हाईकोर्ट-पाक्सो मामले में आरोपित को जमानत, विवेचक पर हाई कोर्ट सख्त
एसपी जौनपुर को आदेश- विवेचक की लापरवाही की जांच कराई जाए

प्रयागराज: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने जौनपुर के मुंगराबादशाहपुर थाने में दर्ज पाक्सो एक्ट से जुड़े मामले में आरोपित रोहित यादव को जमानत दे दी है। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन के पास अश्लील वीडियो/फोटो का कोई साक्ष्य नहीं है और सह-आरोपित को पहले ही जमानत मिल चुकी है। कोर्ट ने विवेचक की लापरवाही पर सख्त रुख अपनाते हुए एसपी को जांच कराने का आदेश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की एकलपीठ ने दिया है।
बचाव पक्ष का कहना था कि प्राथमिकी और बीएनएस की धारा 180, 183 में हुए बयान के अनुसार पीड़िता अपनी मर्जी से दो बार घर से गई थी। पहले मुंबई और फिर दिल्ली। आरोप है कि मुंबई यात्रा के दौरान ली गई अश्लील वीडियो/फोटो के आधार पर ब्लैकमेल कर उसे दिल्ली ले जाया गया, लेकिन विवेचना में ऐसी कोई वीडियो या फोटो बरामद नहीं हुई। अभियोजन की कहानी संदिग्ध हो जाती है। मेडिकल रिपोर्ट में भी यौन उत्पीड़न की पुष्टि नहीं हुई। सह आरोपित संदीप कुमार को पहले ही हाईकोर्ट से 25 मार्च को जमानत मिल चुकी है। इसके विरुद्ध वादी मुकदमा ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दाखिल की थी जिसे 14 जुलाई 2026 को खारिज कर दिया गया है। समानता के आधार पर रोहित भी जमानत का हकदार है। वह 26जनवरी 2026 से जेल में है। सरकार व पीड़िता के वकील ने कहा कि पुलिस ने आरोपित और सह आरोपित के मोबाइल जब्त नहीं किए, जिससे वीडियो/फोटो की सच्चाई जांची जाती। हालांकि वह इस बात से इन्कार नहीं कर सके कि पीड़िता अपनी मर्जी से गई थी और केस डायरी में कोई अश्लील वीडियो/फोटो नहीं है। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के कपिल वधावन बनाम सीबीआइ और हाईकोर्ट के माया तिवारी बनाम राज्य के जमानत संबंधी दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि साक्ष्य के अभाव तथा सह आरोपित को जमानत मिलने के कारण आरोपित जमानत का हकदार है। कोर्ट ने कहा, पुलिस ने आरोपित के मोबाइल जब्त नहीं किए जो लापरवाही है जबकि पंकज बनाम राज्य मामले में डीजीपी को पहले ही निर्देश दिया जा चुका है। एसपी इस बात की जांच करवाएं कि विवेचक ने मोबाइल क्यों नहीं जब्त किया।

