September 29, 2026

मध्य वायु कमान के विमानों और वायु योद्धाओं ने बाढ़, भूकम्प एवं अन्य आपात स्थितियों के दौरान प्रभावित नागरिकों तक त्वरित सहायता पहुंचाने में लगातार महत्वपूर्ण भूमिका निभाई

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हालिया बचाव अभियानों ने मानवीय सहायता के पीछे त्वरित प्रतिक्रिया, कौशल और समन्वित टीमवर्क को किया रेखांकित

मध्य वायु कमान के विमानों और वायु योद्धाओं ने बाढ़, भूकम्प एवं अन्य आपात स्थितियों के दौरान प्रभावित नागरिकों तक त्वरित सहायता पहुंचाने में लगातार महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। विशेष रूप से उन परिस्थितियों में, जब स्थलीय मार्ग बाधित या पूरी तरह अनुपलब्ध हो जाते हैं, वायु सेना की त्वरित प्रतिक्रिया जीवनरक्षक सिद्ध होती है।

इस मानवीय प्रतिबद्धता का एक और उदाहरण 27 सितम्बर 2026 को देखने को मिला, जब भारतीय वायु सेना के एक मी-17वी5 हेलीकॉप्टर ने छत्तीसगढ़ के डोंगाघाट गांव के निकट इंद्रावती नदी के बढ़ते जलस्तर के बीच फंसे 12 नागरिकों को सुरक्षित बचाया।

तलाशी के बाद वायु सेना के दल ने नागरिकों को एक कच्चे मकान की कमजोर छत पर एकत्र पाया। वायुयान चालक दल ने हेलीकॉप्टर को स्थिर रखते हुए एक गरुड़ कमांडो को छत पर उतारा। इसके बाद तीन महिलाओं, तीन बच्चों और एक शिशु सहित सभी 12 नागरिकों को विन्च के माध्यम से सुरक्षित हेलीकॉप्टर में लिया गया।

मानवीय सहायता एवं आपदा राहत अभियानों में वायुयान चालक दल को अक्सर प्रतिकूल मौसम, दुर्गम भूभाग और सीमित स्थानों में अभियान संचालित करना पड़ता है। अनेक परिस्थितियों में सड़क, पुल और संचार सम्पर्क बाधित होने के बाद हेलीकॉप्टर एवं परिवहन विमान प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने का एकमात्र साधन बन जाते हैं।

ऐसी आपात परिस्थितियों में अभियानगत सटीकता का उपयोग मानवीय उद्देश्यों—जीवित लोगों का पता लगाने, राहत सामग्री पहुंचाने और संकट में फंसे नागरिकों को सुरक्षित निकालने—के लिए किया जाता है। पायलट, इंजीनियर, गरुड़ कमांडो, वायु यातायात नियंत्रक, चिकित्सा दल और ग्राउंड सपोर्ट कर्मी त्वरित एवं समन्वित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के लिए एक टीम के रूप में कार्य करते हैं।

आपदा के प्रकार और उसके विस्तार के अनुसार विभिन्न विमानों का उपयोग किया जाता है। भारी एवं मध्यम परिवहन विमान बचाव दलों, चिकित्सा उपकरणों और राहत सामग्री को लंबी दूरी तक पहुंचाते हैं, जबकि हेलीकॉप्टर पर्वतीय क्षेत्रों, बाढ़ग्रस्त गांवों, मकानों की छतों और नदी तटों पर फंसे नागरिकों तक पहुंचते हैं। प्रत्येक अभियान के पीछे सूक्ष्म योजना, तकनीकी तैयारी तथा नागरिक प्रशासन एवं अन्य राहत एजेंसियों के साथ निकट समन्वय होता है।

मध्य वायु कमान के चयनित प्रमुख एचएडीआर एवं बचाव अभियान

जनवरी 2001
भुज भूकम्प विमान/फॉर्मेशन प्रमुख योगदान
एन-32, आईएल-76 और मी-17
बचाव दलों, राहत सामग्री और आवश्यक उपकरणों को प्रभावित क्षेत्र तक पहुंचाया

दिसम्बर 2004
हिंद महासागर सुनामी एवं अंडमान और निकोबार द्वीप समूह
संख्या 12 और संख्या 78 स्क्वाड्रन
संख्या 78 स्क्वाड्रन ने दस दिनों में लगभग 250 घंटे की उड़ान भरते हुए 600 टन से अधिक सामग्री और लगभग 3,500 यात्रियों को पहुंचाया

जून 2013
ऑपरेशन राहत, उत्तराखंड
संख्या 111 हेलीकॉप्टर यूनिट और संख्या 158 हेलीकॉप्टर यूनिट; मी-17वी5
संख्या 158 हेलीकॉप्टर यूनिट ने 3,318 लोगों को बचाया और लगभग 78.35 टन राहत सामग्री पहुंचाई

सितम्बर 2014
ऑपरेशन मेघ राहत, जम्मू-कश्मीर
परिवहन विमान और हेलीकॉप्टर
बाढ़ में फंसे नागरिकों की निकासी एवं आवश्यक सामग्री पहुंचाने में सहयोग किया

अप्रैल-मई 2015
नेपाल भूकम्प राहत अभियान
परिवहन विमान और हेलीकॉप्टर
बचाव दलों, चिकित्सा सहायता और राहत सामग्री को प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचाया

अगस्त 2017
बिहार एवं उत्तर प्रदेश में बाढ़
सी-17, एन-32 और मी-17
एनडीआरएफ एवं सेना के जवानों, नौकाओं, उपकरणों और राहत सामग्री को पहुंचाया; मी-17 ने महाराजगंज से 45 नागरिकों को सुरक्षित निकाल!

