अलोपीबाग गुरुद्वारा में खालसा सृजना दिवस के अवसर पर,परमजीत सिंह बग्गा बने गुरुद्वारा के प्रधान सर्वसम्मति से पुनः प्रधान नियुक्त
अलोपीबाग गुरुद्वारा में खालसा सृजना दिवस के अवसर पर,परमजीत सिंह बग्गा बने गुरुद्वारा के प्रधान सर्वसम्मति से पुनः प्रधान नियुक्त

प्रयागराज के अलोपीबाग स्थित गुरुद्वारा में खालसा सृजना दिवस (बैसाखी) पूरे धार्मिक विधि-विधान, श्रद्धा और सादगी के साथ मनाया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया और गुरु घर में मत्था टेककर आशीर्वाद प्राप्त किया।
गुरुद्वारा में आयोजित कार्यक्रम के दौरान रागी जत्थों द्वारा प्रस्तुत शब्द-कीर्तन ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। “वाहो-वाहो गोबिंद सिंह…” और “खालसा अकाल पुरख की फौज…” जैसे कीर्तनों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।
इतिहास से जुड़ा दिन इसी दिन दसवें गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने आनंदपुर साहिब में खालसा पंथ की स्थापना की थी। उन्होंने पंज प्यारों को अमृत पान कराकर एक नई पहचान और स्वरूप प्रदान किया था।
नव-नियुक्त प्रधान परमजीत सिंह बग्गा ने कहा कि खालसा पंथ संत-सिपाही की भावना का प्रतीक है, जो समाज को कुरीतियों से मुक्त कर आत्मसम्मान और धर्म रक्षा की प्रेरणा देता है।समाजसेवी सरदार पतविंदर सिंह ने कहा कि बैसाखी का पर्व हमें आत्मसंयम, एकता और आत्मबोध का संदेश देता है। हमें सत्य और धर्म के मार्ग पर चलना चाहिए।
संगत ने सर्वसम्मति से परमजीत सिंह बग्गा को पुनः गुरुद्वारा का प्रधान नियुक्त किया। “बोले सो निहाल, सत श्री अकाल” के जयघोष के साथ उन्हें सरोपा भेंट कर सम्मानित किया गया।शब्द-कीर्तन, कथा, अरदास और हुकुमनामा के उपरांत गुरु का अटूट लंगर वितरित किया गया। श्रद्धालुओं ने एक-दूसरे को बैसाखी की बधाई दी।

