बिना कारण बताए गिरफ्तारी और निरूद्धि अवैध, हाईकोर्ट ने याची की तत्काल रिहाई का दिया आदेश

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी को उसकी गिरफ्तारी के आधारों को लिखित रूप में बताना पुलिस के लिए अनिवार्य है। न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने कानपुर, किदवई नगर के जोगेंद्र की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका को स्वीकार करते हुए यह आदेश दिया।
कोर्ट ने गिरफ्तारी को अवैध करार दिया और तत्काल रिहा करने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि पुलिस द्वारा तैयार किए गए गिरफ्तारी मेमो और मजिस्ट्रेट द्वारा जारी रिमांड आदेश में गिरफ्तारी के ठोस कारणों का उल्लेख नहीं किया गया । इसके अतिरिक्त, रिमांड आदेश एक छपे हुए प्रोफार्मा पर यांत्रिक तरीके से पारित किया गया , जिसे कोर्ट ने पूरी तरह से अवैध और अनुचित माना।
कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा ‘मिहिर राजेश शाह बनाम महाराष्ट्र राज्य’ और ‘गौतम नवलखा बनाम एन.आई.ए.’ में निर्धारित विधि सिद्धांतों का हवाला दिया। कोर्ट ने रेखांकित किया कि यदि गिरफ्तारी की प्रक्रिया में कानूनी अनिवार्यताओं का पालन नहीं किया जाता है, तो ऐसी गिरफ्तारी को शून्य माना जाएगा। कोर्ट ने कानपुर नगर के मजिस्ट्रेट को भविष्य में ऐसे आदेश पारित करते समय अधिक सतर्क रहने की कड़ी हिदायत भी दी है।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य सरकार यदि चाहे तो कानून के दायरे में रहकर याचिकाकर्ता के खिलाफ नए सिरे से विधिक कार्यवाही शुरू कर सकती है।

