गाजियाबाद की गुलमोहर ग्रीन्स सोसायटी पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, दो टावर ध्वस्त होंगे; चार टावरों के दो-दो फ्लोर गिराने के आदेश

बिल्डर पर 25 लाख रुपये का हर्जाना, 85 खरीदारों को 10% ब्याज के साथ रकम लौटानी होगी; जीडीए पर भी जुर्माना, बिल्डर के खिलाफ एफआईआर के निर्देश।
गाजियाबाद की गुलमोहर ग्रीन्स सोसायटी में अवैध निर्माण के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने सोसायटी के टावर नंबर 27 और 28 को पूरी तरह ध्वस्त करने का आदेश दिया है। इसके अलावा टावर नंबर 16, 17, 18 और 19 के अवैध रूप से निर्मित नौवें और दसवें फ्लोर को भी दो महीने के भीतर गिराने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ध्वस्तीकरण पर आने वाला पूरा खर्च बिल्डर से भू-राजस्व के बकाये की तरह वसूला जाएगा।
जस्टिस सरल श्रीवास्तव और जस्टिस सुधांशु चौहान की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि जीडीए अधिकारियों की लापरवाही के कारण सोसायटी के निवासियों को परेशानी उठानी पड़ी। इसके लिए जीडीए को प्रत्येक याचिकाकर्ता को 50 हजार रुपये बतौर कॉस्ट देने का आदेश दिया गया है।
बिल्डर पर 25 लाख का हर्जाना, खरीदारों को मिलेगा ब्याज।
हाईकोर्ट ने प्रमोटर पर 25 लाख रुपये का हर्जाना लगाया है। यह रकम एक महीने के भीतर गुलमोहर ग्रीन्स रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन (GGRWA) के खाते में जमा करानी होगी। इसके साथ ही 85 खरीदारों को उनकी जमा रकम 10 प्रतिशत ब्याज सहित लौटाने का आदेश दिया गया है। कॉमन एरिया को कथित तौर पर अवैध रूप से बेचने के मामले में भी कोर्ट ने सख्ती दिखाई।
दो सप्ताह में एफआईआर, एडिशनल सीपी स्तर पर जांच
कोर्ट ने धोखाधड़ी और यूपी अपार्टमेंट एक्ट के उल्लंघन के मामले में प्रमोटर के खिलाफ दो सप्ताह के भीतर एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया है। पूरे मामले की जांच एडिशनल पुलिस कमिश्नर स्तर के अधिकारी से कराने को कहा गया है। साथ ही, ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के दौरान जीडीए को पुलिस और प्रशासन की ओर से सुरक्षा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
तीसरे शमन को अवैध माना, फायर एनओसी पर भी नाराजगी
अदालत ने मामले में तीसरे शमन यानी कंपाउंडिंग को पूरी तरह अवैध माना। कोर्ट ने फायर एनओसी और कंप्लीशन सर्टिफिकेट उपलब्ध नहीं होने के मुद्दे पर भी सख्त नाराजगी को जताई।
वहीं, वर्ष 2018 की एफआईआर में बिना उचित जांच के बिल्डर को क्लीन चिट देने के मामले में विवेचक सुरेंद्र सिंह को तत्काल निलंबित करने और उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।
हाईकोर्ट के इस फैसले को गुलमोहर ग्रीन्स सोसायटी के निवासियों और घर खरीदारों के लिए अहम माना जा रहा है। फैसले के अनुपालन में अब जीडीए, पुलिस और प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।

