महिला खा गई कपड़ा सिलने वाली सुई-कांच की चूड़ियांः प्रयागराज में 3 घंटे चला ऑपरेशन, आंत में छेद; सुई किडनी तक पहुंची

प्रयागराज में मानसिक तनाव और अवसाद के चलते एक दुर्लभ ईटिंग डिसऑर्डर का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। निजी अस्पताल में एक महिला के पेट से डॉक्टरों ने जटिल सर्जरी कर 6 सुइयां (नीडल्स) , नुकीले हेयर पिन और कांच की चूड़ियों के टुकड़े बाहर निकाले हैं। सुईंयां छेद करते हुए आंत व गुर्दे तक पहुंच गई थी। आंतों में हुआ छेद, गुर्दे तक पहुंच गई थीं सुइयां
खागा की रहने वाली विजमा कुमारी पिछले कई महीनों से मानसिक बीमारी और तनाव के चलते अखाद्य वस्तुएं (सुई, नुकीली चीजें, पिन व कांच) निगल रही थी। इन नुकीली चीजों की वजह से उसकी आंतों में कई जगह छेद (परफोरेशन) हो गया था और दो सुइयां आंत को चीरते हुए दाहिने गुर्दे (किडनी) तक जा पहुंची थीं। आंत फटने से पेट में गंभीर संक्रमण फैलने लगा था और मरीज की हालत बेहद नाजुक हो गई थी। परिजन गुमान सिंह ने बताया कि वह मानसिक रूप से परेशान थीं। तकरीबन सात महीने से समस्या बनी हुई थी। कई जगह दिखाया लेकिन इलाज नहीं हो पाया। एक दिन काम से लौटने पर रोता हुआ देख कारण पूछा। तब उन्होंने सुई निगलने की बात बताई। हम तुरंत स्थानीय डॉक्टर के पास ले गए, जहां एक्स-रे के बाद डॉक्टरों ने केस गंभीर बताते हुए बाहर ले जाने को कहा। इसके बाद हम उन्हें इलाज के लिए इलाहाबाद लेकर आए। सी-आर्म तकनीक से 2.5 घंटे चली जटिल सर्जरी
डॉक्टर राजीव सिंह ने बताया कि स्थानीय स्तर पर एक्स-रे और फिर सीटी स्कैन के जरिए महिला के पेट में फंसी सुइयों की सटीक लोकेशन का पता लगाया गया। आंत में सुइयों को खोजना एक बड़ी चुनौती थी। ऑपरेशन थिएटर में आधुनिक ‘सी-आर्म’ (C-Arm) मशीन की मदद से डॉक्टरों की टीम ने करीब तीन घंटे चले ऑपरेशन के बाद सभी सुइयों को सफलतापूर्वक बाहर निकाल लिया। क्षतिग्रस्त आंतों को रिपेयर किया गया और मरीज की स्थिति में सुधार के बाद उसे वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया है। क्या है ‘पायका’ (Pica) डिसऑर्डर?
डॉक्टर के मुताबिक यह समस्या ‘पायका’ नामक ईटिंग डिसऑर्डर की वजह से होती है। इस रोग से पीड़ित लोग ऐसी चीजें खाने लगते हैं जो भोजन नहीं हैं, जैसे मिट्टी, चॉक, कागज, सुई, पिन, कांच या बाल। अत्यधिक मानसिक तनाव, अवसाद (डिप्रेशन), पारिवारिक कलह या ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर (OCD) इसके प्रमुख कारण हो सकते हैं। इसके अलावा शरीर में आयरन, जिंक या विटामिन जैसे पोषक तत्वों की कमी से भी यह आदत पड़ सकती है।

