October 7, 2026

प्रयागराज में मध्य वायु कमान के 60 वर्ष; बमरौली की उड़ान प्रशिक्षण परंपरा और महाकुंभ में योगदान शहर के वायु सेना से अटूट संबंध का प्रतीक

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वायु सेना दिवस: भारतीय वायु शक्ति से प्रयागराज का गौरवशाली जुड़ाव
प्रयागराज में मध्य वायु कमान के 60 वर्ष; बमरौली की उड़ान प्रशिक्षण परंपरा और महाकुंभ में योगदान शहर के वायु सेना से अटूट संबंध का प्रतीक

प्रयागराज। भारतीय वायु सेना की 8 अक्टूबर को मनाई जा रही स्थापना की 94वीं वर्षगांठ प्रयागराज के लिए भी विशेष गौरव का अवसर है। मध्य वायु कमान के मुख्यालय, वायु सेना स्टेशन बमरौली और बेसिक फ्लाइंग ट्रेनिंग स्कूल (बीएफटीएस) की उपस्थिति ने इस शहर को सैन्य तत्परता, सैन्य उड़ान प्रशिक्षण और नागरिक सेवा से गहराई से जोड़ा है। फरवरी 1966 में अपना मुख्यालय प्रयागराज स्थानांतरित करने वाली मध्य वायु कमान वर्ष 2026 में यहां अपनी उपस्थिति के 60 वर्ष पूरे कर रही है।
8 अक्टूबर 1932 को स्थापित भारतीय वायु सेना आज एक आधुनिक सैन्य बल के रूप में देश के आकाश की सुरक्षा, संयुक्त सैन्य अभियानों में सहयोग तथा आपात परिस्थितियों में मानवीय सहायता जैसे महत्वपूर्ण दायित्व निभा रही है। वायु सेना दिवस उसके कार्मिकों के साहस, बलिदान, व्यावसायिक दक्षता और राष्ट्र के प्रति समर्पण को सम्मान देने का अवसर है।
भारतीय वायु सेना से प्रयागराज का संबंध 8 अक्टूबर 2023 को विशेष रूप से उजागर हुआ, जब वायु सेना स्टेशन बमरौली में 91वें वायु सेना दिवस की समारोहिक परेड आयोजित हुई और उसके बाद त्रिवेणी संगम के ऊपर भव्य हवाई प्रदर्शन हुआ। इस आयोजन ने नागरिकों को भारतीय वायु योद्धाओं की दक्षता और टीम भावना से परिचित कराया तथा शहर की विमानन विरासत में एक यादगार अध्याय जोड़ा।
महाकुंभ 2025 के दौरान यह जुड़ाव नागरिक सेवा के रूप में भी सामने आया। वायु सेना स्टेशन बमरौली ने हवाई मार्ग से आने वाले श्रद्धालुओं के सुरक्षित और सुव्यवस्थित आवागमन में सहयोग दिया। आयोजन के दौरान स्टेशन के वायु यातायात नियंत्रण ने 3,648 निर्धारित और 1,904 गैर-निर्धारित उड़ानों का संचालन संभाला। इस योगदान ने इतने बड़े राष्ट्रीय आयोजन के दौरान विमानन गतिविधियों को सुचारु बनाए रखने के लिए आवश्यक व्यावसायिक दक्षता और समन्वय को रेखांकित किया। स्टेशन ने महाकुंभ आने वाले वायु सेना कार्मिकों, पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों को प्रशासनिक सहायता भी प्रदान की।
सैन्य विमानन में बमरौली की भूमिका बेसिक फ्लाइंग ट्रेनिंग स्कूल के माध्यम से भी महत्वपूर्ण रही है। 9 अक्टूबर 1987 को स्थापित इस स्कूल ने स्वदेशी एचपीटी-32 विमान पर प्रारंभिक उड़ान प्रशिक्षण देना शुरू किया। बाद में स्कूल ने हेलीकॉप्टर प्रशिक्षण की भूमिका अपनाई और चेतक हेलीकॉप्टर पर पहला प्रशिक्षण पाठ्यक्रम 1 फरवरी 2006 को प्रारंभ हुआ। वर्ष 2006 से अब तक बीएफटीएस ने 40 आर्मी पायलट पाठ्यक्रमों के अंतर्गत भारतीय सेना और भारतीय तटरक्षक बल के 1,150 से अधिक पायलटों को प्रथम चरण का हेलीकॉप्टर उड़ान प्रशिक्षण प्रदान किया है। सैन्य विमान चालकों को प्रशिक्षण देकर इस संस्थान ने पायलटों की कई पीढ़ियों के निर्माण में प्रयागराज को एक महत्वपूर्ण केंद्र बनाया है।
प्रयागराज स्थित अपने मुख्यालय से मध्य वायु कमान ने भारतीय वायु सेना के कई महत्वपूर्ण अभियानों में योगदान दिया है। इसकी गौरवशाली विरासत में 1965 और 1971 के युद्ध, वर्ष 1988 में ऑपरेशन कैक्टस के दौरान भारतीय सेना के सैनिकों को तेजी से मालदीव पहुंचाना तथा कारगिल संघर्ष में ऑपरेशन सफेद सागर के दौरान ग्वालियर के मिराज-2000 विमानों की महत्वपूर्ण भूमिका शामिल है। परिवहन विमानों, हेलीकॉप्टरों, वायु रक्षा इकाइयों और सहायता दलों ने समन्वित योजना एवं क्रियान्वयन से इन अभियानों को मजबूती दी।
कमान का योगदान मानवीय सहायता में भी उल्लेखनीय रहा है। भुज भूकंप, हिंद महासागर सुनामी, उत्तराखंड में ऑपरेशन राहत, जम्मू-कश्मीर में ऑपरेशन मेघ राहत, नेपाल भूकंप तथा कई राज्यों में बाढ़ की आपदाओं के दौरान इसके कार्मिकों और विमानों ने राहत एवं बचाव कार्यों में योगदान दिया। सैन्य तत्परता और मानवीय सेवा का यह समन्वय मध्य वायु कमान की विरासत का अभिन्न अंग है।
जनसंपर्क की इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए प्रयागराज मुख्यालय वाली मध्य वायु कमान इस वर्ष वाराणसी में 22, 24 एवं 25 अक्टूबर 2026 को ‘भारतीय वायु सेना दिवस हवाई प्रदर्शन 2026’ का आयोजन कर रही है। नमो घाट पर विशिष्ट अतिथियों के लिए दर्शक दीर्घा होगी, जबकि आम नागरिक निर्धारित सार्वजनिक दर्शक क्षेत्रों से प्रदर्शन देख सकेंगे। माननीय प्रधानमंत्री के भी कार्यक्रम में शामिल होने की संभावना है; उनकी उपस्थिति की अंतिम पुष्टि अपेक्षित है।
हवाई प्रदर्शन के विस्तृत समय, सार्वजनिक दर्शक क्षेत्रों, यातायात एवं पार्किंग व्यवस्था तथा दर्शकों की सुरक्षा संबंधी निर्देश आधिकारिक माध्यमों से अलग से जारी किए जाएंगे। नागरिकों से अनुरोध है कि वे अधिकृत सूचनाओं का पालन करें और नागरिक प्रशासन तथा कार्यक्रम आयोजकों के साथ सहयोग करें।

 

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