August 25, 2026

सेंट एंड्रयूज डिग्री कॉलेज में फर्जी नियुक्ति का प्रयास करने का आरोप, हाईकोर्ट में प्रबंध समिति का विवाद विचाराधीन

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*चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया के बिशप समेत पांच पर FIR*

*सेंट एंड्रयूज डिग्री कॉलेज में फर्जी नियुक्ति का प्रयास करने का आरोप, हाईकोर्ट में प्रबंध समिति का विवाद विचाराधीन/*

प्रयागराज। सेंट एंड्रयूज डिग्री कॉलेज, गोरखपुर में कार्यवाहक प्राचार्य की नियुक्ति को लेकर कथित फर्जीवाड़े के मामले में कैंट थाने में चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया (CNI) के पदाधिकारियों समेत पांच लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। FIR कॉलेज के कार्यवाहक प्राचार्य प्रो. एस. डोमिनिक राजकुमार की शिकायत और न्यायालय के आदेश के बाद दर्ज हुई है। आरोपियों में CNI की लखनऊ डायसिस के बिशप मॉरिस एडगर दान का नाम भी शामिल है।

*हाईकोर्ट में लंबित है प्रबंध समिति का विवाद*

शिकायतकर्ता के मुताबिक सेंट एंड्रयूज कॉलेज एसोसिएशन नामक सोसायटी के माध्यम से कॉलेज का संचालन होता है। सोसायटी की पंजीकृत नियमावली में प्रबंध समिति को कॉलेज के प्राचार्य की नियुक्ति, निलंबन और बर्खास्तगी का अधिकार दिया गया है। वर्तमान में सोसायटी की प्रबंध समिति को लेकर विवाद हाईकोर्ट में विचाराधीन है।

शिकायत में बताया गया है कि सहायक रजिस्ट्रार,फर्म्स, सोसायटीज एवं चिट्स, गोरखपुर मंडल ने 7 मार्च 2026 को पत्र जारी कर निर्देश दिया था कि हाईकोर्ट के निर्णय के बिना प्रबंध समिति की बैठक कर उसमें कोई परिवर्तन नहीं किया जा सकता।

*फर्जी नियुक्ति पत्र तैयार करने का आरोप*

आरोप है कि इसके बावजूद CNI के मॉडरेटर मोस्ट रेवरेंट परितोष कैनिंग की कथित शह पर बिशप मॉरिस एडगर दान, रेव. रोशन लाल, रैना सैमुअल समेत अन्य लोगों ने मिलकर कथित तौर पर फर्जी और कूटरचित दस्तावेज तैयार किए।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि इनमें एक नियुक्ति पत्र भी शामिल था, जिसमें रैना निवेदिता सैमुअल को सेंट एंड्रयूज डिग्री कॉलेज का कार्यवाहक प्राचार्य नियुक्त किए जाने की बात कही गई थी। इसके साथ ही एक कथित अवैध सर्कुलर भी तैयार कराया गया।

*प्रबंध समिति के सदस्यों से हस्ताक्षर कराने का आरोप*

शिकायत के अनुसार आरोपियों ने प्रबंध समिति के कुछ सदस्यों पर दबाव बनाकर कथित सर्कुलर पर हस्ताक्षर भी कराए। इसमें प्रयागराज के एक कॉलेज के प्राचार्य प्रो. अरुण सालिक मोजेस और डायसिस ऑफ लखनऊ के सचिव रेवरेंट प्रवीण मेसी के नाम भी सामने आए हैं।

बाद में दोनों को कथित दस्तावेजों की वास्तविकता की जानकारी हुई तो उन्होंने संबंधित पदाधिकारियों को पत्र लिखकर अपने हस्ताक्षर वापस लेने और कथित फर्जी नियुक्ति पत्र को निरस्त करने की मांग की।

*साइबर कैफे में दस्तावेज तैयार कराने का भी आरोप*

शिकायतकर्ता ने एक व्यक्ति से हुई बातचीत का हवाला देते हुए आरोप लगाया है कि प्रयागराज के अशोक नगर स्थित एक साइबर कैफे में कंप्यूटर और इंटरनेट की मदद से कई दस्तावेज तैयार कराए गए थे। आरोप है कि इन दस्तावेजों का इस्तेमाल शिकायतकर्ता को फंसाने और उसके खिलाफ कार्रवाई कराने के लिए किया जाना था।

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि संबंधित लोग पूर्व में भी कथित तौर पर इस तरह के दस्तावेज तैयार कर लोगों को मुकदमों में फंसाने का प्रयास कर चुके हैं। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी।

*पुलिस करेगी डिजिटल साक्ष्यों की जांच*

शिकायतकर्ता ने मामले में अज्ञात लोगों की भूमिका की भी आशंका जताई है। ऐसे में पुलिस द्वारा कथित साइबर कैफे, कंप्यूटर, इंटरनेट गतिविधियों और तैयार किए गए दस्तावेजों की जांच के साथ डिजिटल साक्ष्य जुटाए जाने की बात कही गई है।

शिकायतकर्ता के मुताबिक उसने पहले कैंट थाने में लिखित शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की थी। कार्रवाई न होने पर वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से भी शिकायत की गई। इसके बाद न्यायालय में प्रार्थना पत्र दिया गया, जिसके आदेश के बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया।

*जांच के बाद साफ होगी आरोपों की हकीकत*

कैंट थाना प्रभारी अमरनाथ राय ने बताया कि शिकायतकर्ता की ओर से फर्जीवाड़ा, जाली दस्तावेज तैयार करने और उन्हें असली के रूप में इस्तेमाल करने समेत अन्य आरोप लगाए गए हैं। मामले की जांच की जा रही है। पुलिस जांच में ही कथित फर्जी दस्तावेजों की वास्तविकता और आरोपों में नामजद लोगों की भूमिका स्पष्ट होगी।a

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