डकैती, आगजनी, मारपीट के आरोप से बरी विधायक बिजया यादव सहित अन्य आरोपियों को नोटिस, झूसी थाने की घटना में अधीनस्थ अदालत के फैसले को अपील में दी गई है चुनौती

प्रयागराज । इलाहाबाद हाईकोर्ट ने डकैती, आगजनी व मारपीट के मामले में बरी किए जाने के फैसले के खिलाफ दाखिल अपील पर सपा विधायक विजमा यादव समेत दस आरोपियों को नोटिस जारी किया है।और मूल पत्रावली तलब की गई है। यह आदेश न्यायमूर्ति सलिल कुमार राय एवं न्यायमूर्ति देवेंद्र सिंह की खंडपीठ ने स्पेशल कोर्ट एमपी-एमएलए के गत 10 फरवरी 26 के निर्णय के विरुद्ध दाखिल शिकायतकर्ता शशी देवी की अपील पर उनके अधिवक्ता कुंजेश दुबे को सुनकर दिया है। एडवोकेट कुंजेश दुबे के अनुसार शशी देवी के प्रार्थना पत्र पर अदालत के आदेश पर विजमा यादव समेत दस लोगों के खिलाफ झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज हुई थी। शशी देवी का आरोप था कि उसके पति अशोक कुमार यादव अपना इलाज कराने मुम्बई चले गए, इस कारण परिवादिनी अपने परिवार व बच्चों के साथ उस्तापुर महमूदाबाद में बने मकान पर थी एवं उसके देवर राजकुमार व अवधेश अपने परिवार के साथ गांव छतनाग वाले मकान में थे। परिवादिनी के गांव के मोहनलाल यादव की हत्या कुछ अज्ञात व्यक्तियों ने कर दी थी। इस हत्या से उत्तेजित होकर मृतक के भाई मूलचन्द्र यादव, विजमा यादव, राजू यादव, ज्ञानचन्द्र यादव, अमर सिंह यादव, अशोक निषाद, लोहा सिंह, जबर सिंह, राजू, लालचन्द्र यादव, व 10-12 अज्ञात व्यक्तियों के साथ गांव छतनाग वाले मकान पर चढ़ आये और घर में घुसकर औरतों और बच्चों तथा उसके देवर राजकुमार व अवधेश को मारना पीटना शुरू कर दिया। परिवादिनी के देवर राजकुमार व अवधेश यादव गांव छोड़कर भाग गए, तब विजमा यादव ने अपने साथ आये व्यक्त्तियों को ललकारा कि पूरा घर लूटकर आग लगा दो। इस पर मुलजिमान ने घर में रखे जेवरात, कपड़ा, लाईसेंसी रायफल कारतूस उठा ले गये तथा घर में आग लगा दी जिससे घर में रखा करीब 140 बोरा अनाज वड घरेलू सामान जलकर राख हो गया। उन्होंने परिवादिनी के उस्तापुर महमूदाबाद के घर के सामने खड़े ट्रैक्टर को भी जला दिया। दूसरे दिन पुनः विजमा विधायिका के नेतृत्व में मूलचन्द्र यादव, अरुणेन्द्र उर्फ डब्बू, ज्ञान चन्द्र यादव, जबर सिंह, अमर सिंह, राजू यादव, राजू पुत्र तुलसीराम, अशोक निषाद, लालचन्द्र तथा 15-20 व्यक्तियों के साथ आए और उसके घर से लूटी हुई रायफल व अपने साथ लाये हुए असलहों से फायर पर करते हए परिवादिनी के दरवाजों को तोड़कर में घुस आए और परिवादिनी व उसके बच्चों को मारना पीटना व लूटपाट करना शुरू कर दिया। उसने इसका विरोध किया तो विजमा विधायिका नें ललकारा कि इस घर में भी आग लगा दो स्वयं कमरे में रखे हुए तख्त पर मिट्टी का तेल डालकर आग लगा दिया और बच्चों को आग की तरफ ढकेलने लगी। उसने इसका विरोध किया तो मौके पर मौजूद दरोगा पदमाकर राय ने उसे मारपीट कर अपने सिपाहियों से कहा कि इसे गाड़ी में लाद लो और पकड़कर थाने ले आए तथा थाने पर भद्दी-भद्दी गालियां देने लगे तथा चार-पांच लाठी मारा। उसके टेंट हाउस व घर पर आग लगा दी तथा सम्पूर्ण घर लूट लिया, जिससे उसका 15 20 लाख रुपये का नुकसान हुआ। इस मामले में ट्रायल के बाद स्पेशल कोर्ट एमपी-एमएलए ने गत 10 फरवरी को मामले में आरोपी मूलचन्द्र यादव, राजू यादव पुत्र बनवारी, अशोक निषाद, लोहा सिंह, अमर सिंह, ज्ञानचन्द्र, लालचन्द्र, जबर सिंह एवं राजू पुत्र तुलसीराम को आईपीसी की धारा 395 सपठित धारा 149, 397 सपठित धारा 149, 436 सपठित धारा 149, 323 सपठित धारा 149, 504 सपठित धारा 149 व 506 सपठित धारा 149 तथा अभियुक्त विजमा यादव को आईपीसी की धारा 395 सपठित धारा 109 व 149, 397 सपठित धारा 109 व 149, 4368 सपठित धारा 109 व 149, 323 सपठित धारा 109 व 149, 504 सपठित धारा 109 व 149 तथा 506 सपठित धारा 109 व 149 के आरोपों से दोषमुक्त कर दिया था।

