दो पैन कार्ड मामला: आजम खान और अब्दुल्ला आजम की दोषसिद्धि पर रोक व अंतरिम जमानत की मांग पर इलाहाबाद हाईकोर्ट में फैसला सुरक्षित

प्रयागराज, 15 अक्टूबर 2026: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कथित दो पैन कार्ड मामले में उत्तर प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री मोहम्मद आजम खान और उनके बेटे एवं पूर्व विधायक अब्दुल्ला आजम खान की दोषसिद्धि पर रोक, सजा निलंबित करने और अंतरिम जमानत की मांग वाली अर्जियों पर सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है।
न्यायमूर्ति समीत गोपाल की एकल पीठ ने गुरुवार को आज़म ख़ान व अबुल्लाह आज़म ख़ान की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी, एन.आई. जाफरी व अधिवक्ता शाश्वत आनंद, को सुना। वहीं, राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एवं अपर महाधिवक्ता अनूप त्रिवेदी तथा अपर सरकारी अधिवक्ता परितोष कुमार मालवीय ने पक्ष रखा। 15 अक्टूबर के आदेश में अदालत ने दर्ज किया कि सजा निलंबित करने की अर्जियों पर सभी पक्षों की दलीलें पूरी हो चुकी हैं और फैसला सुरक्षित रखा जाता है।
यह सुनवाई आजम खान और अब्दुल्ला आजम द्वारा दायर आपराधिक पुनरीक्षण याचिकाओं तथा उनसे जुड़ी कार्यवाहियों के संदर्भ में हुई। इससे एक दिन पहले, 14 अक्टूबर को, अदालत ने इन मामलों को डॉ. तंजीम फातिमा बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (क्रिमिनल रिवीजन संख्या 159/2024) के साथ संबद्ध करने का निर्देश दिया था। सुनवाई के दौरान राज्य और प्रथम सूचनाकर्ता की ओर से उक्त मामले के साथ संबद्धता का आग्रह किया गया था, ताकि दोहरे दंड (डबल जियोपर्डी) के पहलू पर विचार किया जा सके।
आजम खान और अब्दुल्ला आजम की पुनरीक्षण याचिकाएं निचली अदालतों द्वारा कथित दो पैन कार्ड मामले में दर्ज दोषसिद्धि को चुनौती देती हैं। अभियोजन का मामला कथित तौर पर अलग-अलग जन्मतिथियों का उल्लेख करने वाले दूसरे पैन कार्ड को प्राप्त करने और इस्तेमाल करने से संबंधित है। आरोपों में चुनावी नामांकन पत्रों में उस पैन कार्ड के कथित इस्तेमाल का पहलू भी शामिल है।
दोनों याचिकाकर्ताओं ने निचली अदालतों के निष्कर्षों को चुनौती देते हुए पुनरीक्षण याचिकाओं के अंतिम निस्तारण तक अंतरिम राहत की मांग की है। उनकी अर्जियों में दोषसिद्धि पर रोक, सजा निलंबित करने और अंतरिम जमानत दिए जाने की मांग शामिल है।
अब अदालत के फैसले से यह स्पष्ट होगा कि पुनरीक्षण याचिकाओं के लंबित रहने के दौरान आजम खान और अब्दुल्ला आजम को मांगी गई अंतरिम राहत व ज़मानत मिलती है या नहीं।

