अधिवक्ता की संदिग्ध मौत पर बेटी ने उठाए सवाल, किराएदार पर हत्या का शक

बेटी का आरोप—गंभीर धाराओं में केस के बावजूद आरोपी की गिरफ्तारी नहीं
प्रयागराज। अधिवक्ता सोमेंद्र गुप्ता की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले में उनकी बेटी श्रुति गुप्ता ने हत्या की आशंका जताते हुए पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। सोमवार को इलेक्ट्रॉनिक मीडिया क्लब के नारद सभागार में पत्रकार वार्ता के दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि मुकदमा दर्ज होने के बावजूद नामजद आरोपी खुलेआम घूम रहा है। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच कराने और आरोपी की गिरफ्तारी की मांग की।
श्रुति गुप्ता ने बताया कि 12 सितंबर की सुबह जार्जटाउन थाना क्षेत्र में उनके पिता की बाथरूम में पानी में डूबने से मौत की सूचना मिली थी। सूचना उनके पिता के किराएदार ने दी थी। मौके पर पहुंची पुलिस ने देखा कि अधिवक्ता बाल्टी में मुंह डाले पड़े थे। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। दिल्ली में रहने वाली श्रुति सूचना मिलने पर प्रयागराज पहुंचीं और अंतिम संस्कार के बाद 13 सितंबर को थाने जाकर अपने पिता की मौत पर संदेह जताते हुए शिकायत दी।
उन्होंने आरोप लगाया कि शिकायत दर्ज कराने के लिए उन्हें पुलिस के अधिकारियों के चक्कर लगाने पड़े। करीब 23 दिन बाद पुलिस कमिश्नर और ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर से मुलाकात तथा आश्वासन के बाद जार्जटाउन थाने में मुकदमा दर्ज किया गया। श्रुति के मुताबिक, मुकदमे में उनके पिता के किराएदार को आरोपी बनाया गया है।
श्रुति गुप्ता ने आरोप लगाया कि घटना के बाद पुलिस ने घटनास्थल को सील नहीं किया और आरोपी करीब 10 दिन तक उसी घर में रहा। इस दौरान घर के जरूरी सामान और दस्तावेज गायब होने का भी उन्होंने आरोप लगाया। उनका कहना है कि मुकदमा दर्ज होने के बाद भी वह लगातार पुलिस कार्यालयों के चक्कर लगाती रहीं और आरोपी की गिरफ्तारी की मांग करती रहीं। उन्होंने बताया कि 16 अक्टूबर को उनका बयान दर्ज किया गया, लेकिन अब तक आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।
मृतक की बेटी ने घटना के समय अपने पिता और आरोपी के मोबाइल की लोकेशन की जांच कराने की मांग की। उन्होंने यह भी दावा किया कि पिता के कमरे की तलाशी के दौरान उन्हें एक ऐसा आधार कार्ड मिला, जिस पर नाम अलग था, लेकिन फोटो आरोपी की थी। कार्ड पर लखनऊ का पता दर्ज होने की बात भी उन्होंने कही। श्रुति के अनुसार, इस संबंध में विवेचना अधिकारी को जानकारी दी गई, लेकिन इसे गंभीरता से नहीं लिया गया।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि थाने के पुलिसकर्मियों ने शिकायत के दौरान उनके साथ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया। श्रुति ने बताया कि 11 सितंबर की रात और 12 सितंबर की सुबह की घटनाओं के बीच की परिस्थितियां भी संदेह पैदा करती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि 11 सितंबर को आरोपी का जन्मदिन था।
पत्रकार वार्ता में अपनी मां किरण गुप्ता के साथ पहुंचीं श्रुति ने अधिवक्ता समुदाय से भी इस मामले में आवाज उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि जब अधिवक्ता एकता की बात की जाती है, तो एक अधिवक्ता की संदिग्ध मौत के मामले में भी सभी को गंभीरता दिखानी चाहिए। उन्होंने पुलिस से आरोपी को गिरफ्तार कर कानूनी कार्रवाई करने तथा अपने पिता की मौत की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।

