October 14, 2026

अभाविप इलाहाबाद विश्वविद्यालय इकाई द्वारा ‘स्वयंसिद्धा युवती सम्मेलन’ का आयोजन, नारी शक्ति एवं राष्ट्र निर्माण में युवतियों की भूमिका पर हुआ मंथन

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अभाविप इलाहाबाद विश्वविद्यालय इकाई द्वारा ‘स्वयंसिद्धा युवती सम्मेलन’ का आयोजन, नारी शक्ति एवं राष्ट्र निर्माण में युवतियों की भूमिका पर हुआ मंथन

प्रयागराज। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) काशी प्रांत की इलाहाबाद विश्वविद्यालय इकाई द्वारा आज राजर्षि टंडन सेवा केंद्र सभागार, बैंक रोड, प्रयागराज में ‘स्वयंसिद्धा युवती सम्मेलन’ का आयोजन किया गया। सम्मेलन का उद्देश्य युवतियों में आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता, आत्मनिर्भरता एवं सामाजिक जागरूकता को प्रोत्साहित करने के साथ ही राष्ट्र निर्माण में उनकी सक्रिय भूमिका को रेखांकित करना रहा।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रो. उषा टंडन, कुलपति, डॉ. राजेंद्र प्रसाद राष्ट्रीय आयुर्वेद विश्वविद्यालय; मुख्य वक्ता के रूप में प्रो. उमा श्रीवास्तव, कुलपति, काशी नरेश विश्वविद्यालय; विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. कीर्तिका अग्रवाल, स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ; प्रो. आभा त्रिपाठी, प्रांत उपाध्यक्ष, भाजपा काशी प्रांत; तथा डॉ. रेनू बुनाल, एमबीबीएस, एमडी एवं चर्म रोग विशेषज्ञ की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम में इलाहाबाद विश्वविद्यालय इकाई मंत्री काव्यांशी कुमारी भी उपस्थित रहीं।

कार्यक्रम के दौरान विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने सम्मेलन को विशेष आकर्षण प्रदान किया। गणेश वंदना की मनमोहक प्रस्तुति के साथ गीत प्रस्तुति एवं कई सामूहिक नृत्यों के माध्यम से भारतीय संस्कृति, परंपरा और नारी शक्ति के विविध स्वरूपों को प्रदर्शित किया गया। वहीं, आत्मरक्षा (सेल्फ डिफेंस) पर आधारित प्रस्तुति के माध्यम से युवतियों को अपनी सुरक्षा के प्रति जागरूक रहने, आत्मविश्वास विकसित करने तथा विपरीत परिस्थितियों में स्वयं की रक्षा के लिए सक्षम बनने का संदेश दिया गया। इन प्रस्तुतियों ने सांस्कृतिक चेतना, आत्मनिर्भरता और युवतियों के सशक्तीकरण के महत्व को प्रभावी रूप से रेखांकित किया।

सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि प्रो. उषा टंडन ने युवतियों के व्यक्तित्व विकास, शिक्षा एवं आत्मविश्वास के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने युवतियों को अपनी क्षमताओं को पहचानने, ज्ञान एवं कौशल के माध्यम से स्वयं को सशक्त बनाने तथा समाज में सकारात्मक परिवर्तन की वाहक बनने के लिए प्रेरित किया।

मुख्य वक्ता प्रो. उमा श्रीवास्तव ने युवतियों की नेतृत्व क्षमता, आत्मनिर्भरता एवं राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने युवतियों से शिक्षा, संस्कार और दृढ़ संकल्प के साथ जीवन की चुनौतियों का सामना करने तथा प्रत्येक क्षेत्र में अपनी प्रतिभा एवं सामर्थ्य का परिचय देने का आह्वान किया।

विशिष्ट अतिथि डॉ. कीर्तिका अग्रवाल ने महिलाओं के स्वास्थ्य एवं जागरूकता के महत्व को रेखांकित करते हुए युवतियों के सर्वांगीण विकास में शारीरिक स्वास्थ्य और स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता की भूमिका पर प्रकाश डाला।

प्रो. आभा त्रिपाठी ने नारी शक्ति, सामाजिक सहभागिता एवं राष्ट्रहित में युवतियों की भूमिका पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने युवतियों को आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने तथा सामाजिक दायित्वों के प्रति सजग रहने के लिए प्रेरित किया।

वहीं, डॉ. रेनू बुनाल ने स्वास्थ्य जागरूकता एवं व्यक्तिगत स्वास्थ्य के प्रति सजगता के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने युवतियों को अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने तथा जीवन में अनुशासन एवं सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने का संदेश दिया।

सम्मेलन में उपस्थित अतिथियों के विचारों ने युवतियों को अपनी क्षमताओं को पहचानने, आत्मनिर्भर बनने और सामाजिक जीवन में नेतृत्वकारी भूमिका निभाने की प्रेरणा दी। कार्यक्रम के माध्यम से नारी शक्ति, व्यक्तित्व विकास एवं राष्ट्र निर्माण में युवतियों की सहभागिता के महत्व को प्रभावी रूप से प्रस्तुत किया गया।

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का मानना है कि सशक्त युवती ही सशक्त समाज और सशक्त राष्ट्र की आधारशिला है। इसी विचार के साथ आयोजित ‘स्वयंसिद्धा युवती सम्मेलन’ युवतियों में आत्मविश्वास, नेतृत्व एवं राष्ट्र के प्रति उत्तरदायित्व की भावना को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक सार्थक पहल रहा।

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