October 19, 2026

अनपरा तापीय परियोजना के कॉलोनी आवासों पर बाहरी लोगों के कथित कब्जे का मामला गरमाया

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सोनभद्र
अनपरा तापीय परियोजना के कॉलोनी आवासों पर बाहरी लोगों के कथित कब्जे का मामला गरमाया।

रिपोर्ट मनोज सिंह राणा

शिकायतों के बाद परियोजना प्रबंधन सक्रिय, रिक्त आवासों के भौतिक सत्यापन के लिए सात सदस्यीय समिति गठित।

वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी के साथ 15 कार्यदिवस में रिपोर्ट सौंपने
अनपरा, सोनभद्र।
अनपरा तापीय परियोजना के आवासीय परिसरों में निगमित कर्मचारियों के लिए निर्धारित आवासों पर कथित रूप से बाहरी लोगों के अनधिकृत कब्जे का मामला अब तूल पकड़ने लगा है। इस संबंध में लगातार मिल रही शिकायतों के बाद परियोजना प्रबंधन ने आवासों की वास्तविक स्थिति का पता लगाने के लिए सात सदस्यीय जांच समिति गठित की है। समिति को सभी श्रेणियों के रिक्त आवासों का भौतिक सत्यापन कर निर्धारित समयसीमा के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस कार्रवाई के बाद आवासीय परिसरों में आवास आवंटन और उनके उपयोग की व्यवस्था को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

शिकायतों में अनधिकृत निवास और आवंटन व्यवस्था पर उठे सवाल।

जानकारी के अनुसार, विनोद कुमार गुप्ता ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड के अध्यक्ष तथा परियोजना के वरिष्ठ अधिकारियों को शिकायतें भेजकर मामले में हस्तक्षेप करने और आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।शिकायतकर्ता का आरोप है कि परियोजना के आवासीय परिसर में कुछ बाहरी लोग बिना वैध आवंटन के वर्षों से रह रहे हैं। उनका कहना है कि यदि आवासों पर अनधिकृत कब्जे हैं, तो इससे पात्र कर्मचारियों को आवास उपलब्ध कराने की व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। शिकायत में आवासीय परिसर की सुरक्षा व्यवस्था और आवासों के उपयोग की स्थिति पर भी सवाल उठाए गए हैं।
शिकायतकर्ता ने आवासों का स्थलीय सत्यापन कराने, अनधिकृत रूप से रह रहे लोगों की पहचान करने तथा नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित लोगों और जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है। हालांकि, शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।

मुख्य अभियंता के आदेश पर गठित हुई सात सदस्यीय समिति।

मामले में अनपरा तापीय परियोजना के मुख्य अभियंता (जानपद) ने 13 अक्टूबर 2026 को कार्यालय ज्ञापन जारी कर आवासीय परिसर के सभी श्रेणियों के रिक्त आवासों का भौतिक सत्यापन कराने के लिए सात सदस्यीय समिति गठित की है।समिति की अध्यक्षता अधीक्षण अभियंता इंजीनियर महेन्द्र सिंह करेंगे, जबकि अधिशासी अभियंता इंजीनियर राजेश कुमार सचान को संयोजक बनाया गया है। समिति में इंजीनियर बजेंद्र सिंह, इंजीनियर मिथिलेश कुमार, इंजीनियर अशोक कुमार, इंजीनियर सुजीत कुमार और इंजीनियर सुनील कुमार को सदस्य नामित किया गया है।
जारी कार्यालय ज्ञापनं के अनुसार, समिति भूतपूर्व सैनिकों के साथ समन्वय स्थापित कर आवासों का स्थलीय निरीक्षण करेगी। सत्यापन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए निरीक्षण के दौरान टाइम स्टैम्प के साथ वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी गूगल फोटो भी कराई जाएगी। समिति को निरीक्षण पूरा कर 15 कार्यदिवस के भीतर अपनी रिपोर्ट मुख्य अभियंता कार्यालय में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है।इस आदेश की प्रतिलिपि मुख्य महाप्रबंधक सहित संबंधित अधिकारियों और कार्मिकों को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी गई है।

सिर्फ रिक्त आवासों का सत्यापन या अनधिकृत कब्जों की भी होगी पड़ताल?

