May 1, 2026

दोतरफा हमले में गंभीर चोटें ,हत्या की कोशिश के आरोप की एफआईआर पक्षों के समझौते पर रद नहीं की जा सकती -हाईकोर्ट

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दोतरफा हमले में गंभीर चोटें ,हत्या की कोशिश के आरोप की एफआईआर पक्षों के समझौते पर रद नहीं की जा सकती -हाईकोर्ट

ऐसा करना पब्लिक जस्टिस सिस्टम का हनन

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि जानलेवा हथियारों के साथ हुए दोतरफा हमले, जिसमें दोनों पक्षों को गंभीर छोटे आईं,अगर ऐसे मामलों में समझौते को आम बात मान लिया जाए, तो पब्लिक जस्टिस सिस्टम खत्म हो जाएगा।
कोर्ट ने कहा किसी को भी कानून अपने हाथ में लेने, गंभीर अपराध करने और फिर समझौते का रास्ता अपनाकर न्याय की राह को भटकाने का अधिकार नहीं है।
कोर्ट ने कहा पब्लिक जस्टिस सिस्टम जनता को न्याय दिलाने के लिए तैयार किया गया है। लोगों को समझना चाहिए कि न्याय देना कोई प्राइवेट कार्य नहीं है। कोर्ट ने दोनों पक्षों में समझौते के आधार पर दर्ज एफआईआर रद करने की मांग में दाखिल याचिका खारिज कर दी है और याची को पुलिस रिपोर्ट पर प्रोटेस्ट करने को कहा है।
यह आदेश न्यायमूर्ति जे जे मुनीर तथा न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने मनोज व अन्य की याचिका पर दिया है।
कोर्ट ने कहा हड्डी तक गहरा कटा घाव है।जान भी जा सकती थी।अब वे सामने आये है कि समझौता हो गया है इसलिए केस कार्यवाही समाप्त की जाय।
कोर्ट ने कहा सवाल है कि जानलेवा गंभीर चोट के मामले को समझौते के आधार पर एफआईआर रद की जा सकती है।
हालांकि कुछ जानलेवा हमले के मामले को सुप्रीम कोर्ट ने समझौते के आधार पर रद करने का समर्थन किया है। किंतु ऐसे समझौते सभी तरह के मामलों में सही नहीं है। आरोप हत्या की कोशिश का है, हमले की प्रकृति व लगी चोटों पर निर्भर करेगा , हमले में प्रयुक्त हथियार पर भी विचार करना होगा।
थाना खरखौदा,मेरठ में दोनों तरफ से हमला किया गया और दोनों पक्षों से लोग गंभीर रूप से घायल हुए।लोहे की राख बलकटी का इस्तेमाल किया गया।ऐसे मामलों को दोनो कक्षों के बीच समझौते के आधार पर रद करना उचित नहीं होगा।यह पब्लिक जस्टिस सिस्टम के खिलाफ होगा।

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