हिंदी विश्वविद्यालय में ‘डिजिटल युग में हिंदी’ विषय पर संगोष्ठी का हुआ आयोजन, डिजिटल ने हिंदी के प्रचार-प्रसार के नए अवसर प्रदान किए – डॉ. अमित मालवीय
डिटिजल ने हिंदी को वैश्विक पहचान दिलाई– प्रो. अखिलेश कुमार दुबे

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के क्षेत्रीय केंद्र, प्रयागराज में हिंदी माह के उपलक्ष्य में आज माननीय कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा के संरक्षण में ‘डिटिजल युग में हिंदी’ विषय पर संगोष्ठी का आयोजन हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उत्तर मध्य रेलवे प्रयागराज के वरिष्ठ जनसंपर्क अधिकारी डॉ. अमित मालवीय ने कहा कि ‘डिजिटल युग में हिंदी’ वर्तमान समय का अत्यंत प्रासंगिक विषय है। इंटरनेट और डिजिटल संचार माध्यमों के विस्तार ने हिंदी के प्रयोग और प्रसार के लिए नए अवसर उपलब्ध कराए हैं। डिजिटल माध्यम से पूरी दुनिया तक हिंदी भाषा का विकास हो रहा है। डिजिटल युग में सूचना स्रोत, सूचना के प्रचार-प्रसार का डिजिटलीकरण, भाषा का मानकीकरण आदि का विकास किया जा रहा है। भारत में इंटरनेट पर हिंदी भाषा में प्रसारित सामग्री का प्रयोग किया जा रहा है। हिंदी पूरी दुनिया में लोकप्रिय हो रही है।
आगे उन्होंने कहा कि इस दौर में हिंदी की प्रासंगिकता और अधिक हो रही है । डिजिटल युग में क्षेत्रीय भाषाओं में बनने वाली सामग्रियों का हिंदी में रूपांतरण भी तेजी से हो रहा है। शिक्षा मंत्रालय ने हिंदी एवं अन्य भारतीय भाषाओं को डिजिटल दुनिया में बढ़ावा देने के लिए यूनीकोड को अपनाने और इसके विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह डिजिटल प्लेटफार्म को हिंदी में कंटेंट बनाने में मदद कर रहा है। डिजिटल युग में हिंदी संवाद का सबसे सशक्त माध्यम बन गया है। क्षेत्रीय केंद्र, प्रयागराज के अकादमिक निदेशक प्रो. अखिलेश कुमार दुबे ने कहा कि डिजिटल ने हिंदी को वैश्विक पहचान दिलाई है। हिंदी को आगे बढ़ना महाशक्ति बनने जैसा है। आज हिंदी वेबसाइटों, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, डिजिटल पत्रकारिता, ब्लॉग, पॉडकास्ट, ऑनलाइन शिक्षा तथा विभिन्न तकनीकी माध्यमों पर व्यापक रूप से प्रयुक्त हो रही है। हिंदी को वैश्विक मंच पर ले जाने की दिशा में अधिक से अधिक गुणवत्तापूर्ण सामग्री अपलोड करने की आवश्यकता है। उन्होंने डिजिटल होती दुनिया पर कविता का पाठ भी किया । संगोष्ठी में स्वागत वक्तव्य देते हुए स्त्री अध्ययन विभाग की सह-आचार्य डॉ. सुप्रिया पाठक ने मुख्य अतिथि डॉ. अमित मालवीय द्वारा उत्तर मध्य रेलवे में हिंदी में किए गए कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि हिंदी संपर्क और संवाद की भाषा है। इसके साथ ही डिजिटल तकनीक, सोशल मीडिया, कृत्रिम बुद्धिमत्ता तथा बदलते संचार माध्यमों के दौर में हिंदी की भूमिका, संभावनाओं और चुनौतियों आदि विषयों पर भी विचार-विमर्श किया गया। संगोष्ठी का संचालन भाषा विज्ञान की सहायक आचार्य डॉ. विजया सिंह एवं आभार जनसंचार विभाग के सहायक आचार्य डॉ. अख्तर आलम ने किया।
इस अवसर पर डॉ. अवंतिका शुक्ला, डॉ. आशा मिश्रा, डॉ. मिथिलेश कुमार तिवारी, डॉ. यशार्थ मंजुल, डॉ. हरप्रीत कौर, डॉ. सत्यवीर, डॉ. सुरभि विप्लव, डॉ. अश्विनी कुमार सिंह, डॉ. चन्द्र मणि, दीपेश कुमार, सृष्टि गुप्ता, प्रज्ञा भारती, रुषिका निधि, अमिय यादव, राजकुमार, सौरभ आनंद आदि केंद्र के शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

