April 23, 2026

सायबर ठगी मामले की आपराधिक कार्यवाही पर रोक, शिकायतकर्ता को नोटिस, कोर्ट ने राज्य सरकार सहित शिकायतकर्ता से मांगा जवाब प्रयागराज

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सायबर ठगी मामले की आपराधिक कार्यवाही पर रोक, शिकायतकर्ता को नोटिस, कोर्ट ने राज्य सरकार सहित शिकायतकर्ता से मांगा जवाब प्रयागराज

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रयागराज के क्राइम ब्रांच थाने में दर्ज साइबर ठगी के अपराध की ए सी जे एम की अदालत में चल रही आपराधिक केस कार्यवाही पर रोक लगा दी है और शिकायतकर्ता को नोटिस जारी कर राज्य सरकार व शिकायतकर्ता से याचिका पर जवाब मांगा है।अगली सुनवाई आठ हफ्ते बाद होगी।
यह आदेश न्यायमूर्ति एस के पचौरी ने सचिन कुमार की याचिका पर दिया है।
याचिका पर अधिवक्ता सुनील चौधरी ने बहस की।इनका कहना है कि
प्रयागराज के साइबर क्राइम थाना में कार्तिकेय त्रिपाठी निवासी उत्कर्ष विला बलरामपुर हाउस मंफोर्डगंज ने राजीव शुक्ला सर्विस एडवाइजर के विरुद्ध 13 लाख ठगी के मामले में धोखाधड़ी व आई टी एक्ट के तहत वर्ष 2023 में साइबर थाना प्रयागराज में एफआईआर पंजीकृत कराया था। जिसमे फरवरी 2026 में अभियुक्त सचिन कुमार निवासी फिरोजाबाद को न्यायालय द्वारा सम्मन जारी किया गया।
याची ने हाइकोर्ट में चार्जशीट और संज्ञान आदेश को चुनौती दी।
अधिवक्ता ने कहा याची एफ आई आर में नामजद नही है । याची वर्ष 2023 में इंटर मीडिएट का छात्र था और वह तब से वेब साइट बनाने का कार्य कर अपना बी. सी. ए. की पढ़ाई कर रहा है ।याची को राजीव शुक्ला नाम के व्यक्ति ने फोन करके अपना आधार कार्ड व पाँच हजार रुपये भेजकर वाव मोमो फूड प्रा लि कंपनी के नाम से बेबसाइट बनवाई थी. पुलिस ने बेब साइड की जांच करने पर याची के आई पी एड्र्स का पता चला तो पुलिस ने याची का कंप्यूटर जब्त कर बयान लिया और छोड़ दिया ।याची ने अपने बयान में बताया था की हमने वेब साइड बनाने के लिए 5 हजार रुपये लिए थे ,कोई अपराध नही किया ।याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने बताया कि याची ने अभी तक 25 से ज्यादा लोगो की वेबसाइड बनाई है।याची का कोई आपराधिक इतिहास नही है ।बाद में पुलिस की जांच में राजीव शुक्ला का आधार कार्ड फर्जी निकला था ।मात्र इसी आधार पर पुलिस ने याची के खिलाफ चार्जशीट लगा दिया और न्यायालय ने संज्ञान भी ले लिया ,जबकि आज तक नामजद अभियुक्त की कोई गिरफ्तारी नही हुई, न ही उस गैंग से जुड़े किसी भी व्यक्ति की कोई जानकारी विवेचक को मिली और न ही खाते से धन की कोई रिकवरी ।विवेचना अभी भी चल रही है ।पुलिस ने याची को ही बलि का बकरा बना कर गलत चार्जशीट फ़ाइल कर दी।

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