फर्जी नियुक्ति पाने वाले 6 सहायक अध्यापकों को कोई सेवा लाभ देने से इन्कार

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फर्जी नियुक्ति पाने वाले 6 सहायक अध्यापकों को कोई सेवा लाभ देने से इन्कार

20 साल पहले फर्जी तरीके से नियुक्त शिक्षकों की नियुक्ति अवैध करार

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति श्रीमती मंजू रानी चौहान ने कहा है कि फर्जी तरीके से नियुक्त छः अध्यापकों को कोई भी सेवा लाभ नहीं दिया जाएगा, क्योंकि जांच में उनकी नियुक्ति नियमों के अनुरूप न होकर अवैध पाई गई है।

यह याचिका “महात्मा गांधी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय” की प्रबंध समिति की ओर से वर्ष 2006 में दाखिल की गई थी। याचिका में मांग की गई थी कि विद्यालय में छह व्यक्तियों की सहायक अध्यापक के पद पर हुई नियुक्ति की जांच कर उसे रद्द किया जाए, क्योंकि याचिकाकर्ता के अनुसार इन लोगों की नियुक्ति बिना किसी वैध प्रक्रिया के हुई थी। इसके साथ ही यह भी मांग की गई थी कि इन व्यक्तियों को अब तक भुगतान की गई करीब 2 लाख 74 हजार रुपये की राशि जिम्मेदार अधिकारियों से वसूली जाए और दोषियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई जाय।

सुनवाई के दौरान विद्यालय की प्रबंध समिति में मैनेजर पद को लेकर भी विवाद सामने आया। अलग-अलग समय पर अलग-अलग व्यक्तियों ने खुद को मैनेजर बताते हुए याचिका वापस लेने और फिर उसे बहाल कराने के आवेदन दिए, जिसके चलते मामला वर्षों तक तकनीकी पेचीदगियों में उलझा रहा।

वर्ष 2011 में अदालत ने बेसिक शिक्षा सचिव को निर्देश दिया था कि वे विवादित नियुक्तियों से जुड़े मूल अभिलेख तलब कर जांच करें। 15 जुलाई 2011 की जांच रिपोर्ट में यह सामने आया कि विपक्षी अध्यापकों की नियुक्ति बिना किसी स्वीकृत पद के, धोखाधड़ी से की गई थी। हालांकि इसके बाद भी मामला वर्षों तक लटका रहा, क्योंकि जांच से जुड़े मूल अभिलेख गुम हो गए थे और संबंधित अधिकारी लगातार अदालत के आदेशों का पालन करने में विफल रहे।

पिछले कुछ महीनों में अदालत ने इस मामले में सख्त रुख अपनाया। बेसिक शिक्षा अधिकारी, जौनपुर को मूल अभिलेखों के साथ व्यक्तिगत रूप से पेश होने के निर्देश दिए गए। जब मूल अभिलेख उपलब्ध नहीं हो सके, तो अदालत ने अतिरिक्त शिक्षा निदेशक (बेसिक), उत्तर प्रदेश, प्रयागराज को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर हलफनामा दाखिल करने और स्पष्टीकरण देने का आदेश दिया। इसके बाद संबंधित जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को नए सिरे से जांच कर, संबंधित पक्षों को सुनवाई का अवसर देकर रिपोर्ट पेश करने को कहा गया।
नई जांच रिपोर्ट में भी यही निष्कर्ष निकला कि छ अध्यापकों की नियुक्ति कानूनन निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार नहीं हुई थी। इसी आधार पर अदालत ने याचिका का निस्तारण करते हुए स्पष्ट आदेश दिया कि संबंधित प्राधिकारी इन छह व्यक्तियों को कोई सेवा लाभ न दें, क्योंकि उनकी नियुक्ति अवैध पाई गई है। निर्देश दिया गया कि इस आदेश की जानकारी तत्काल सभी संबंधित सक्षम प्राधिकारियों को दें और उसका अनुपालन सुनिश्चित कराए।

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