फसल क्षति का 12 अक्टूबर तक आकलन कर प्रभावित किसानों को नियमानुसार सहायता राशि उपलब्ध कराने के निर्देश

राहत आयुक्त ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रभावित जनपदों के जिलाधिकारियों एवं अपर जिलाधिकारियों के साथ फसल क्षति की समीक्षा की

लखनऊ 06 अक्टूबर, 2026। प्रदेश में हाल में हुई चक्रवात, अतिवृष्टि एवं बाढ़ के कारण फसलों को हुई क्षति का आकलन कर प्रभावित किसानों को नियमानुसार सहायता राशि उपलब्ध कराने के निर्देश राहत आयुक्त डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद ने दिए हैं। उन्होंने सोमवार को लाल बहादुर शास्त्री भवन, लखनऊ में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रभावित जनपदों के जिलाधिकारियों एवं अपर जिलाधिकारियों के साथ राहत एवं बचाव कार्यों की समीक्षा की।
राहत आयुक्त ने निर्देशित किया कि फसल क्षति का आकलन कर एक सप्ताह के भीतर राहत आयुक्त कार्यालय को रिपोर्ट प्रेषित की जाए तथा प्रभावित किसानों को नियमानुसार सहायता राशि का वितरण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने विशेष रूप से बाढ़ के पानी में डूबी फसलों का डिजिटल क्रॉप सर्वे कराए जाने के निर्देश दिए, ताकि फसल क्षति का सटीक एवं पारदर्शी आकलन सुनिश्चित हो सके। डिजिटल क्रॉप सर्वे से प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर पात्र प्रभावित किसानों को फसल क्षति के लिए नियमानुसार सहायता राशि उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने कहा कि डिजिटल माध्यम से फसल सर्वे किए जाने से क्षति का वास्तविक एवं सटीक आकलन संभव होगा तथा पात्र किसानों को उनकी फसल क्षति के अनुरूप सहायता राशि उपलब्ध कराने में सुविधा होगी। राहत आयुक्त ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि किसान हित सर्वोपरि है और किसी भी प्रभावित किसान का अहित नहीं होना चाहिए। राहत आयुक्त ने जिलाधिकारियों एवं अपर जिलाधिकारियों को निर्देशित किया कि वे केवल लेखपालों एवं कानूनगो की रिपोर्ट पर निर्भर न रहें, बल्कि स्वयं क्षेत्र में जाकर फसल क्षति सर्वेक्षण की स्थिति का निरीक्षण करें तथा सर्वे कार्य की गुणवत्ता एवं पारदर्शिता सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि राहत आयुक्त कार्यालय द्वारा उपलब्ध कराई गई गूगल शीट एवं पोर्टल पर प्रतिदिन फसल सर्वे की प्रगति एवं रिपोर्ट अनिवार्य रूप से दर्ज की जाए। बजट की मांग भी पोर्टल पर दर्ज वास्तविक आंकड़ों के अनुरूप ही की जाए। आंकड़ों में किसी प्रकार की भिन्नता पाए जाने पर संबंधित अधिकारी द्वारा उसका स्पष्ट कारण एवं स्थिति प्रस्तुत की जाएगी।
राहत आयुक्त ने निर्देश दिए कि बाढ़ के अतिरिक्त भारी वर्षा अथवा चक्रवात के प्रभाव से हुई फसल क्षति के आंकड़ों को भी निर्धारित गूगल शीट में अनिवार्य रूप से दर्ज किया जाए। फसल क्षति के आकलन के लिए आईएमडी एवं एडब्ल्यूएस एआरजी (AWS-ARG) की रिपोर्ट/आंकड़ों का भी उपयोग किया जाए, ताकि संबंधित क्षेत्रों में हुई वास्तविक वर्षा का समुचित आकलन करते हुए फसल क्षति का वैज्ञानिक एवं तथ्यपरक निर्धारण किया जा सके। उन्होंने उप जिलाधिकारियों एवं तहसीलदारों को डिजिटल क्रॉप सर्वे का क्रॉस-वेरिफिकेशन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि क्रॉस-वेरिफिकेशन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वास्तविक रूप से प्रभावित किसानों को उनकी फसल क्षति के अनुरूप सही एवं नियमानुसार सहायता राशि प्राप्त हो।
राहत आयुक्त ने यह भी निर्देशित किया कि फसल सर्वेक्षण से पूर्व संबंधित खसरा आदि अभिलेखों की जांच कर पिछले वर्ष बोई गई फसल की जानकारी प्राप्त कर ली जाए, जिससे वर्तमान फसल एवं क्षति का सही आकलन किया जा सके। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि प्रत्येक दशा में 12 अक्टूबर तक राहत पोर्टल पर डिजिटल क्रॉप सर्वे के अनुसार फसल क्षति संबंधी फीडिंग पूर्ण कर ली जाए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि सर्वेक्षण एवं सहायता वितरण की पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता, तत्परता एवं संवेदनशीलता का विशेष ध्यान रखा जाए।
राहत आयुक्त ने कहा कि किसान केवल अन्नदाता ही नहीं, बल्कि आमजन के जीवन की आधारशिला हैं। अतः सभी अधिकारी किसान हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए संवेदनशीलता एवं तत्परता के साथ कार्य करें, ताकि फसल क्षति से प्रभावित अधिक से अधिक पात्र किसानों को नियमानुसार समयबद्ध एवं प्रभावी सहायता उपलब्ध कराई जा सके।

