रास्ते में चलते-चलते दो समझौते,एलपीजी की दूर हो जाएगी किल्लत,यूएई में क्या करने वाले हैं मोदी

नई दिल्ली।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 मई को चार यूरोपीय देशों की 5 दिन की यात्रा पर जाएंगे।इस दौरान पीएम कुछ घंटे के लिए खाड़ी देश यूएई में भी रुकेंगे।पीएम के इस यात्रा पड़ाव को काफी अहम माना जा रहा है।इस दौरान दोनों देशों के बीच दो अहम समझौतों पर हस्ताक्षर हो सकते हैं।ये एलपीजी और स्ट्रैटजिक पेट्रोलियम रिजर्व से जुड़े हैं।
जानें सरकारी सूत्रों क्या कहना है
सरकारी सूत्रों का कहना है कि पीएम मोदी के यूएई में तीन घंटे के स्टॉप के दौरान एनर्जी सिक्योरिटी सबसे अहम मुद्दा होगा।ईरान जंग से दुनिया में एनर्जी की सप्लाई टाइट हो गई है।भारत पर भी इसका असर दिखने लगा है। पीएम ने हाल में लोगों से पेट्रोल और डीजल बचाने की अपील की थी।
यूएई भारत का अहम एनर्जी सप्लायर
यूएई भारत का अहम एनर्जी सप्लायर है।यह भारत के लिए कच्चे तेल का चौथा बड़ा सोर्स होने के साथ-साथ एलपीजी और एलएनजी का दूसरा बड़ा सप्लायर है। अमेरिका-ईरान जंग से होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों का आना-जाना बंद है,जिससे अप्रैल में खाड़ी देशों के उत्पादन में गिरावट आई है। अप्रैल में केवल यूएई के उत्पादन में तेजी आई।इसका कारण यह है कि वह होर्मुज स्ट्रेट को बाइपास करके गल्फ ऑफ ओमान में स्थित फुजैरा पोर्ट से तेल एक्सपोर्ट कर रहा है।
उत्पादन बढ़ाने की तैयारी
यूएई रोजाना 3.2 से 3.6 मिलियन बैरल तेल का उत्पादन कर रहा है।हाल में यूएई ओपेक और ओपेक प्लस से बाहर आ चुका है और अगले साल तक रोजाना 5 मिलियन बैरल तेल निकालने की तैयारी कर रहा है।यही कारण है कि भारत की एनर्जी सिक्योरिटी के लिए यूएई काफी अहम है। विदेश मंत्रालय का कहना है कि मोदी यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाह्यान के साथ आपसी रिश्तों,ऊर्जा सहयोग और क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा करेंगे। भारत की यूएई के साथ व्यापक रणनीतिक साझेदारी है। 45 लाख से अधिक भारतीय इस खाड़ी देश में रहते हैं।
जानें क्यों अहम हैं ये समझौते
पीएम मोदी 15 मई को चार यूरोपीय देशों की की यात्रा पर रवाना होंगे,इस दौरान पीएम लगभग तीन घंटे के लिए खाड़ी देश यूएई में रुकेंगे।इस दौरान एनर्जी सिक्योरिटी से जुड़े दो समझौतों पर हस्ताक्षर होंगे। अमेरिका और ईरान जंग से विश्व में एनर्जी की सप्लाई टाइट हो गई है।यूएई रोजाना लगभग 3.6 मिलियन बैरल तेल उत्पादन कर रहा है।
अमेरिका-ईरान जंग का असर
अमेरिका और ईरान में चल रही जंग को ढाई महीने हो चुके हैं।फिलहाल जंग थमने की उम्मीद नहीं है,जिससे होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से कच्चे तेल की सप्लाई टाइट हुई है। विश्व का लगभग 20 फीसदी कच्चा तेल इसी रास्ते गुजरता है।कच्चा तेल महंगा होने से भारत की इकॉनमी पर भी असर दिखने लगा है,क्योंकि भारत का लगभग 90 फीसदी तेल बाहर से आता है। ऐसे में यूएई के साथ समझौते भारत के लिए काफी अहम माने जा रहे हैं।

