कायस्थ पाठशाला ट्रस्ट अध्यक्ष पद का चुनाव विवाद: कमिश्नर कोर्ट से डॉ सुशील सिन्हा को झटका, पुनर्मतगणना का आदेश बरकरार

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​कायस्थ पाठशाला ट्रस्ट अध्यक्ष पद का चुनाव विवाद:
कमिश्नर कोर्ट से डॉ सुशील सिन्हा को झटका, पुनर्मतगणना का आदेश बरकरार


​प्रयागराज। प्रयागराज की कमिश्नर अदालत ने कायस्थ पाठशाला ट्रस्ट के बहुचर्चित चुनाव विवाद में अध्यक्ष पद के पूर्व घोषित विजेता डॉ सुशील कुमार सिन्हा की अपील को बलहीन और साक्ष्यहीन मानते हुए खारिज कर दिया है। इस फैसले के साथ ही कमिश्नर ने एसडीएम सदर द्वारा पूर्व में दिए गए वोटों की पुनर्मतगणना के आदेश को पूरी तरह सही ठहराया है।
चौधरी राघवेंद्र प्रताप सिंह के अधिवक्ता सत्यव्रत सहाय के अनुसार यह आदेश मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल ने डॉ सुशील सिन्हा को दिया है। कायस्थ पाठशाला ट्रस्ट के अध्यक्ष और कार्यकारिणी सदस्यों का चुनाव 25 दिसंबर 2023 को हुआ था। अगले दिन यानी 26 दिसंबर 2023 को आए परिणाम में डॉ सुशील कुमार सिन्हा को 18 वोटों से विजयी घोषित किया गया था। इस चुनाव परिणाम को विपक्षी प्रत्याशी चौधरी राघवेंद्र प्रताप सिंह ने चुनौती दी थी। राघवेंद्र सिंह का आरोप था कि चुनाव में कुल 9,543 मतदाताओं ने वोट डाला था लेकिन गणना केवल 9,395 वोटों की ही की गई। कार्यकारिणी सदस्य के बॉक्स में पड़े लगभग 148 वोटों को बिना गिने ही छोड़ दिया गया और करीब 50 वोटों को गलत तरीके से अवैध घोषित कर दिया गया। जीत का अंतर केवल 18 वोट होने के कारण उन्होंने तत्काल पुनर्मतगणना की मांग की थी, जिसे चुनाव अधिकारी ने अनसुना कर दिया था।
​मामला सहायक रजिस्ट्रार से होते हुए उपजिलाधिकारी (नियत प्राधिकारी) सदर प्रयागराज के पास पहुंचा। एसडीएम सदर ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद 22 मार्च 2025 को आदेश जारी कर सहायक रजिस्ट्रार फर्म्स, सोसाइटीज एवं चिट्स को सात दिन के भीतर सभी मतपत्रों की दोबारा गिनती कराने और परिणाम घोषित करने का निर्देश दिया था।
​एसडीएम सदर के इसी आदेश के खिलाफ डॉ सुशील कुमार सिन्हा ने कमिश्नर अदालत में अपील दाखिल की थी। डॉ सिन्हा के वकील ने दलील दी थी कि एसडीएम को दोबारा गिनती कराने या सहायक रजिस्ट्रार को परिणाम घोषित करने का निर्देश देने का अधिकार नहीं है।
​मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल ने अपने अंतिम आदेश में स्पष्ट किया कि सोसाइटी पंजीकरण अधिनियम 1860 की धारा 25(1) के तहत नियत प्राधिकारी को चुनाव से जुड़े किसी भी संदेह या विवाद को संक्षिप्त रूप से निपटाने का पूरा अधिकार है। अदालत ने माना कि जीत का अंतर मात्र 18 वोट होना और लगभग 200 वोटों को बिना सही ढंग से जांचे छोड़ देना चुनाव अधिकारी की कार्यप्रणाली व क्रियाकलापों पर संदेह व्यक्त करता है। ऐसे में नियत प्राधिकारी को पूर्ण अधिकार प्राप्त है कि वह चुनाव की पुनर्मतगणना व परिणाम घोषित करने के लिए किसी सक्षम अधिकारी को नामित करे। ​अदालत ने डॉ सुशील कुमार सिन्हा की अपील को पूरी तरह खारिज करते हुए एसडीएम अदालत की पत्रावली को आवश्यक कार्यवाही के लिए वापस भेज दिया है।

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