29 साल की सेवा के बाद की गई बर्खास्तगी रद्द । बिना ठोस आधार और जांच के हटाना गलत- हाईकोर्ट

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गौतम बुद्ध नगर के एक हेडमास्टर मुकेश कुमार शर्मा की सेवा समाप्ति के आदेश को रद्द कर दिया है।
न्यायालय ने स्पष्ट स्पष्ट किया कि लगभग तीन दशकों की सेवा के बाद किसी शिक्षक को केवल इस आधार पर नहीं हटाया जा सकता कि उसने एक ही सत्र में दो डिग्रियां हासिल की थीं, खासकर तब जब ऐसा करने पर कोई कानूनी रोक न हो। यह आदेश न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान ने मुकेश कुमार शर्मा द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया।
मामले के अनुसार, याची की नियुक्ति 1997 में अप्रशिक्षित सहायक अध्यापक के रूप में हुई थी और बाद में प्रशिक्षण पूरा करने पर उन्हें नियमित वेतनमान दिया गया। वर्ष 2025 में एक शिकायत के आधार पर बेसिक शिक्षा अधिकारी ने उनकी सेवाएं इस आधार पर समाप्त कर दी थीं कि उन्होंने सत्र 1993-94 में इंटरमीडिएट और शारीरिक शिक्षा प्रमाणपत्र दोनों नियमित रूप से प्राप्त किए थे। कहा गया कि इस कार्रवाई से पहले न तो कोई नियमित विभागीय जांच की गई और न ही उचित सुनवाई का अवसर दिया गया, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों और उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक अनुशासन एवं अपील नियमावली का खुला उल्लंघन है।
यदि कोई वैधानिक रोक नहीं है, तो दो परीक्षाओं में एक साथ बैठने को अयोग्यता का आधार नहीं बनाया जा सकता। कोर्ट ने इस बात पर भी जोर दिया कि याची के शैक्षिक प्रमाणपत्र आज भी वैध हैं और उन्हें किसी सक्षम प्राधिकारी ने रद्द नहीं किया है। अदालत ने बीएसए द्वारा जारी 11 दिसंबर 2025 के बर्खास्तगी आदेश को मनमाना और दोषपूर्ण करार देते हुए इसे रद्द कर दिया।

