नगर पंचायत अध्यक्ष के अडियल एवं जिद्दी रवैये का खामियाजा भुगतने को मजबूर हो रहे पिपरीवासी

कुछ माह पूर्व जल विद्युत उत्पादन मंडल, पिपरी के तत्कालीन अधीक्षण अभियंता श्री सतीश चंद्र बुनकर द्वारा निगम की भूमि एवं भवनों को अतिक्रमण से सुरक्षित रखने के उद्देश्य से पिपरी के विभिन्न स्थानों पर विभागीय चेतावनी बोर्ड लगाए गए थे। इन बोर्डों का उद्देश्य स्पष्ट था कि निगम की संपत्तियों पर किसी प्रकार का अवैध कब्जा न हो।
लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति यह रही कि इन विभागीय बोर्डों पर ही नगर पंचायत पिपरी द्वारा गृहकर वसूली संबंधी सूचना एवं पंपलेट चस्पा कर दिए गए, जिससे विभाग द्वारा प्रदर्शित महत्वपूर्ण सूचना पूरी तरह ढक गई। यह प्रशासनिक असंवेदनशीलता है।
अब कुछ महीनों बाद थाना पिपरी के सामने लगे इन्हीं बोर्डों में से एक को उखाड़ा जा रहा है। स्थानीय लोगों द्वारा पूछे जाने पर बताया गया कि उक्त स्थान पर हाईमास्ट लाइट लगाए जाने का प्रस्ताव है।
प्रश्न यह है कि यदि विकास कार्य आवश्यक है तो क्या विभागीय संपत्ति और चेतावनी बोर्डों को हटाना ही एकमात्र विकल्प था?
यदि यही स्थिति बनी रही तो वह दिन दूर नहीं जब कभी सुव्यवस्थित औद्योगिक नगर के रूप में पहचान रखने वाला पिपरी अपनी मूल पहचान खोने की कगार पर पहुंच जाएगा।
जनहित में प्रश्न है— क्या संबंधित अधिकारी इस विषय का संज्ञान लेकर विभागीय संपत्तियों की सुरक्षा और विकास कार्यों के बीच संतुलन स्थापित करेंगे?
पत्राकार मनोज सिंह राणा की कलम से ✍️

