उपेक्षित पड़ी आदमकद महा कवि निराला की प्रतिमा देखकर दुकान जी दुखी

प्रयागराज चल रहे हिंदी दिवस पखवाड़े के बीच बोट क्लब और काली माता मंदिर के पास यमुना तट पर स्थित महाकवि प0 सुर्यकांत त्रिपाठी निराला की आदमकद प्रतिमा अब गुमनामी मे है, अचानक उस पार्क मे नजर उस बड़ी प्रतिमा पर पडने पर नीचे सिला लेख पर निराला लिखा देख और आसपास गन्दगी देख बहुत दुख हुआ। वही से कुछ साहित्य कारो को सुचित करने पर लोगो ने कहा नही पता वही चण्डी कार्यालय के ब्रत शिल को फोन कर बताया उन्होने कहा हमे नही मालूम और कहा आज दिल्ली जा रहा हू, फिर कहा हम आ रहे देख कर उनका भी मन दुखी मगर कहा हम कुछ करेगे 2000/2001 मे लगी प्रतिमा गुमनामी मे पड़ी कुछ स्थानीय लोग आये और दुकानजी ने ब्रत शिल ने और लोगो ने माल्याअर्पण कर अपनी श्र्द्धा अर्पण किया।
वही दुकानजी ने कहा प्रयागराज के अनेको साहित्य कारो की पहचान निराला से होती वही कितनो को मालूम नही यहा भी प्रतिमा लगी है, वो भी उपेक्षित अब वहा के स्थानीय लोगो ने कहा पार्क अच्छा बन जाये वही ब्रत शील ने कहा हम पूरी कोशिस कर उस जगह के पार्क को साफ स्वच्छ् बनाने के लिये शासन से बात कर सुसज्जीत करने के लिये कहेगे वही दुकानजी ने महापौर जी नगर आयुक्त से जिलाधिकारी से कह कर इस पार्क का नाम निराला पार्क रख गेट पर द्वार बन जाये, प्रतिमा पर छतरी पीछे सिढ़ी और लाईट और एक स्थायी सफाई कर्मी नियुक्त और सुन्दर पार्क बन जाये, उपस्थीत ब्रत शिल शर्मा धीरज कुमार शर्मा.राजीव ठाकूर.बेबी प्रवीण कुमार बेबी जयसवाल.
श्री राम शर्मा.दुर्गेश दुबे. सतिस गुप्ता शैलेन्द् मिश्रा
प्रभात मौर्य शम्भु नाथ त्रिपाठी अंशुलजी. मौजूद रहकवि

