पी डी टण्डन भारत रत्न थे उनके नाम को मिटाना उचित नहीं

प्रयागराज। प्रयागराज के प्रबुद्ध जनों ने आज राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन के कार्यों की चर्चा करते हुए उनके नाम पर बने पार्क का नाम बदलना उचित नहीं होगा का प्रस्ताव पारित किया गया।
पंडित रामनरेश त्रिपाठी पिंडीवासा की अध्यक्षता में यह कार्यक्रम संपन्न हुआ जिसमें कहा गया कि अमर क्रांतिकारी राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन राजनीति के पुरोधा थे। हिंदी को आज सम्मान उन्हीं की वजह से मिला। साथ ही सामाजिक कार्यों के प्रणेता थे। उनके कारण प्रयागराज में कई संस्थाएं आज भी समाज सेवा के कार्य में लगी हैं जिसमें हिंदी साहित्य सम्मेलन प्रमुख है।
वक्ताओं ने बताया कि आज हिंदी को जो सम्मान है वह सिर्फ राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन की वजह से है। वह राजनीति के पुरोधा थे। लोग उनके साथ रहकर राजनीति सीखते थे। पंडित मोतीलाल नेहरू ने जवाहरलाल नेहरू से कहा था कि अगर राजनीति करनी है तो तुमको टंडन जी के साथ कुछ दिन रहना पड़ेगा।
वक्ताओं ने टंडन जी जैसे ईमानदार लोगों की कहानी सुनाई कि किस तरह से नगर प्रमुख रहते हुए उन्होंने अंग्रेजों के राज में भी अंग्रेज अफसर पर बकाया, होने पर पानी के कर के लिए उनका नल कटवा दिया था।
कार्यक्रम का संचालन डॉ प्रमोद शुक्ला ने किया। पूर्व सभासद खत्री सभा के सदस्य अजय मेहरोत्रा राकेश तिवारी, मणि तत्रिपाठी प्रीती रावत तापस घोष प्रीति रावत, प्रभात मिश्र अंकुर रावत मनोज , कमलेश शुभम पाण्डेय, आदि प्रमुख थे।
एक प्रस्ताव वीरेन्द्र पाठक द्वारा रखा गया कि पीडी टंडन महान व्यक्ति थे उनकी स्मृति में पार्क का नाम रखा गया है। इसे बदला ना जाए । इस हेतु पत्राचार व जन जागरण किया जाएगा, तथा लोगों को पुरुषोत्तम दास टंडन के बारे में अवगत कराया जाएगा।
अध्यक्षता कर रहे हैं रामनरेश त्रिपाठी व अन्य ने सर्वसम्मत से इसे पास किया।

