April 29, 2026

सोनभद्र: रेणुका नदी के तट पर वृक्षारोपण के नाम पर लाखों का ‘खेला’, मानकों की उड़ी धज्जियां

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सोनभद्र: रेणुका नदी के तट पर वृक्षारोपण के नाम पर लाखों का ‘खेला’, मानकों की उड़ी धज्जियां

रिपोर्ट मनोज सिंह राणा

ओबरा/सोनभद्र। उत्तर प्रदेश सरकार जहाँ एक ओर करोड़ों पौधे रोपकर प्रदेश को हरा-भरा बनाने का दावा कर रही है, वहीं सोनभद्र के ओबरा क्षेत्र में वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी सरकार की मंशा पर पानी फेर रहे हैं। रेणुका नदी के तट पर पारसोई-4 वृक्षारोपण स्थल पर भ्रष्टाचार की ऐसी ‘इबारत’ लिखी गई है, जिसे देखकर कोई भी हैरान रह जाए।
तकनीक नहीं, ये तो पौधों की ‘बलि’ है
मौके पर मौजूद हकीकत विभागीय आंकड़ों से कोसों दूर है। बोर्ड पर चिल्ला-चिल्ला कर 6112 ‘बोना नाली’ बनाने का दावा किया गया है, लेकिन धरातल पर अधिकांश गड्ढे खाली पड़े हैं। सबसे शर्मनाक स्थिति यह है कि जहाँ पेड़ लगाए भी गए हैं, वहां वैज्ञानिक मानकों को ताक पर रख दिया गया है। विभागीय नियमानुसार जिन पौधों के बीच 5 मीटर (लगभग 16 फीट) की दूरी होनी चाहिए थी, वहां 1 मीटर के दायरे में ही 25 से 30 पौधों को ठूंस दिया गया है।
भ्रष्टाचार का ‘सघन’ मॉडल
विशेषज्ञों का मानना है कि एक ही स्थान पर इतने पौधे लगाना उनकी ‘हत्या’ करने जैसा है। बिना खाद, बिना सिंचाई और बिना पर्याप्त जगह के ये पौधे कुछ ही दिनों में दम तोड़ देंगे। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि पूरे 15.28 हेक्टेयर क्षेत्र में गड्ढे खोदने और नाली बनाने की मजदूरी बचाने के लिए विभाग ने एक ही जगह पौधों की ‘खानापूर्ति’ कर लक्ष्य पूरा दिखा दिया है।
गायब है ‘सुरक्षा खाई’, दांव पर पर्यावरण
नदी के किनारे मिट्टी के कटाव को रोकने के लिए बोर्ड पर 1600 मीटर सुरक्षा खाई (CPT) बनाने का विवरण अंकित है, लेकिन मौके पर इसकी स्थिति नगण्य है। सुरक्षा के अभाव में आवारा पशु इन पौधों को अपना निवाला बना रहे हैं। करोड़ों के बजट वाले इस प्रोजेक्ट में न तो सिंचाई की व्यवस्था दिख रही है और न ही पौधों के संवर्धन के लिए कोई खाद या कीटनाशक का प्रयोग किया गया है।

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