प्रयागराज शहर पश्चिमी में 2027 की सियासी जंग के लिए डॉ. ऋचा सिंह ने ठोकी दावेदारी, सिद्धार्थ नाथ सिंह के सामने भाजपा के भीतर नई चुनौती

प्रयागराज के शहर पश्चिमी विधानसभा सीट के दावेदारों में रिचा सिंह का भी नाम शामिल है जो समाजवादी पार्टी से साल 2022 में चुनाव लड़ चुकी हैं और बीजेपी के कैंडिडेट को कड़ी टक्कर दी थी, हालांकि अब यह बीजेपी में है लेकिन यह भी प्रयागराज की शहर पश्चिमी विधानसभा सीट से अपना दावा ठोकेंगे। और यहीं से चुनाव लड़ेंगे लेकिन सवाल यह है बीजेपी में रहते हुए इनका टिकट कैसे मिलेगा, बीजेपी से साथ छोड़कर किसीदूसरे के साथ जाकर चुनाव लड़ सकती हैं लेकिन अब उनकी फोटो महज एक दिन पहले की सामने आई है । जिसमें यह यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर रही हैं बाकायदा यूपी के सीएम के सोशल हैंडल पर यह फोटो देखी जा सकती है तो इससे साफ है कि यह बीजेपी से ही चुनाव लड़ सकती है लेकिन साल 2027 की विधानसभा में बड़े दावेदारों में बीजेपी के ही पूर्व कैबिनेट मिनिस्टर सिद्धार्थ नाथ सिंह है जो चुनावी मैदान में है और हर जगह एक्टिव मूड परनजर आते हैं। ऐसे में रिचा सिंह बीजेपी से कैसे चुनाव लड़ेंगे यह एक सवाल है लेकिन यह कहा जा रहा है रिचा सिंह ने पूरा मूड चुनाव लड़ने का बना लिया है।
ऐतिहासिक रूप से 137 वर्षों में स्वतंत्र प्रत्याशी( फ्रेंड्स यूनियन) के रूप प्रथम महिला छात्रसंघ अध्यक्ष निर्वाचितहुई। अध्यक्ष रहते हुए छात्र हितों की रक्षा के लिए आमरण अनशन जैसा अहिंसात्मक और जनतांत्रिक रास्ता चुना! और फिर छात्र हितों की जीत का परचम लहराया
आगे के वर्षों में युवा प्रतिनिधि के रूप में यूनाइटेड किंगडम और स्विट्जरलैंड का ब्रिटश सरकार द्वारा प्रायोजित डेलिगेशन का हिस्सा बनी और विदेश की धरती पर भी इलाहाबाद छात्रसंघ का डंका बजाने में सफल रही सन 2017 में समाजवादी पार्टी के टिकट से शहर पश्चिमी प्रयागराज से चुनाव लड़ा और 60182 मत प्राप्त किया जो उस समय तक समाजवादी पार्टी की किसी प्रत्याशी द्वारा प्राप्त मतों का रिकॉर्ड था संघर्ष जारी रहा स्थानीय समस्याओं से रूबरू होते हुए जनहित के मुद्दों को उठाया और न्याय की स्थापना के लिए जूझने का क्रम जारी रहा 2022 में समाजवादी पार्टी की टिकट पर पुनः शहर पश्चिम से चुनाव लड़ा और 88826 मत प्राप्त करके द्वितीय स्थान पर रहीं।
उल्लेखनीय है कि 2017 के चुनाव में 85000 मत पाकर सिद्धार्थ नाथ सिंह विधायक बन गए थे परंतु यह विडंबना आज भी उनके समर्थकों को टीस् है 88826 मत पाकर भी द्वितीय स्थान पर रहीं।एक तथ्य और उल्लेखनीय है कि समाजवादी पार्टी के किसी प्रत्याशी द्वारा प्राप्त मतों का यह सर्वोच्च रिकॉर्ड है
यहां तक कि जब समाजवादी पार्टी कांग्रेस और बसपा के गठबंधन से भी चुनाव लड़ी तो शहर पश्चिम में इतना वोट नहीं प्राप्त कर सकी।
रामचरितमानस की प्रतिया जलाने के मुद्दे पर जब समाजवादी पार्टी से उनके गहरे मतभेद हुए और भारतीय जनता पार्टी में उनका प् दार्पण हुआ आज की तारीख में वह भारतीय जनता पार्टी उत्तर प्रदेश की प्रवक्ता है और शहर पश्चिम से टिकट की प्रबल दावेदार है.
शहर पश्चिम से डॉक्टर ऋचा सिंह का दावा मजबूत क्यों ?
क्योंकि डॉक्टर ऋचा सिंह का संघर्षनामा इतिहास के मील के पत्थरों जैसा है
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के 137 साल के इतिहास में कोई महिला अध्यक्ष नहीं चुनी गई इस ऐतिहासिक पृष्ठभूमि में रिसर्च एसोसिएट की जॉब छोड़ कर छात्र संघ के अध्यक्ष का चुनाव लड़ने का संकल्प असंभव से हाथ मिलाने जैसा था जहां चाह वहां राह का संकल्प सिद्ध करते हुए धनबल और बमबल को धता बताते हुए छात्र संघ की प्राचीर पर आधी आबादी का ध्वज 2015 में लहरा दिया।

