मेघालय हनीमून मर्डर केस : आरोपी सोनम रघुवंशी की जमानत रद्द करने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

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मेघालय हनीमून मर्डर केस : आरोपी सोनम रघुवंशी की जमानत रद्द करने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सोनम रघुवंशी की जमानत रद्द करने से इनकार कर दिया. हालांकि, जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस शील नागू की बेंच ने हाई कोर्ट के उस आदेश पर आपत्ति जताई जिसके तहत सोनम को राहत मिली थी. इसके बावजूद कोर्ट ने जमानत पर रोक लगाने से मना कर दिया क्योंकि सोनम के वकील ने बताया कि वह जेल से रिहा हो चुकी हैं. सोनम पर पिछले साल मेघालय में हनीमून के दौरान अपने पति राजा रघुवंशी की हत्या करने का आरोप है.
जस्टिस सुंदरेश ने कहा कि कोर्ट शुरुआत में हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगाना चाहता था, लेकिन आरोपी पहले ही जेल से बाहर आ चुकी है. इससे पहले मेघालय हाई कोर्ट ने शिलॉन्ग कोर्ट के उस अप्रैल वाले आदेश को सही ठहराया था, जिसमें रघुवंशी को जमानत दी गई थी. राज्य सरकार ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी.
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि वह पहले ट्रायल (मामले की सुनवाई) की प्रोग्रेस को देखेगी. इसके साथ ही कोर्ट ने मेघालय सरकार की याचिका पर रघुवंशी को नोटिस भी जारी किया. रघुवंशी के वकील ने दलील दी कि हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगाने से उनके मुवक्किल की जमानत रद्द हो जाएगी. इस पर बेंच ने कहा कि वह जमानत रद्द नहीं कर रही है बल्कि इसे रोक (होल्ड पर) रही है और वकील के अनुरोध पर विचार कर रही है.
वकील ने बेंच से आग्रह किया कि ऐसी स्थिति में उनके मुवक्किल को हिरासत में न लिया जाए क्योंकि वह कोर्ट की शर्तों के कारण पहले से ही शिलॉन्ग में हैं और अब जेल से रिहा हो चुकी हैं. बेंच ने इस पर कहा कि उन्हें ऐसा लग रहा था कि वह अभी जेल से रिहा नहीं हुई हैं. जस्टिस सुंदरेश ने कहा, “अगर वह रिहा हो चुकी हैं तो हम ऐसा नहीं कर सकते… अगर वह रिहा हो चुकी हैं, तो हम ऐसा नहीं करना चाहते.” उन्होंने आगे कहा कि शुरुआत में उन्हें लगा था कि वह रिहा नहीं हुई हैं.
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने तर्क दिया कि उन्हें वापस हिरासत में भेजा जा सकता है और बेंच से हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगाने का आग्रह किया. रघुवंशी के वकील ने कहा कि उनकी मुवक्किल पूरा सहयोग कर रही हैं. मेहता ने कहा कि इस मामले के तथ्य कोर्ट की अंतरात्मा को झकझोर देंगे और कोर्ट से अपराध की गंभीरता को देखने का अनुरोध किया.

जस्टिस सुंदरेश ने कहा, “लेकिन फिर उस मामले का फैसला ट्रायल में होना चाहिए. हम इस कोर्ट द्वारा तय किए गए कानून से भी वाकिफ हैं कि जमानत देते समय कुछ मानकों को पूरा करना होता है. लेकिन जब वह रिहा हो चुकी हैं, तो हम अभी कोई आदेश पारित नहीं करना चाहते…”
मेहता ने कहा कि जैसे ही विशेष अदालत ने आदेश पारित किया, एडवोकेट जनरल ने रोस्टर बेंच के सामने इसका जिक्र किया था. लेकिन, उस पर विचार नहीं किया गया, वरना हम उसी समय उस आदेश पर रोक लगाने की मांग कर रहे थे. मेहता ने कहा कि नीचे की दोनों अदालतों (शिलॉन्ग कोर्ट और हाई कोर्ट) ने जरूरी सबूतों और गवाहों पर विचार नहीं किया है. आरोपों की प्रकृति गंभीर है, पहले भी जमानत याचिकाएं खारिज हो चुकी हैं और मौजूदा दलील (गिरफ्तारी के समय गिरफ्तारी के आधार न बताए जाने से जुड़ी) पर विचार नहीं किया गया है.
बेंच ने कहा कि उसका हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगाने का कोई इरादा नहीं है. और मामले की अगली सुनवाई अगले गुरुवार के लिए तय कर दी. सुनवाई खत्म होने के बाद मेहता ने कहा कि ऐसी घटनाएं बढ़ी हैं. इस पर जस्टिस सुंदरेश ने टिप्पणी की, “हमने बेंगलुरु के ऐसे ही एक समान और सनसनीखेज मामले को देखा है. हम आगे कुछ नहीं कहना चाहते. अगर हम कुछ कहेंगे तो उसे बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया जाएगा. अलग-अलग पक्षों को इस पर आत्मनिरीक्षण (सोचने-समझने) करने की जरूरत है.”
बता दें कि सोनम पर साल 2025 में मेघालय में हनीमून के दौरान अपने पति राजा रघुवंशी की हत्या करने का मुख्य आरोप है. वह मई 2025 में अपनी पत्नी सोनम के साथ हनीमून के लिए मेघालय गए थे. यह जोड़ा 23 मई को नोंगरियत के एक होमस्टे से चेक-आउट करने के बाद लापता हो गया था. बाद में राजा का शव सोहरा में वेइसावडोंग फॉल्स के पास एक गहरी खाई से बरामद किया गया था, जबकि सोनम का पता कुछ दिनों बाद उत्तर प्रदेश में चला था.

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