हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला: उत्तर प्रदेश में हुक्का बार नहीं चल सकेंगे, उत्तर प्रदेश में हुक्का बार नहीं चल सकेंगे, धूम्रपान क्षेत्र में भी हुक्का सेवा पर रोक

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि उत्तर प्रदेश में हुक्का बार संचालित नहीं किए जा सकते। अदालत ने यह भी कहा कि किसी भोजनालय में निर्धारित धूम्रपान क्षेत्र बनाए जाने का अर्थ यह नहीं है कि वहां ग्राहकों को हुक्का उपलब्ध कराने की अनुमति मिल जाती है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी स्थान को धूम्रपान के लिए निर्धारित करने और वहां हुक्का उपलब्ध कराने में अंतर है। भोजनालय के धूम्रपान क्षेत्र में भी हुक्का सेवा नहीं दी जा सकती।
हाईकोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति या प्रतिष्ठान को व्यापार करने का अधिकार प्राप्त है, लेकिन इस अधिकार का इस्तेमाल धूम्रपान न करने वाले लोगों के मौलिक अधिकारों को प्रभावित करने के लिए नहीं किया जा सकता।
2017 के संशोधन के बाद बदली व्यवस्था
हाईकोर्ट ने उच्चतम न्यायालय के नरिंदर एस. चड्ढा बनाम मुंबई महानगरपालिका मामले में दिए गए फैसले का भी उल्लेख किया।
अदालत ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के उस फैसले के समय नियम 4(3) की भाषा वर्तमान प्रावधान से अलग थी। वर्ष 2017 में नियम में किए गए संशोधन के बाद अब धूम्रपान क्षेत्र में किसी प्रकार की सेवा उपलब्ध कराने पर रोक है।
हाईकोर्ट ने कहा कि नियम में हुए इस महत्वपूर्ण बदलाव के बाद पुराने प्रावधान की व्याख्या को वर्तमान संशोधित नियम पर लागू नहीं किया जा सकता।
हुक्का बार के लिए अलग अनुज्ञापत्र जारी करने का अधिकार नहीं
हालांकि, हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की इस दलील को स्वीकार किया कि खाद्य सुरक्षा विभाग और नगर निगम के पास हुक्का बार संचालित करने के लिए अलग से अनुज्ञापत्र जारी करने का वैधानिक अधिकार नहीं है।
वहीं, अदालत ने सिगरेट एवं अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम के तहत पुलिस को प्राप्त कार्रवाई की शक्तियों को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया।
इस फैसले के साथ हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि भोजनालय में धूम्रपान क्षेत्र की अनुमति को हुक्का परोसने की अनुमति के रूप में नहीं माना जा सकता।

