माघी पूर्णिमा का पावन पर्व : आध्यात्मिक, सांस्कृतिक एवं ज्योतिषीय दृष्टि से विशेष महत्त्वपूर्ण
माघी पूर्णिमा का पावन पर्व : आध्यात्मिक, सांस्कृतिक एवं ज्योतिषीय दृष्टि से विशेष महत्त्वपूर्ण
भारतीय सनातन परम्परा में माघ मास को पुण्य, तप, दान एवं आत्मशुद्धि का विशेष काल माना गया है। इसी माघ मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा, जिसे माघी पूर्णिमा कहा जाता है, धार्मिक, आध्यात्मिक एवं ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यन्त महत्त्वपूर्ण पर्व है। यह पर्व विशेष रूप से स्नान, दान, जप, तप तथा धर्मशास्त्रीय अनुष्ठानों के लिए श्रेष्ठ माना गया है।
सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी के ज्योतिष विभाग द्वारा प्रदत्त प्रामाणिक ज्योतिषीय एवं धर्मशास्त्रीय गणनाओं के अनुसार वर्ष 2026 में माघी पूर्णिमा का पुण्यकाल अत्यन्त विशिष्ट एवं दुर्लभ संयोगों से युक्त है ।
*शास्त्रीय महत्त्व*
धर्मशास्त्रों में कहा गया है—
“*यां तिथिं समनुप्राप्य उदयं याति भास्करः सा तिथिः सकला ज्ञेया स्नानदानजपादिषु*।”।
अर्थात् जिस तिथि में सूर्य का उदय होता है, वही तिथि स्नान, दान एवं जप आदि के लिए पूर्ण रूप से मान्य होती है। इस शास्त्रीय सिद्धान्त के आलोक में माघी पूर्णिमा का यह अवसर विशेष पुण्यदायक माना गया है।
माघी पूर्णिमा के दिन पवित्र नदियों में स्नान, विशेषतः गंगा-स्नान, ब्राह्मण-भोजन, वस्त्र, अन्न, तिल, घृत एवं स्वर्ण दान, साथ ही विष्णु, शिव एवं सूर्योपासना का विशेष विधान है। मान्यता है कि इस दिन किया गया दान एवं जप अक्षय फल प्रदान करता है।
*ज्योतिषीय विशेषता (2026)*
*ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार वर्ष 2026 में 01 फरवरी 2026 (रविवार) को प्रातः 05:53 बजे माघी पूर्णिमा तिथि का आरम्भ हो रहा है तथा 02 फरवरी 2026 (सोमवार) को प्रातः 03:39 बजे इसका समापन होगा। इस प्रकार कुल 21 घंटे 46 मिनट की पूर्णिमा तिथि उपलब्ध रहेगी।
इस वर्ष सूर्य मकर राशि में तथा चन्द्रमा अपनी स्वराशि कर्क में पुनर्वसु नक्षत्र में स्थित रहेगा, जिससे विशेष पुण्यप्रद योग का निर्माण हो रहा है। इसके कारण स्नान, दान एवं आध्यात्मिक साधना के लिए दीर्घ एवं श्रेष्ठ काल प्राप्त हो रहा है।
*विशेष रूप से 01 फरवरी 2026 को प्रातः 05:53 से 10:59 बजे तक पुनर्वसु नक्षत्र एवं प्रीति योग के कारण सर्वोत्तम मुहूर्त माना गया है*। इसके अतिरिक्त रात्रि के पश्चात 02 फरवरी 2026 को सूर्योदय तक भी माघी पूर्णिमा के निमित्त धार्मिक कृत्य सम्पन्न किए जा सकते हैं ।
*सामाजिक एवं सांस्कृतिक सन्देश*
माघी पूर्णिमा केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता, दानशीलता एवं लोककल्याण का भी संदेश देती है। इस अवसर पर किया गया दान समाज के दुर्बल वर्गों के लिए सहारा बनता है तथा व्यक्ति के भीतर करुणा, संयम एवं आध्यात्मिक चेतना का विकास करता है।
सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी के कुलपति प्रो॰ बिहारी लाल शर्मा एवं ज्योतिष विभाग के आचार्य डा॰ मधुसूदन मिश्र ने बताया कि जनसामान्य माघी पूर्णिमा के इस दुर्लभ पुण्यकाल का सदुपयोग करते हुए शास्त्रीय विधि से स्नान, दान, जप एवं उपासना करें तथा भारतीय ज्ञान-परम्परा के इस महान पर्व के आध्यात्मिक एवं मानवीय आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करें।
(स्रोत : ज्योतिष विभाग, वेदवेदांग संकाय, सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी)

