इलाहाबाद हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी: “प्रयागराज की चिकित्सा सुविधाओं को अपग्रेड करने में रुचि नहीं ले रही सरकार”
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज और स्वरूप रानी नेहरू अस्पताल के बुनियादी ढांचे के विकास में हो रही देरी पर प्रदेश सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने कड़े शब्दों में कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि राज्य सरकार इस मामले को जानबूझकर खींच रही है और प्रयागराज में चिकित्सा सुविधाओं के उन्नयन में उसकी कोई खास रुचि नहीं है।
यह टिप्पणी न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल ने डॉ अरविंद गुप्ता की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि पिछले आठ महीनों से मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल के लिए जमीन हस्तांतरण का मामला केवल एनओसी के चक्कर में लटका हुआ है।
कोर्ट ने टिप्पणी की कि हर सुनवाई पर सरकार एक नया पक्ष सामने रख देती है। पिछली बार कहा गया था कि केवल राजस्व विभाग की अनुमति बाकी है, अब सरकार ने नया दावा किया है कि जमीन नगर विकास विभाग की है। कोर्ट ने कहा कि चिकित्सा विभाग के प्रभारियों को ही पता होगा कि वे इस मामले को इतना क्यों लटका रहे हैं।
मामले में नियुक्त एमिकस क्यूरी ईशान देव गिरि ने अपनी निरीक्षण रिपोर्ट में हॉस्टलों की बदहाली की तस्वीरें पेश कीं। रिपोर्ट में कहा गया कि मेडिकल छात्र और डॉक्टर बेहद खराब और अमानवीय परिस्थितियों में रहने को मजबूर हैं। कॉलेज प्रशासन और प्रधानाचार्य द्वारा रखरखाव की पूरी तरह अनदेखी की गई है। वर्ष 2025 में स्वीकृत हुए पीजी हॉस्टल का निर्माण फंड जारी होने के बावजूद अब तक शुरू नहीं हुआ है।
कोर्ट ने कहा कि यदि डॉक्टरों को रहने के लिए उचित स्थान नहीं मिलेगा, तो अस्पताल सुचारू रूप से नहीं चल सकता।
कोर्ट ने मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य को 29 अप्रैल को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित रहने का निर्देश दिया है। प्रधानाचार्य को हॉस्टलों की बदहाली और कार्डियोलॉजी विभाग की वर्तमान स्थिति पर एक सप्ताह में जवाब दाखिल करना होगा। साथ ही विशेष सचिव चिकित्सा शिक्षा को शपथ पत्र देकर यह बताना होगा कि नगर विकास विभाग से जमीन की एनओसी कब तक मिल जाएगी। सुनवाई के दौरान यूपी राज्य निर्माण निगम के मुख्य अभियंता ने आश्वासन दिया कि टाइल्स और बुनियादी काम 30 अप्रैल तक पूरा कर लिया जाएगा। कोर्ट ने मामले मामले की अगली सुनवाई के लिए 29 अप्रैल की तारीख लगाई है।