समिति के गठन के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जांच का दायरा केवल रिक्त आवासों के सत्यापन तक सीमित रहेगा या आवासों पर कथित अनधिकृत कब्जों की स्थिति भी स्पष्ट की जाएगी।
आवासीय परिसरों की वास्तविक स्थिति सामने लाने के लिए यह जरूरी होगा कि आवासों के आवंटन अभिलेखों, वर्तमान उपयोग और मौके पर पाई गई स्थिति का मिलान किया जाए। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि कौन-से आवास रिक्त हैं, किन आवासों पर वैध आवंटन है और कहीं किसी आवास का उपयोग निर्धारित नियमों के विपरीत तो नहीं किया जा रहा है।
जांच रिपोर्ट पर टिकी निगाहें, कार्रवाई से तय होगी पारदर्शिता
अनपरा तापीय परियोजना के आवासीय परिसरों से जुड़ा यह मामला अब प्रशासनिक जांच के दौर में पहुंच गया है। सात सदस्यीय समिति का गठन शिकायतों के बाद उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन इसकी वास्तविक उपयोगिता जांच की निष्पक्षता, रिपोर्ट में सामने आने वाले तथ्यों और उसके आधार पर होने वाली कार्रवाई से तय होगी।
अब निगाहें समिति के स्थलीय निरीक्षण, निर्धारित समयसीमा में प्रस्तुत की जाने वाली रिपोर्ट और परियोजना प्रबंधन के अगले कदम पर टिकी हैं। यदि जांच में अनियमितता या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो संबंधित नियमों के तहत कार्रवाई का रास्ता साफ हो सकता है। वहीं, निष्पक्ष जांच से आवास आवंटन व्यवस्था को लेकर उठ रहे सवालों का भी जवाब मिल सकेगा।

आखिर किसके इशारे पर अनपरा तापीय परियोजना के आवासों में रह रहे किरायेदार..?

परियोजना के आवास में आत्महत्या की घटना के बाद संबंधित विभाग की कार्यप्रणाली और आवास आवंटन एवं उपयोग की व्यवस्था को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।स्थानीय स्तर पर सवाल उठाया जा रहा है कि आखिर किसकी अनुमति अथवा संरक्षण में परियोजना के आवासों में किरायेदार रह रहे हैं? यदि परियोजना के आवासों में रहने के लिए निर्धारित नियम और शर्तें हैं, तो उनका पालन किस हद तक किया जा रहा है? क्या संबंधित विभाग को इसकी जानकारी है, या फिर जिम्मेदार अधिकारी इस पूरे मामले से अनजान बने हुए हैं?
ठेकेदार पीयूष सिंह के अनपरा कॉलोनी स्थित आवास में रहने की चर्चा के बीच आत्महत्या की घटना ने मामले को और गंभीर बना दिया है। घटना के बाद संबंधित विभाग की जिम्मेदारी, आवासों के उपयोग की अनुमति तथा बाहरी व्यक्तियों के निवास की स्थिति को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।हालांकि, ठेकेदार के आवास में रहने की अनुमति, आवास के आवंटन की स्थिति और घटना से जुड़े तथ्यों की आधिकारिक पुष्टि होना अभी आवश्यक है। ऐसे में संबंधित विभाग का पक्ष सामने आना भी महत्वपूर्ण है।
अब बड़ा सवाल यह है कि परियोजना की आवासीय कॉलोनी में कौन रह रहा है, किसके आदेश पर रह रहा है और इसकी निगरानी की जिम्मेदारी किस अधिकारी की है? क्या विभाग इन सवालों का जवाब देगा और आवासों के उपयोग से जुड़े नियमों की जांच कराएगा?
फिलहाल, इस मामले में संबंधित विभाग की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।

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