March 13, 2026

रेलवे ने हाथियों के आवागमन वाले 2000 किमी रेलखंड चिन्हित किए; वन्यजीव सुरक्षा पर सांसद के प्रश्न का मंत्री ने दिया उत्तर

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रेलवे ने हाथियों के आवागमन वाले 2000 किमी रेलखंड चिन्हित किए; वन्यजीव सुरक्षा पर सांसद के प्रश्न का मंत्री ने दिया उत्तर

नई दिल्ली। संसद में एक सांसद ने रेलवे ट्रैक पर हाथियों की लगातार हो रही मौतों को लेकर चिंता व्यक्त की। उन्होंने हाल ही में असम में हुई एक घटना का उल्लेख किया, जिसमें एक निर्धारित हाथी कॉरिडोर में ट्रेन की चपेट में आने से कई हाथियों की मृत्यु हो गई थी। सांसद ने यह जानना चाहा कि क्या रेलवे ट्रैकों के आसपास हाथियों के आवागमन वाले क्षेत्रों की सही पहचान की गई है और क्या वन्यजीव कॉरिडोर पर अतिरिक्त सुरक्षा उपायों को लागू करने के लिए सरकार के पास कोई त्वरित योजना है।
इस प्रश्न के उत्तर में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सदन को बताया कि भारतीय रेल ने हाथियों तथा अन्य वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। उन्होंने बताया कि देशभर में लगभग 2000 किलोमीटर ऐसे रेलखंडों की पहचान की गई है, जहाँ हाथियों का आवागमन रेलवे ट्रैक से होकर गुजरता है, और इन क्षेत्रों की लगातार निगरानी की जा रही है।
मंत्री ने बताया कि वन्यजीवों के सुरक्षित आवागमन के लिए अंडरपास और ओवरपास जैसे बुनियादी ढाँचों का निर्माण किया जा रहा है। इसके साथ ही उन्नत तकनीकों का भी उपयोग किया जा रहा है, जैसे ऑप्टिकल फाइबर केबल आधारित डिटेक्शन सिस्टम, जो रेलवे ट्रैक के पास हाथियों की गतिविधि का पता लगाकर तुरंत लोको पायलट और कंट्रोल रूम को अलर्ट भेजता है, जिससे समय रहते ट्रेन की गति कम की जा सके।
उन्होंने यह भी बताया कि कैमरा आधारित निगरानी प्रणाली का उपयोग भी किया जा रहा है, जो दूर से ही वन्यजीवों की गतिविधियों का पता लगाने में मदद करती है, ताकि रेलवे प्रशासन समय रहते आवश्यक कदम उठा सके। मंत्री के अनुसार, इन पहलों से ऐसे हादसों को रोकने में सकारात्मक परिणाम भी सामने आए हैं।
सदन को आश्वस्त करते हुए मंत्री ने कहा कि भारतीय रेल वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और भविष्य में भी वन्यजीव कॉरिडोर पर सुरक्षा उपायों को और सुदृढ़ करने के लिए सुझावों को शामिल किया जाएगा, ताकि ऐसे हादसों को न्यूनतम किया जा सके।
चर्चा के दौरान मंत्री ने कुछ विपक्षी सदस्यों द्वारा की गई व्यवधान की भी आलोचना करते हुए कहा कि ऐसा व्यवहार देश के विकास के प्रति गंभीरता की कमी को दर्शाता है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हो रही प्रगति में बाधा डालने जैसा है।

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