September 30, 2026

बदायूं का चर्चित आशा-गोविंद ऑनर किलिंग हत्याकांड: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फांसी की सजा रद्द कर चारों आरोपियों को किया बरी ​

0

बदायूं का चर्चित आशा-गोविंद ऑनर किलिंग हत्याकांड: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फांसी की सजा रद्द कर चारों आरोपियों को किया बरी
​
उत्तर प्रदेश के बदायूं जनपद स्थित वजीरगंज थाना क्षेत्र के उरैना गांव में वर्ष 2017 में हुए चर्चित आशा-गोविंद ऑनर किलिंग (डबल मर्डर) केस में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने निचली अदालत द्वारा चारों अभियुक्तों को दी गई फांसी की सजा को रद्द करते हुए उन्हें साक्ष्यों के अभाव में दोषमुक्त (बरी) कर दिया है। ​यह मामला वर्ष 2017 का है। आशा (20 वर्ष) और गोविंद (23 वर्ष) के बीच प्रेम संबंध थे। आशा ने गोविंद को अपने घर बुलाया था, जहाँ दोनों की हत्या कर दी गई। गोविंद का शव आशा के घर के बेडरूम में मिला था, जबकि अपने बचाव में बाहर भागी आशा की हत्या घर के बाहर सड़क पर की गई। घटना स्थल से खून से सने कपड़े, गद्दे, तकिए और हथियार बरामद हुए थे।
​घटना के 4-5 दिन बाद पुलिस ने लड़की के पिता और भाई सहित चार लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था।
​
​पुलिस जांच और चार्जशीट के बाद बदायूं ट्रायल कोर्ट में मामला चला। वर्ष 2022 में ट्रायल कोर्ट ने चारों अभियुक्तों को दोषी मानते हुए फांसी की सजा सुनाई थी।
​ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपील दायर की गई। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने साक्ष्यों का पुनः मूल्यांकन किया मामले की मुख्य चश्मदीद गवाह (श्रीमती रेशमा) ने पूछताछ में अभियोजन का समर्थन किया था, लेकिन जिरह में वह अपने बयान से पलट गई। अभियोजन पक्ष ने साक्ष्य अधिनियम की धारा 137 और 138 के तहत पुनः पूछताछ नहीं की, जिससे गवाह का क्रॉस-एग्जामिनेशन ही अंतिम माना गया।
​ अभियोजन का तर्क था कि शव घर के अंदर मिले थे, इसलिए साक्ष्य अधिनियम की धारा 106 के तहत आरोपी पर ही खुद को निर्दोष साबित करने का भार बनता है। लेकिन हाईकोर्ट ने पाया कि जब पुलिस पहुंची तो घर खुला हुआ था, आरोपी मौके पर नहीं थे और न ही घर अंदर से लॉक था। धारा 106 तभी लागू होती है जब घटना की विशेष जानकारी केवल आरोपी के पास हो।
​​आरोपियों के वकील ने बताया कि सामान्यतः फांसी की सजा आजीवन कारावास में बदली जाती है, लेकिन यह एक विशेष मामला है जहाँ ऑनर किलिंग/डबल मर्डर के मामले में आरोपियों को पूरी तरह बरी कर दिया गया है।
​लगभग 6-7 साल तक जेल में सजा काटने के बाद चारों आरोपी बरी तो हो गए हैं, लेकिन नोएडा के चर्चित आरुषि हत्याकांड की तरह बदायूं के इस डबल मर्डर केस में भी यह सवाल अभी भी अनुत्तरित है कि आखिर आशा और गोविंद का हत्यारा कौन है?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

चर्चित खबरे