लखनऊ हाईकोर्ट का सख्त रुख: लखनऊ में पूरे क्षेत्र से हटेंगे अवैध अतिक्रमण.

नोटिस और वैध दावे का मौका दिए बिना नहीं होगी कार्रवाई, पांच सप्ताह में अनुपालन के निर्देश..
जिला एवं सत्र न्यायालय परिसर तथा उसके आसपास अवैध अतिक्रमण के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान और न्यायमूर्ति राजीव भारती की खंडपीठ ने स्पष्ट किया है कि पूर्व में चिन्हित पूरे क्षेत्र से अवैध अतिक्रमण हटाए जाएं और इस कार्रवाई में प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का पूरी तरह पालन किया जाए।
_कोर्ट ने कहा कि जिला एवं सत्र न्यायालय, पुराने हाईकोर्ट परिसर, कलेक्ट्रेट, बोर्ड ऑफ रेवेन्यू, पुराने सदर तहसील परिसर, सब-रजिस्ट्रार कार्यालय, कमिश्नरेट, रेजीडेंसी पावर सब-स्टेशन, बलरामपुर अस्पताल और कैसरबाग बस स्टेशन समेत संबंधित क्षेत्र में सार्वजनिक मार्गों पर हुए अवैध अतिक्रमण से आम जनता को परेशानी हो रही है। इसी व्यापक जनहित को देखते हुए मामले को क्रिमिनल पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन के रूप में लिया गया था।
नगर निगम की ओर से कोर्ट को बताया गया कि पहले 14 अवैध निर्माण और बाद में 57 अवैध अतिक्रमण हटाए जा चुके हैं। इसके बावजूद कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पूर्व आदेश में चिन्हित पूरे क्षेत्र के अवैध अतिक्रमण हटाए जाने हैं। मामले की अगली सुनवाई 26 अक्टूबर 2026 को दोपहर 3:30 बजे होगी

