मेजा थाने में बांग्लादेशी नागरिक को चार दिन बैठाने का आरोप, थाना प्रभारी नितेंद्र शुक्ला और अतिरिक्त प्रभारी कमलेश यादव निलंबित

CCTV जांच के बाद बड़ी कार्रवाई, नितेंद्र शुक्ला से जुड़ा पुराना महिला प्रकरण भी फिर चर्चा में; मुख्यमंत्री और शासन तक पहुंची थी शिकायत, अब ACP कोतवाली निकिता देख रही हैं मामला
प्रयागराज। मेजा थाने में एक बांग्लादेशी नागरिक को कथित तौर पर चार दिनों तक थाने में बैठाए रखने और इसके बाद उसकी गिरफ्तारी दर्शाए जाने के मामले में पुलिस विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस आयुक्त के आदेश पर मेजा थाना प्रभारी नितेंद्र शुक्ला और अतिरिक्त प्रभारी कमलेश यादव को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है।
मामला सामने आने के बाद पुलिस अधिकारियों ने पूरे घटनाक्रम की जांच कराई। जांच के दौरान मेजा थाने में लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली गई। जांच में सामने आए तथ्यों और रिपोर्ट के आधार पर दोनों पुलिसकर्मियों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई।
मामले की विभागीय जांच अभी जारी है। अब जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि संबंधित व्यक्ति थाने में कब पहुंचा, कितने समय तक थाने में रहा, उसकी मौजूदगी का रिकॉर्ड क्या है और गिरफ्तारी की वास्तविक प्रक्रिया कब शुरू हुई।
लेकिन नितेंद्र शुक्ला से जुड़ा यह पहला विवादित प्रकरण नहीं
मेजा में तैनाती से पहले नितेंद्र शुक्ला कोतवाली में तैनात रहे हैं। उसी दौरान एक महिला से जुड़े प्रकरण को लेकर एक कथित ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें महिला ने पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर आरोप लगाए थे।
महिला का आरोप था कि प्रॉपर्टी के बंटवारे से जुड़े विवाद में उसके और उसकी बेटी के साथ मारपीट की गई। महिला के अनुसार घटना की सूचना कोतवाली पुलिस और डायल 112 को दी गई थी, जिसके बाद पुलिस की मदद से उन्हें वहां से निकाला गया।
इसके बाद महिला ने आरोप लगाया कि उस पर अपने बयान बदलने का दबाव बनाया गया।
महिला के अनुसार जब उसने मामले की शिकायत वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाने की बात कही तो फोन पर कथित तौर पर उसे कहा गया कि “जो करना है कर लो, कोई कार्रवाई नहीं करूंगा।”
यही कथित बातचीत बाद में ऑडियो के रूप में सोशल मीडिया पर सामने आई और मामला चर्चा में आया।
सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रही महिला की शिकायत
इस पुराने प्रकरण का महत्वपूर्ण पहलू यह है कि महिला के अनुसार उसने मामले को केवल सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रखा।
महिला ने मुख्यमंत्री और शासन प्रशासन समेत वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र के माध्यम से लिखित शिकायत भेजने का दावा किया था।
महिला की शिकायत में कथित मारपीट, पुलिस की भूमिका और उस पर बयान बदलने के लिए दबाव बनाए जाने सहित कई आरोप लगाए गए थे।
अब इस मामले में नया अपडेट यह है कि मुख्यमंत्री और शासन प्रशासन तक पत्र के माध्यम से शिकायत पहुंचाए जाने के बाद संबंधित प्रकरण को नवनियुक्त ACP कोतवाली निकिता देख रही हैं।
इसका मतलब यह है कि महिला का पुराना प्रकरण अब केवल वायरल ऑडियो की चर्चा तक सीमित नहीं है। शिकायत के आधार पर संबंधित पुलिस अधिकारी के स्तर पर इसकी स्थिति देखी जा रही है।
एक तरफ मेजा में निलंबन, दूसरी तरफ पुराने प्रकरण पर नजर
अब पूरा घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि नितेंद्र शुक्ला से जुड़ा पुराना महिला प्रकरण उस समय फिर चर्चा में आया है, जब मेजा थाने में बांग्लादेशी नागरिक को कथित तौर पर चार दिन बैठाए रखने के मामले में स्वयं नितेंद्र शुक्ला और अतिरिक्त प्रभारी कमलेश यादव के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई हुई है।
हालांकि दोनों मामलों को आपस में जोड़कर कोई निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। मेजा प्रकरण की अपनी विभागीय जांच चल रही है, जबकि महिला का पुराना प्रकरण अपनी शिकायत और जांच के स्तर पर है।
लेकिन दोनों मामलों में एक बात स्पष्ट है कि अब संबंधित रिकॉर्ड और जांच की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है।
मेजा मामले में CCTV फुटेज, थाने के रिकॉर्ड, गिरफ्तारी की प्रक्रिया और संबंधित पुलिस दस्तावेज जांच का हिस्सा हैं।
वहीं महिला के मामले में उसकी ओर से भेजे गए शिकायत पत्र, उपलब्ध दस्तावेज, कथित ऑडियो और संबंधित अधिकारियों के स्तर पर हुई कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।
अब सवाल जांच पर
मेजा थाने में कथित तौर पर चार दिन तक रखे जाने का आरोप क्या CCTV और पुलिस रिकॉर्ड से पुष्ट होता है?
गिरफ्तारी की वास्तविक तारीख और समय क्या था?
थाने के रिकॉर्ड में संबंधित व्यक्ति की मौजूदगी कब दर्ज हुई?
और दूसरी तरफ, मुख्यमंत्री और शासन प्रशासन तक पहुंचाई गई महिला की शिकायत पर अब ACP कोतवाली निकिता की जांच और कार्रवाई किस दिशा में आगे बढ़ती है?
इन दोनों मामलों में अंतिम स्थिति जांच और आधिकारिक रिकॉर्ड सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगी।
महिला द्वारा लगाए गए पुराने आरोपों और कथित वायरल ऑडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता है। उन्हें महिला की शिकायत और उसके दावे के रूप में ही प्रस्तुत किया जा रहा है। इसी तरह मेजा प्रकरण में भी विभागीय जांच के अंतिम निष्कर्ष का इंतजार किया जाना जरूरी है।
इस पूरे मामले में आधिकारिक जांच, पुलिस विभाग के अगले निर्णय और महिला की शिकायत पर होने वाली कार्रवाई को तथ्य और प्रमाण के साथ सामने रखेगा।

