भगवान चित्रगुप्त महाराज की प्रतिमा स्थापना को लेकर कायस्थ समाज ने रखा अपना पक्ष, कहा—प्रतिमा के लिए अलग स्थान प्रस्तावित
भगवान चित्रगुप्त महाराज की प्रतिमा स्थापना को लेकर कायस्थ समाज ने रखा अपना पक्ष, कहा—प्रतिमा के लिए अलग स्थान प्रस्तावित, अन्य देवी-देवताओं के स्थान में परिवर्तन का कोई प्रस्ताव नहीं

बदलापुर, जौनपुर। नगर पंचायत बदलापुर के मुख्य बाजार भलुआही स्थित श्री हनुमान गढ़ी मंदिर के जीर्णोद्धार के दौरान भगवान चित्रगुप्त महाराज की प्रतिमा स्थापित किए जाने को लेकर उत्पन्न विवाद के संबंध में कायस्थ समाज की ओर से अपना पक्ष स्पष्ट किया गया है। समाज के लोगों का कहना है कि भगवान चित्रगुप्त महाराज की प्रतिमा स्थापना की मांग किसी अन्य देवी-देवता की प्रतिमा के स्थान को बदलने अथवा मंदिर की धार्मिक व्यवस्था में किसी प्रकार का हस्तक्षेप करने के उद्देश्य से नहीं की जा रही है।
कायस्थ समाज की ओर से कहा गया कि श्री हनुमान गढ़ी मंदिर बाजार की आस्था का पुराना केंद्र है और मंदिर के निर्माण के समय से ही स्थानीय परिवारों एवं बाजारवासियों की धार्मिक गतिविधियों में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। स्थानीय जानकारी के अनुसार मंदिर कई दशकों से श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र बना हुआ है तथा समय-समय पर बाजारवासियों और सामाजिक लोगों के सहयोग से यहां धार्मिक एवं जीर्णोद्धार संबंधी कार्य होते रहे हैं।
मंदिर निर्माण के समय से परिवार की रही है भूमिका
समाज की ओर से बताया गया कि जिस स्थान पर वर्तमान में श्री हनुमान गढ़ी मंदिर स्थित है, वहां मंदिर निर्माण के समय स्वर्गीय गया निगम के परिवार की भूमिका रही थी। मंदिर निर्माण के बाद से पूजा-पाठ, देखरेख और व्यवस्था से संबंधित कार्यों में भी परिवार की निरंतर भागीदारी रही है। वर्तमान में रामाश्रय निगम एवं उनका परिवार मंदिर की व्यवस्था से जुड़े हुए हैं।
कायस्थ समाज का कहना है कि मंदिर की वर्तमान धार्मिक गतिविधियों को लेकर किसी नए विवाद को जन्म देना समाज का उद्देश्य नहीं है। बल्कि जीर्णोद्धार के दौरान वर्षों से चली आ रही धार्मिक परंपराओं को व्यवस्थित रूप देने की दिशा में ही भगवान चित्रगुप्त महाराज की प्रतिमा स्थापना का प्रस्ताव रखा गया है।
वर्षों से होती रही है भगवान चित्रगुप्त की पूजा
कायस्थ समाज के अनुसार दीपावली के अगले दिन वर्षों से बाजार के कायस्थ परिवारों द्वारा श्री हनुमान गढ़ी मंदिर परिसर में भगवान चित्रगुप्त महाराज का चित्र स्थापित कर सामूहिक पूजा-अर्चना की जाती रही है। समाज का कहना है कि यह परंपरा अचानक शुरू नहीं हुई है, बल्कि लंबे समय से चली आ रही धार्मिक गतिविधि है।
समाज के लोगों का कहना है कि अब जब मंदिर का जीर्णोद्धार कराया जा रहा है तो भगवान चित्रगुप्त महाराज की प्रतिमा के लिए स्थायी स्थान निर्धारित किए जाने की मांग रखी गई है, ताकि वर्षों से चली आ रही पूजा परंपरा को स्थायी धार्मिक स्वरूप दिया जा सके।
प्रतिमा के लिए अलग स्थान का प्रस्ताव
कायस्थ समाज ने स्पष्ट किया है कि भगवान चित्रगुप्त महाराज की प्रतिमा स्थापित करने के लिए मंदिर परिसर में अलग स्थान का प्रस्ताव रखा गया है। समाज के अनुसार भगवान श्रीराम की प्रस्तावित प्रतिमा के सामने ईशान कोण में भगवान चित्रगुप्त महाराज की प्रतिमा स्थापित किए जाने की बात रखी गई है।
समाज का कहना है कि भगवान श्रीराम अथवा राधा-कृष्ण की प्रस्तावित प्रतिमाओं के लिए निर्धारित स्थान में किसी प्रकार का परिवर्तन करने की कोई मांग नहीं की गई है। न ही किसी अन्य देवी-देवता की प्रतिमा के स्थान पर भगवान चित्रगुप्त महाराज की प्रतिमा स्थापित करने का प्रस्ताव है।
