September 29, 2026

एसआरएन अस्पताल के युवा कार्डियोलॉजिस्टों ने तीन मरीजों को दिया नया जीवन

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एसआरएन अस्पताल के युवा कार्डियोलॉजिस्टों ने तीन मरीजों को दिया नया जीवन

एसआरएन अस्पताल के युवा कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. विमल निषाद, डॉ. वैभव श्रीवास्तव और डॉ. ऋषिका पटेल ने जटिल हृदय रोगों से पीड़ित तीन मरीजों का सफल इलाज कर उन्हें नया जीवन दिया।
पहला मरीज 58 वर्षीय पुरुष हैं, जो कोरांव के निवासी हैं। वे ब्लैडर आउटलेट ऑब्स्ट्रक्शन से पीड़ित थे, लेकिन हृदय में 32 मिमी के छेद (एएसडी) के कारण कोई भी सर्जन उन्हें ऑपरेशन के लिए तैयार नहीं था, क्योंकि मरीज हाई कार्डियक रिस्क में था। पिछले एक वर्ष से वे लगातार परेशान थे। डॉक्टरों की टीम ने बिना किसी सर्जिकल चीड़-फाड़ के 40 मिमी के डिवाइस से हृदय का छेद सफलतापूर्वक बंद किया। अब एएसडी क्लोज़र हो जाने के बाद तीन महीने के भीतर मरीज का ब्लैडर आउटलेट ऑब्स्ट्रक्शन का ऑपरेशन सुरक्षित रूप से किया जा सकेगा।
दूसरी मरीज फूलपुर की 52 वर्षीय महिला हैं, जिनके हृदय में 31 मिमी का छेद था। इसके कारण उनका दाहिना हृदय फेल हो चुका था और लीवर में कंजेशन की वजह से गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो रही थीं। डॉक्टरों ने दाहिनी जांघ की मोटी नस के माध्यम से 38 मिमी के डिवाइस से बिना चीड़-फाड़ के हृदय का छेद बंद किया। दोनों मरीज अब पूरी तरह स्वस्थ हैं। चिकित्सकों के अनुसार 3 से 6 महीनों में राइट हार्ट फेल्योर और लीवर की स्थिति में भी स्पष्ट सुधार होगा।
इसके अलावा 25 वर्षीय युवक, जो जारी का निवासी है, पिछले तीन वर्षों से सांस फूलने और दिल की धड़कन से परेशान था तथा पिछले तीन महीनों से टीबी की दवाएं ले रहा था। कुंभ मेले में अपनी मां के साथ कल्पवास के दौरान अचानक उसकी तबीयत बिगड़ गई और उसे हार्ट फेल्योर की स्थिति में एसआरएन अस्पताल लाया गया। जांच में टीबी की पुष्टि नहीं हुई, बल्कि मरीज में गंभीर माइट्रल स्टेनोसिस पाई गई, जिससे हृदय का बायां वाल्व सिकुड़ गया था।
मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. वी.के. पांडेय ने आर्थिक सहायता प्रदान कर मरीज का बैलून माइट्रल वॉल्वोटॉमी निःशुल्क कराया। सफल उपचार के बाद युवक की हालत में तेजी से सुधार हुआ।
वर्तमान में तीनों मरीज स्वस्थ हैं और चिकित्सकीय निगरानी में हैं।

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