‘राधे कृष्णा हॉस्पिटल’ के मालिक जमशेद अली व अपात्र डॉक्टरों पर कार्रवाई करने कि मांग

रिपोर्ट मनोज सिंह राणा
तीन सदस्यीय जांच टीम की रिपोर्ट सार्वजनिक न करने वाले लापरवाह स्वास्थ्य अधिकारियों की भूमिका की उच्चस्तरीय जांच करने कि मांग
मिर्जापुर। वासलीगंज स्थित रिहायशी भवन में अवैध रूप से संचालित ‘राधे कृष्णा हॉस्पिटल’ के मालिक जमशेद अली व अपात्र डॉक्टरों पर कार्रवाई करने, तीन सदस्यीय जांच टीम की रिपोर्ट सार्वजनिक न करने वाले लापरवाह स्वास्थ्य अधिकारियों की भूमिका की उच्चस्तरीय जांच करने एवं जनहित में सख्त विधिक कार्रवाई के संबंध में मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश सरकार, लखनऊ को पत्र लिख करवाई कि मांग।
गौरतलब है कि चंदन दुबे ने जिले के वासलीगंज (बघेल की गली) में चल रहे एक खौफनाक स्वास्थ्य सिंडिकेट और उसे संरक्षण दे रहे प्रशासनिक तंत्र की ओर आकर्षित करना चाहता हूँ।
तथ्य और साक्ष्य निम्नलिखित हैं, रिहायशी भवन में अवैध अस्पताल और राजनीतिक रसूख: उक्त अवैध ‘राधे कृष्णा हॉस्पिटल’ को किसी कमर्शियल (व्यावसायिक) भवन के बजाय, पूर्व जिला महामंत्री जमशेद अली ने नियमों को ताक पर रखकर अपने निजी आवासीय मकान में खुलवाया है। यह कृत्य पूरी तरह से मानकों और नियमों के विपरीत है। उक्त अस्पताल के बोर्ड पर जारी होने वाला अनिवार्य रजिस्ट्रेशन नंबर दर्ज नहीं है। इसके बजाय भ्रमित करने के लिए इलेक्ट्रो-होम्योपैथी का एक नंबर (RMEE2342073) लिखा गया है। भारत सरकार और नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) इस प्रणाली को मान्यता नहीं देते और न ही इसके तहत एलोपैथिक इलाज या सर्जरी की अनुमति, पीड़ित परिवार का आरोप था कि ऑपरेशन थिएटर में कोई भी योग्य गायनेकोलॉजिस्ट या एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉक्टर मौजूद नहीं था। BEMS/BAMS जैसी डिग्रीधारी अपात्र व्यक्तियों द्वारा अवैध रूप से ऑपरेशन किया गया, जो सीधे तौर पर गैर-इरादतन हत्या का मामला है।घटना दिनांक 10 अक्टूबर 2026 की है अस्पताल में प्रसव पीड़ा के कारण भर्ती कराई गई एक प्रसूता (सना) और उसके नवजात बच्चे की दर्दनाक मौत हो गई। जांच में सामने आया कि जिस डॉक्टर के पास सर्जरी (ऑपरेशन) करने की कोई कानूनी डिग्री या योग्यता नहीं थी, उसने इस गैर-व्यावसायिक भवन में अवैध रूप से सिजेरियन ऑपरेशन (C-Section) कर दिया, जो सीधे तौर पर हत्या का मामला है। इसके अतिरिक्त अस्पताल परिसर के अंदर संचालित ब्लड जांच पैथोलॉजी सेंटर पूरी तरह से बिना रजिस्ट्रेशन (अवैध) के चल रहा है। इस पैथोलॉजी सेंटर के भीतर खुलेआम शराब और बीयर की बोतलें देखने को मिलीं, जो बकायदा कैमरे में कैद हुई थीं। राष्ट्रीय हिंदी दैनिक और विभिन्न सोशल मीडिया चैनल्स पर यह खबर प्रमुखता से चली भी थी। एक संवेदनशील चिकित्सा केंद्र के भीतर इस तरह का अनैतिक कृत्य साफ दर्शाता है कि मरीजों की जिंदगी भगवान भरोसे थी।, सीएमओ का खोखला आश्वासन: घटना के दिन ही मेरे द्वारा मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) मिर्जापुर को व्यक्तिगत रूप से फोन कर इस भ्रष्ट अस्पताल के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करने की मांग की गई थी। उस समय सीएमओ महोदय ने फोन पर त्वरित कार्रवाई का पूरा आश्वासन दिया था, जो बाद में पूरी तरह से निष्प्रभावी साबित हुआ।, जांच टीम का गठन और अधिकारियों की हीला-हवाली: नोडल अधिकारी से बात करने पर उन्होंने अवगत कराया था कि मामले की गंभीरता को देखते हुए तीन सदस्यीय जांच टीम का गठन किया गया है, जिसमें डॉ. रामानंद सिंह, एडिशनल सीएमओ डॉ. मुकेश जी और एडिशनल सीएमओ डॉ. ओझा शामिल हैं। नोडल अधिकारी ने स्पष्ट रूप से 3 दिन के भीतर जांच रिपोर्ट जारी करने का समय तय किया था।, 20 दिन बाद भी कोई कार्रवाई नहीं (मिलीभगत की आशंका): आज दिनांक 30 अक्टूबर 2026 बीत जाने के बाद भी (घटना के 20 दिन बाद) न तो किसी प्रकार की कोई जांच की गई, न ही कोई जांच रिपोर्ट मीडिया या जनता के सामने सौंपी गई। इससे स्पष्ट होता है कि स्थानीय स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी इस गंभीर मामले को दबाने, दोषियों को बचाने और उन्हें फर्जी तरीके से बैकडेट में लाइसेंस बांटने या साक्ष्य मिटाने का मौका देने में संलिप्त हैं।मुख्यमंत्री से जनहित में न्यायोचित प्रार्थना है कि नियमों के विपरीत आवासीय मकान में अस्पताल संचालित करवाने वाले मकान मालिक जमशेद अली और बिना डिग्री के ऑपरेशन करने वाले कथित डॉक्टरों पर तत्काल गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जेल भेजा जाए। इस अवैध अस्पताल को तुरंत सील कर इसका बोर्ड उतारा जाए। 3 दिन में रिपोर्ट देने का वादा कर 20 दिन तक मामले को लटकाने वाले स्वास्थ्य विभाग के तीनों जांच अधिकारियों (डॉ. रामानंद सिंह, डॉ. मुकेश, डॉ. ओझा) तथा पूरे मामले में शिथिलता बरतने वाले उच्चाधिकारियों की भूमिका की जांच कराई जाए कि वे किस सांठगांठ के तहत इस मौत के अड्डे को बचा रहे हैं।