कायस्थ समाज ने कहा कि इस संबंध में यदि किसी स्तर पर भ्रम उत्पन्न हुआ है तो उसे तथ्यों के आधार पर दूर किया जाना चाहिए। समाज का उद्देश्य मंदिर में सभी देवी-देवताओं के प्रति समान श्रद्धा रखते हुए भगवान चित्रगुप्त महाराज के लिए भी एक सम्मानजनक स्थान सुनिश्चित करना है।
भगवान चित्रगुप्त को केवल जाति विशेष तक सीमित करना उचित नहीं
समाज के लोगों ने कहा कि भगवान चित्रगुप्त महाराज को कायस्थ समाज द्वारा अपने इष्टदेव के रूप में श्रद्धापूर्वक पूजा जाता है, लेकिन धार्मिक मान्यताओं में उनका स्वरूप कर्मों का लेखा-जोखा रखने वाले देवता के रूप में भी वर्णित है। ऐसे में भगवान चित्रगुप्त महाराज की धार्मिक महत्ता को केवल जातीय दायरे तक सीमित करना उचित नहीं है।
समाज का कहना है कि मंदिर में भगवान चित्रगुप्त महाराज की प्रतिमा स्थापित किए जाने का प्रस्ताव किसी अन्य समाज अथवा किसी अन्य देवी-देवता के विरोध में नहीं है। यह केवल अपनी धार्मिक आस्था और वर्षों से चली आ रही पूजा परंपरा को स्थायी स्वरूप देने की इच्छा है।
बैठक में प्रशासन के समक्ष रखा गया पक्ष
मामले को लेकर बदलापुर कोतवाली में उपजिलाधिकारी मोहम्मद अमान एवं कोतवाली प्रभारी फूलचंद पांडेय की मौजूदगी में दोनों पक्षों की बैठक हुई। बैठक में कायस्थ समाज की ओर से भी अपना पक्ष प्रशासन के समक्ष रखा गया।
समाज के लोगों ने बताया कि बैठक में प्रतिमा स्थापना को लेकर अपनी धार्मिक आस्था, मंदिर से जुड़ी पुरानी परंपरा तथा प्रतिमा के प्रस्तावित स्थान के संबंध में जानकारी दी गई। प्रशासन की ओर से मंदिर परिसर में नई प्रतिमा स्थापित करने से पहले सक्षम अधिकारी से अनुमति लेने की बात कही गई।
कायस्थ समाज की ओर से प्रशासन द्वारा कही गई इस प्रक्रिया का सम्मान किए जाने की बात कही गई है। समाज का कहना है कि वह कानून एवं प्रशासनिक व्यवस्था का पालन करते हुए ही आगे की कार्रवाई करेगा।
समाज ने शांति एवं सौहार्द बनाए रखने की अपील की
कायस्थ समाज ने सभी समाज के लोगों से अपील की है कि इस धार्मिक विषय को जातीय विवाद का रूप न दिया जाए। समाज का कहना है कि भगवान चित्रगुप्त महाराज की प्रतिमा स्थापना का प्रस्ताव किसी समुदाय के विरुद्ध नहीं है और न ही किसी दूसरे देवी-देवता के स्थान को प्रभावित करने का उद्देश्य रखता है।
समाज की ओर से यह भी कहा गया कि यदि किसी व्यक्ति को मंदिर की व्यवस्था, प्रतिमा के स्थान अथवा धार्मिक प्रक्रिया को लेकर कोई आपत्ति है तो वह अपनी बात प्रशासन के समक्ष शांतिपूर्ण एवं संवैधानिक तरीके से रख सकता है। किसी भी प्रकार की अफवाह, भ्रामक सूचना अथवा आपसी तनाव से बचना सभी की जिम्मेदारी है।
कायस्थ समाज ने प्रशासन से भी आग्रह किया है कि मंदिर की पुरानी धार्मिक परंपराओं, स्थानीय लोगों की आस्था, मंदिर की वर्तमान स्थिति तथा प्रस्तावित प्रतिमा के स्थान को ध्यान में रखते हुए निष्पक्ष रूप से मामले का परीक्षण किया जाए और नियमानुसार उचित निर्णय लिया जाए।
समाज ने स्पष्ट किया कि भगवान चित्रगुप्त महाराज की प्रतिमा स्थापना की मांग किसी अन्य देवी-देवता के स्थान को हटाने या बदलने की नहीं, बल्कि मंदिर परिसर में उनके लिए अलग स्थान निर्धारित किए जाने की मांग है। समाज प्रशासन के निर्णय एवं कानूनसम्मत प्रक्रिया का सम्मान करते हुए अपनी धार्मिक आस्था के लिए शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखता रहेगा।

