नगर पालिका परिषद के दोषी कर्मचारियों पर कार्रवाई न होने पर हाईकोर्ट सख्त, कृत कार्यवाही की मांगी रिपोर्ट

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेन्द्र की खंडपीठ ने मुकेश कुमार की जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए राज्य सरकार और नगर पालिका परिषद के रवैये पर नाराज़गी जताई है।
सरकारी अधिवक्ता ने बताया कि कोर्ट के 10 जुलाई 2026 के आदेश के अनुपालन में विनोद कुमार नामक अधिकारी को भविष्य में सतर्क रहने की चेतावनी देकर उनकी चरित्र पंजिका में दर्ज करने का आदेश पेश किया गया। अन्य राज नारायण के विरुद्ध सिविल सेवा नियमावली के अनुच्छेद 351-ए के तहत अनुमति दे दी गई । लेकिन एक प्रदुम्न सिंह के मामले में यह अभी भी लंबित है।याचिकाकर्ता के वकील ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा 8 जनवरी 2026 को नगर विकास विभाग के प्रमुख सचिव को दिए गए स्पष्ट निर्देश के बावजूद नगर पालिका परिषद के कर्मचारियों/अधिकारियों के विरुद्ध अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। नगर पालिका परिषद की ओर से दाखिल हलफनामे में कहा गया कि दोषी पाए गए पांच संविदा कर्मचारियों को हटा दिया गया है।शेष अधिकारियों/कर्मचारियों के मामले में सिर्फ दो लिपिकों राम स्वरूप अहिरवार और अमोक श्रीवास्तव को 12 जून 2026 को नोटिस जारी किए गए, जिसे कोर्ट ने *दिखावे” की कार्रवाई करार दिया।
पीठ ने कहा कि नगर पालिका परिषद ने स्पष्ट निर्देशों के बावजूद दोषी कर्मचारियों/अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई नहीं की और अब केवल दो लिपिकों को नोटिस जारी कर औपचारिकता निभाई गई है।
कोर्ट ने नगर विकास विभाग और नगर पालिका परिषद के वकीलों को स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई।-प्रदुम्न सिंह के मामले में भी शीघ्र आवश्यक कदम उठाने को कहा गया है। मामले की अगली सुनवाई 14 सितंबर 2026 को नियत की गई है, जिसमें कोर्ट के निर्देश पर लगाए गए पौधों की ताज़ा तस्वीरें भी पेश करनी होंगी।

