March 7, 2026

चंबा: शिवालिक एनर्जी में मजदूरों का शोषण, कांग्रेस जिलाध्यक्ष व यूथ इंटक ने दी उग्र अंदोलन करने की चेतावनी

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चंबा: शिवालिक एनर्जी में मजदूरों का शोषण, कांग्रेस जिलाध्यक्ष व यूथ इंटक ने दी उग्र अंदोलन करने की चेतावनी

रिपोर्ट अशोक कुमार, ब्यूरो चम्बा

चंबा, हिमाचल प्रदेश जिला चंबा के भरमौर स्थित शिवालिक एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड (चिंरचिड़-2) परियोजना में मजदूरों के कथित शोषण को लेकर माहौल गरमा गया है। यूथ इंटक (Youth INTUC) ने कांग्रेस जिलाध्यक्ष सुरजीत भरमौरी और यूथ इंटक के जिलाध्यक्ष विरेन्द्र पुजारी की अगुवाई में प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए जिलाधीश (DC) और जिला श्रम अधिकारी को ज्ञापन सौंपा है। संगठन ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि मजदूरों की मांगें नहीं मानी गईं, तो आने वाले समय में उग्र आंदोलन होगा।

प्रमुख आरोप: सुरक्षा ताक पर, नियमों की धज्जियां
यूथ इंटक ने कंपनी प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए 11 सूत्रीय मांग पत्र सौंपा है। संगठन का कहना है कि परियोजना में नियमों को पूरी तरह दरकिनार किया जा रहा है:

न नियुक्ति पत्र, न पहचान: लंबे समय से काम कर रहे मजदूरों को न तो जॉइनिंग लेटर दिए गए हैं और न ही पहचान पत्र, जिससे उनका भविष्य अधर में है।

अवैध छंटनी: बिना किसी पूर्व नोटिस के स्थानीय कामगारों को नौकरी से निकाला जा रहा है। संगठन ने निकाले गए मजदूरों को 7 दिन के भीतर बहाल करने की मांग की है।

सुरक्षा में बड़ी चूक: कार्यस्थल पर एंबुलेंस, डॉक्टर और फर्स्ट एड जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। आरोप है कि इस लापरवाही के कारण पूर्व में कुछ मजदूर अपनी जान भी गंवा चुके हैं।

वेतन और भत्तों में कटौती: सुप्रीम कोर्ट के ‘समान काम-समान वेतन’ नियम का उल्लंघन हो रहा है। इसके अलावा रविवार की छुट्टी का भुगतान न करना और एचआरए (HRA) व मेडिकल भत्ते न देना मजदूरों के साथ अन्याय है।

स्थानीय रोजगार पर जोर
यूथ इंटक ने कड़ा रुख अपनाते हुए मांग की है कि नियमानुसार 80% रोजगार स्थानीय और परियोजना प्रभावित लोगों को दिया जाए। साथ ही, सभी कामगारों को ‘श्रम कल्याण बोर्ड’ के साथ जोड़ने की बात कही गई है ताकि उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सके।

“हमने बार-बार शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखी, लेकिन प्रशासन और कंपनी प्रबंधन की चुप्पी ने हमें सड़क पर उतरने को मजबूर किया है। अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

7 दिन का अल्टीमेटम: ठप हो सकता है काम
संगठन ने प्रशासन को 7 दिन का समय दिया है। यदि तय समय सीमा के भीतर इन 11 मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं होती है, तो कंपनी के सभी मजदूर काम रोककर उग्र प्रदर्शन करेंगे। इसकी जिम्मेदारी पूरी तरह से प्रशासन और कंपनी प्रबंधन की होगी।

मामले की गंभीरता को देखते हुए ज्ञापन की प्रतियां जिला उपायुक्त (DC) चंबा, पुलिस अधीक्षक (SP) चंबा और कंपनी प्रबंधन को भेज दी गई हैं।

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