2018
मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और केरल में बाढ़ राहत अभियान
परिवहन विमान और हेलीकॉप्टर
राहतकर्मियों एवं सामग्री के परिवहन तथा प्रभावित नागरिकों की निकासी में सहायता की

2020-2021
राष्ट्रीय कोविड-19 प्रतिक्रिया
परिवहन विमान
महामारी की दोनों लहरों के दौरान चिकित्सा उपकरणों, आवश्यक सामग्री और कर्मियों के परिवहन में सहयोग किया

अगस्त 2025
धराली-हर्षिल आपदा राहत अभियान, उत्तराखंड
मी-17, एएलएच एमके-III, एन-32 और सी-295
फंसे हुए लोगों की निकासी तथा बचाव दलों, राहतकर्मियों एवं आवश्यक सामग्री के परिवहन में सहायता की

1 सितम्बर 2025
साबरी नदी बचाव अभियान, सुकमा
मी-17वी5 और गरुड़ कमांडो
नदी की तेज धाराओं के बीच फंसे एक ग्रामीण को सुरक्षित बचाया

29 अगस्त 2026
चित्रकूट बाढ़ बचाव अभियान
चेतक
बाढ़ के बीच फंसे दो बुजुर्ग नागरिकों को सुरक्षित निकाला

27 सितम्बर 2026
इंद्रावती नदी बचाव अभियान, बस्तर
मी-17वी5 और गरुड़ कमांडो
तीन महिलाओं, तीन बच्चों और एक शिशु सहित 12 नागरिकों को सुरक्षित बचाया

इन अभियानों में उत्तराखंड में संचालित *ऑपरेशन राहत* पर्वतीय क्षेत्र में हेलीकॉप्टर अभियानों के सबसे चुनौतीपूर्ण उदाहरणों में से एक रहा। संख्या 111 हेलीकॉप्टर यूनिट ने अभियान में उल्लेखनीय योगदान दिया, जबकि संख्या 158 हेलीकॉप्टर यूनिट के मी-17वी5 हेलीकॉप्टरों ने 3,318 लोगों को बचाया और लगभग 78.35 टन राहत सामग्री पहुंचाई।

अगस्त 2017 में बिहार में आई बाढ़ के दौरान सी-17 और एन-32 विमानों ने एनडीआरएफ एवं सेना के जवानों, नौकाओं, बचाव उपकरणों और राहत सामग्री का परिवहन किया। गोरखपुर से संचालित एक मी-17 हेलीकॉप्टर ने महाराजगंज में बाढ़ से घिरे 45 लोगों को सुरक्षित निकाला।

1 सितम्बर 2025 को सुकमा जिले की साबरी नदी में चलाया गया बचाव अभियान व्यक्तिगत जीवनरक्षक अभियानों के लिए आवश्यक विशेष कौशल का उदाहरण है। नागरिक प्रशासन से प्राप्त तत्काल अनुरोध के बाद जगदलपुर से एक मी-17वी5 हेलीकॉप्टर भेजा गया। व्यापक हवाई तलाशी के बाद चालक दल ने 48 वर्षीय श्री हिडमा सोड़ी को नदी की तेज धाराओं और बढ़ते जलस्तर के बीच झाड़ियों को पकड़े हुए देखा।

पायलटों ने हेलीकॉप्टर को स्थिर रखते हुए गरुड़ कमांडो को विन्च से नीचे उतारा। कमांडो ने ग्रामीण को सुरक्षित किया, जिसके बाद उन्हें हेलीकॉप्टर में लाकर प्राथमिक उपचार प्रदान किया गया। यह अभियान भारतीय वायु सेना, छत्तीसगढ़ पुलिस और नागरिक प्रशासन के निकट समन्वय से पूरा किया गया।

अगस्त और सितम्बर 2026 में चित्रकूट तथा बस्तर में संचालित बचाव अभियानों ने मध्य वायु कमान के हेलीकॉप्टर दलों की त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता को पुनः प्रदर्शित किया। बाढ़ में फंसे दो बुजुर्ग नागरिकों को निकालने से लेकर एक कमजोर छत से 12 लोगों को विन्च के माध्यम से सुरक्षित बचाने तक, प्रत्येक अभियान में विवेकपूर्ण निर्णय, निकट समन्वय और सटीक कार्यान्वयन की आवश्यकता रही।

वाराणसी के नमो घाट पर *25 अक्टूबर 2026* को आयोजित होने वाले *Indian Air Force Aerial Display: 2026* की तैयारियों के बीच ये मानवीय अभियान भारतीय वायु सेना के पेशेवर प्रशिक्षण और समन्वित टीमवर्क का एक अन्य महत्वपूर्ण पक्ष प्रस्तुत करते हैं। उड़ान अभियानों की पहचान माने जाने वाले अनुशासन, सटीकता और तत्परता के यही गुण वायु योद्धाओं को नागरिकों के सबसे कठिन समय में उन तक पहुंचने में सक्षम बनाते हैं।

एरियल डिस्प्ले के समय, यातायात व्यवस्था, निर्धारित दर्शक क्षेत्रों और सुरक्षा निर्देशों की विस्तृत जानकारी कार्यक्रम के निकट अधिकृत माध्यमों से जारी की जाएगी। नागरिकों से अनुरोध है कि वे केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करें और स्थानीय प्रशासन के साथ पूर्ण सहयोग करें।

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