स्ट्रीट वेंडर्स के पुनर्वास और “अर्बन मार्केट” योजना को लेकर नगर निगम से जवाब तलब

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रयागराज नगर निगम की उस योजना पर सवाल खड़े किए हैं, जिसके तहत सरोजिनी नायडू मार्ग, ड्रमंड रोड और नवाब यूसुफ रोड के क्षेत्र को स्ट्रीट वेंडर्स के लिए संगठित वेंडिंग जोन के रूप में विकसित किया जाना है।
न्यायमूर्ति अजित कुमार और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने अरविंद कुमार मिश्रा एवं 34 अन्य की याचिका की सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया।
नगर निगम की ओर से अदालत को बताया गया कि उक्त क्षेत्र में फल-सब्जी बेचने वाले करीब 400 स्ट्रीट वेंडर्स को व्यवस्थित करने के लिए यह जोन चिन्हित किया गया है। लेकिन कोर्ट के समक्ष रखी गई योजना में पार्किंग जोन विकसित करने का भी प्रस्ताव है, जिसे लेकर कोर्ट ने आपत्ति जताई कि इन पार्किंग जोन के प्रबंधन और आवश्यकता को लेकर कोई स्पष्ट योजना पेश नहीं की गई।
अदालत ने पाया कि इस भूमि को अब मुख्यमंत्री वाणिज्यिक शहरी विकास योजना, 2025-2026 के तहत “अर्बन मार्केट” के रूप में भी चिन्हित कर लिया गया है, जिससे मूल मुद्दा उलझ गया है।
खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि दोनों मुद्दों को आपस में नहीं मिलाया जा सकता। कोर्ट के अनुसार, असली सवाल यह है कि क्या सरोजिनी नायडू मार्ग और ड्रमंड रोड को वेंडिंग जोन विनियम, 2017 के अनुरूप विकसित किया जा रहा है और क्या आवेदन करने वाले सभी वेंडर्स को वहां स्थान मिल सकेगा। कोर्ट ने कहा कि “अर्बन मार्केट” का मुद्दा 2017 के विनियमों के दायरे में नहीं आता।
प्रतिवादी पक्ष के अधिवक्ता विभु राय अदालत के इस सवाल का संतोषजनक जवाब नहीं दे सके कि वेंडर्स के पुनर्वास से जुड़े मामले में “अर्बन मार्केट” का जिक्र कैसे आया। उन्होंने इस संबंध में प्रासंगिक दस्तावेज पेश करने के लिए समय मांगा। प्रयागराज के अपर नगर आयुक्त को इस पूरे मामले पर स्पष्टीकरण देते हुए विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया गया है।कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अदालत की अनुमति के बिना नगर निगम या उसकी ओर से किसी भी आउटसोर्स एजेंसी द्वारा अर्बन मार्केट में कोई भी दुकान आवंटित नहीं की जाएगी।मामले की अगली सुनवाई 10 सितंबर, 2026 को निर्धारित की गई है।

