August 11, 2026

नशामुक्त युवा ही बनाएंगे सशक्त और विकसित भारत — प्रो. सत्यकाम

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नशामुक्त युवा ही बनाएंगे सशक्त और विकसित भारत — प्रो. सत्यकाम

नुक्कड़ नाटक में अभिनय से समझाया नशे का दुष्परिणाम

गोद लिए गांव में राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय ने चलाया नशा उन्मूलन एवं जन-जागरूकता अभियान

 

प्रयागराज, 10 अगस्त 2026। उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय, प्रयागराज द्वारा संचालित नशा उन्मूलन एवं जन-जागरूकता अभियान के अंतर्गत सोमवार को विश्वविद्यालय द्वारा गोद लिए गए सोरांव क्षेत्र के लेहरा गांव के कंपोजिट विद्यालय, लेहरा में नुक्कड़ नाटक का आयोजन किया गया। विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों ने प्रभावशाली अभिनय के माध्यम से ग्रामीणों, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों को नशे के शारीरिक, मानसिक, पारिवारिक और सामाजिक दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक किया तथा नशामुक्त जीवन अपनाने का संदेश दिया।

नुक्कड़ नाटक में कलाकारों ने सरल संवादों और जीवंत अभिनय के माध्यम से यह दर्शाया कि नशे की शुरुआत कई बार शौक, जिज्ञासा अथवा गलत संगति से होती है, लेकिन धीरे-धीरे यह व्यक्ति के स्वास्थ्य के साथ उसके परिवार, आर्थिक स्थिति और सामाजिक जीवन को भी प्रभावित करने लगती है। प्रस्तुति के माध्यम से विशेष रूप से युवाओं को हर प्रकार के नशीले पदार्थों से दूर रहने तथा अपने आसपास के लोगों को भी इसके प्रति जागरूक करने का संदेश दिया गया।

इस अवसर पर गांव पहुंचे विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सत्यकाम ने विद्यार्थियों एवं ग्रामवासियों का आह्वान करते हुए कहा कि नशा केवल किसी एक व्यक्ति की समस्या नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव पूरे परिवार और समाज पर पड़ता है। इसलिए नशा उन्मूलन के अभियान को केवल संस्थागत कार्यक्रम न मानकर सामाजिक आंदोलन का स्वरूप देना होगा। कुलपति ने कहा कि परिवार नशे के विरुद्ध जागरूकता की पहली और सबसे प्रभावी इकाई है। माता-पिता एवं परिवार के अन्य सदस्यों को बच्चों और युवाओं के व्यवहार में होने वाले परिवर्तनों के प्रति सजग रहना चाहिए। युवाओं को भी यह समझना होगा कि उनका स्वास्थ्य, ऊर्जा और प्रतिभा केवल उनके स्वयं के लिए नहीं, बल्कि परिवार, समाज और राष्ट्र की अमूल्य पूंजी है। उन्होंने ग्रामवासियों और विद्यार्थियों से अपील की कि वे सभी प्रकार के नशे से अपने परिवार को सुरक्षित रखने का संकल्प लें। उन्होंने कहा कि स्वस्थ, जागरूक, अनुशासित और नशामुक्त युवा शक्ति ही विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

नुक्कड़ नाटक की प्रस्तुति ज्योति, दिग्विजय, शिवा एवं उनकी टीम ने की। कलाकारों ने नशे के कारण उत्पन्न होने वाली पारिवारिक समस्याओं, स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों तथा सामाजिक एवं आर्थिक कठिनाइयों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। साथ ही नशे से बचाव, समय रहते उचित मार्गदर्शन तथा परिवार और समाज के सहयोग की आवश्यकता को भी रेखांकित किया गया।

नुक्कड़ नाटक के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि नशे के विरुद्ध संघर्ष में समाज के प्रत्येक व्यक्ति की सहभागिता आवश्यक है। विशेष रूप से विद्यालयों, विश्वविद्यालयों, परिवारों और स्थानीय समुदायों को मिलकर युवाओं में जागरूकता उत्पन्न करनी होगी।

कार्यक्रम के संयोजक प्रो. ज्ञान प्रकाश यादव ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए कहा कि जन-जागरूकता कार्यक्रमों की सार्थकता तभी है, जब उनका संदेश विश्वविद्यालय परिसर से निकलकर समाज और गांवों तक पहुंचे। नुक्कड़ नाटक जनसंचार का एक प्रभावी माध्यम है, जिसके द्वारा गंभीर सामाजिक विषयों को भी सहज एवं रोचक तरीके से आमजन तक पहुंचाया जा सकता है। उन्होंने कार्यक्रम में सक्रिय सहभागिता के लिए विश्वविद्यालय परिवार के सदस्यों, कंपोजिट विद्यालय के शिक्षकों एवं विद्यार्थियों तथा लेहरा गांव के ग्रामीणों के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलसचिव कर्नल विनय कुमार, प्रो. विनोद कुमार गुप्त, प्रो. मीरा पाल, डॉ. साधना श्रीवास्तव, डॉ. अमरेन्द्र कुमार यादव, डॉ. धर्मराज यादव तथा डॉ. आशा कृष्ण सहित विश्वविद्यालय परिवार के सदस्य, विद्यालय के शिक्षक, विद्यार्थी एवं बड़ी संख्या में ग्रामवासी उपस्थित रहे।

 

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