठेकेदारों और अधिकारियों ने फिर से हाथ मिला लिया है और जनता को उसी प्रदूषण के नरक में दोबारा धकेल दिया गया है।​राख परिवहन शुरू होते ही हर रोज सैकड़ों की तादाद में भारी-भरकम गाड़ियाँ सड़कों पर मौत बनकर दौड़ने लगी हैं।इस खूनी रफ्तार के कारण जिन सड़कों को जनता के टैक्स के पैसों से बनाया गया था ये भारी वाहन उनकी धज्जियां उड़ा रहे हैं।सड़कें गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं।बेकाबू दौड़ते इन ट्रकों के कारण राहगीरों और स्कूली बच्चों की जान हमेशा हलक में अटकी रहती है।आए दिन होने वाले एक्सीडेंट्स का ग्राफ अब तेजी से ऊपर जाने लगेगा।​ठेकेदारों की मनमानी का आलम यह है कि गाड़ियों को बिना तिरपाल या बिना ढके ही दौड़ाया जा रहा है जिससे सड़कों पर चारों तरफ जहरीली राख बिखर रही है।ग्रामीणो ने कहा कि ​हमारे खेत सफेद हो चुके हैं और रसोई में रखा खाना राख से सन जाता है। यह परिवहन नहीं हमारे बच्चों को धीरे-धीरे मारने की साजिश है।​यह उड़ती हुई फ्लाई ऐश हवा में घुलकर सीधे ग्रामीणों के घरों रसोई और खेतों-खलिहानों पर कब्जा कर रही है। फसलों की बर्बादी तो तय है ही साथ ही हवा में घुलता यह सफेद जहर स्थानीय आबादी को दमा, टीबी, कैंसर और सांस की गंभीर बीमारियों का मरीज बना रहा है।​​करोड़ों रुपए की राख के इस खेल ने एक बार फिर पर्यावरण को सबसे बड़े खतरे में डाल दिया है।स्थानीय निवासियों का कहना है कि जब मामला देश की सर्वोच्च जांच एजेंसी के रडार पर आ चुका था तो किन नियमों के तहत इस परिवहन को दोबारा हरी झंडी दी गई है क्या अधिकारी किसी बड़े हादसे या फिर से सीबीआई की बड़ी कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं​ग्रामीणों ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि इस जानलेवा राख परिवहन को तुरंत नहीं रोका गया और सड़कों को प्रदूषण मुक्त नहीं किया गया तो वे अपनी जान और बच्चों के भविष्य की रक्षा के लिए सड़कों पर उतरकर चक्का जाम और उग्र आंदोलन करेंगे।

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