September 13, 2026

सहारनपुर मस्जिद ध्वस्तीकरण मामले में हाईकोर्ट की अंतरिम राहत , ₹6.41 करोड़ की हर्जाना वसूली पर रोक, राज्य सरकार से मांगा जवाब; 12 अक्टूबर को अगली सुनवाई

0

सहारनपुर मस्जिद ध्वस्तीकरण मामले में हाईकोर्ट की अंतरिम राहत , ₹6.41 करोड़ की हर्जाना वसूली पर रोक,

राज्य सरकार से मांगा जवाब; 12 अक्टूबर को अगली सुनवाई

प्रयागराज, 11 सितंबर। सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद से जुड़े ध्वस्तीकरण और हर्जाना वसूली मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मस्जिद कमेटी को अंतरिम राहत दी है। न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की एकल पीठ ने नगर मजिस्ट्रेट के उस आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी है, जिसके तहत मस्जिद कमेटी से करीब 6 करोड़ 41 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति वसूलने का निर्देश दिया गया था।
अदालत ने मामले में उत्तर प्रदेश सरकार और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों से जवाब मांगा है। याचिका पर अगली सुनवाई 12 अक्टूबर 2026 को होगी।
क्या है पूरा मामला

मामला सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित एक मस्जिद से जुड़ा है। प्रशासन का आरोप था कि मस्जिद का निर्माण सरकारी भूमि पर अतिक्रमण कर किया गया है। इसी आधार पर प्रशासन ने ढांचे को हटाने की कार्रवाई की और बाद में मस्जिद कमेटी से ध्वस्तीकरण तथा उससे जुड़े खर्च की भरपाई के रूप में 6.41 करोड़ रुपये वसूलने का आदेश जारी किया।

मस्जिद कमेटी ने प्रशासन की कार्रवाई और हर्जाना वसूली के आदेश को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी। कमेटी की ओर से तर्क दिया गया कि ध्वस्तीकरण की कार्रवाई उचित कानूनी प्रक्रिया, पर्याप्त नोटिस और सुनवाई का अवसर दिए बिना की गई। कमेटी ने हर्जाना वसूली के आदेश को भी चुनौती देते हुए उसे रद्द करने की मांग की।
हाईकोर्ट का आदेश
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की पीठ ने राज्य सरकार से पूरे मामले पर जवाब मांगा। अदालत ने फिलहाल नगर मजिस्ट्रेट के उस आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी, जिसके तहत मस्जिद कमेटी से 6.41 करोड़ रुपये की वसूली की जानी थी।
इसका अर्थ है कि अगली सुनवाई तक प्रशासन इस आदेश के आधार पर मस्जिद कमेटी से उक्त राशि की जबरन वसूली नहीं कर सकेगा। हालांकि, हाईकोर्ट ने अभी मामले के अंतिम गुण-दोष पर कोई फैसला नहीं दिया है। अंतिम निर्णय सरकार और संबंधित पक्षों के जवाब तथा अदालत के समक्ष रखे जाने वाले रिकॉर्ड के आधार पर होगा।

कमेटी को क्या राहत मिली
हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश से मस्जिद कमेटी को फिलहाल आर्थिक राहत मिली है। प्रशासन द्वारा निर्धारित बड़ी रकम की वसूली पर रोक लगने से कमेटी को तत्काल भुगतान या संपत्ति संबंधी कार्रवाई का सामना नहीं करना पड़ेगा।

लेकिन यह राहत अंतिम नहीं है। अदालत आगे की सुनवाई में यह तय करेगी कि हर्जाना वसूली का आदेश कानून के अनुरूप था या नहीं। यदि सरकार अपने जवाब और दस्तावेजों से आदेश को सही साबित कर पाती है, तो अदालत आगे वसूली की कार्रवाई की अनुमति दे सकती है। दूसरी ओर, यदि अदालत को प्रक्रिया में गंभीर कमी मिलती है, तो आदेश में संशोधन या उसे निरस्त भी किया जा सकता है।
अब आगे क्या होगा
अब राज्य सरकार और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखना होगा। जवाब में प्रशासन को यह स्पष्ट करना होगा कि—
मस्जिद को सरकारी भूमि पर अतिक्रमण क्यों माना गया।
ध्वस्तीकरण से पहले कौन-कौन सी कानूनी प्रक्रिया अपनाई गई।
मस्जिद कमेटी को नोटिस और सुनवाई का अवसर दिया गया या नहीं।
6.41 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति राशि किस आधार पर तय की गई।
राशि की गणना में ध्वस्तीकरण, प्रशासनिक खर्च या अन्य मदों को कैसे शामिल किया गया।
मस्जिद कमेटी भी अपने पक्ष में राजस्व रिकॉर्ड, स्वामित्व या कब्जे से संबंधित दस्तावेज, नोटिस की प्रतियां और प्रशासनिक कार्रवाई का रिकॉर्ड अदालत में पेश कर सकती है।
अंतिम फैसला अभी बाकी
हाईकोर्ट का मौजूदा आदेश केवल अंतरिम राहत से जुड़ा है। इसे मस्जिद के निर्माण, भूमि के स्वामित्व या ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पर अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता। अदालत ने अभी यह घोषित नहीं किया है कि प्रशासन की कार्रवाई सही थी या गलत।
अगली सुनवाई में सरकार का जवाब आने के बाद अदालत अंतरिम रोक को जारी रखने, उसमें बदलाव करने या उसे समाप्त करने पर विचार कर सकती है। साथ ही, मामले की आगे की सुनवाई के लिए विस्तृत निर्देश भी जारी किए जा सकते हैं।
प्रशासन और कमेटी के दावे
प्रशासन का पक्ष यह है कि सरकारी भूमि पर अनधिकृत कब्जे को हटाना आवश्यक था और कार्रवाई के कारण हुए खर्च की भरपाई संबंधित पक्ष से की जानी चाहिए। वहीं, मस्जिद कमेटी का कहना है कि प्रशासन ने पर्याप्त कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया और उस पर मनमाने ढंग से भारी हर्जाना लगाया गया।
मामले में अब विवाद का मुख्य बिंदु केवल मस्जिद का अस्तित्व नहीं, बल्कि प्रशासनिक कार्रवाई की वैधता, नोटिस की प्रक्रिया और हर्जाने की गणना भी है।
संक्षेप में: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 6.41 करोड़ रुपये की हर्जाना वसूली पर फिलहाल रोक लगाई है और उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब मांगा है। अगली सुनवाई 12 अक्टूबर 2026 को होगी। तब तक वसूली की कार्रवाई रुकी रहेगी, लेकिन मस्जिद ध्वस्तीकरण और हर्जाने की वैधता पर अंतिम निर्णय अभी नहीं हुआ है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *