इलाहाबाद संग्रहालय में डॉ. भीमराव अम्बेडकर की 135वीं जयंती की पूर्व संध्या पर विशेष प्रदर्शनी एवं गोष्ठी का आयोजन
इलाहाबाद संग्रहालय में डॉ. भीमराव अम्बेडकर की 135वीं जयंती की पूर्व संध्या पर विशेष प्रदर्शनी एवं गोष्ठी का आयोजन

भारत रत्न डॉ. भीमराव अम्बेडकर की 135वीं जयंती की पूर्व संध्या पर आज इलाहाबाद संग्रहालय में आज़ादी के तत्काल बाद के समाचार पत्रों में उनके बहुआयामी योगदानों पर प्रकाशित लेखों पर आधारित एक विशेष प्रदर्शनी का शुभारम्भ माननीय न्यायमूर्ति गौतम चौधरी, उच्च न्यायालय इलाहाबाद द्वारा किया गया। यह प्रदर्शनी न केवल डॉ. अम्बेडकर के विचारों और संघर्षों को रेखांकित करती है, बल्कि उनके सामाजिक, आर्थिक एवं संवैधानिक योगदानों की ऐतिहासिक झलक भी प्रस्तुत करती है।
प्रदर्शनी के मुख्य आकर्षणों में अंग्रेजी समाचार पत्र ‘भारत ज्योति’ में प्रकाशित लेख ‘बायोग्राफी ऑफ द मैन विद ए मिशन’, ‘अम्बेडकर द फाइटर’, हिंदी समाचार पत्र में स. गो. बर्चे द्वारा लिखित ‘सामाजिक क्रांति के अग्रदूत बाबा साहब अम्बेडकर’, वर्ष 1966 के ‘लीडर’ में प्रकाशित ‘सिंबल ऑफ सोशल रिवोल्ट’, वर्ष 1948 के समाचार पत्र में प्रकाशित डॉ. अम्बेडकर का आकर्षक कार्टून, तथा ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ (1956) और ‘नेशनल हेराल्ड’ (1956) के महत्वपूर्ण लेख सम्मिलित हैं, जो उनके व्यक्तित्व और विचारों की गहराई को दर्शाते हैं।
इस अवसर पर संग्रहालय सभागार में ‘डॉ. अम्बेडकर और उनका सामाजिक चिंतन’ विषय पर एक गोष्ठी का भी आयोजन किया गया। मुख्य वक्ता के रूप में माननीय न्यायमूर्ति गौतम चौधरी ने कहा कि यह धारणा उचित नहीं है कि डॉ. अम्बेडकर केवल किसी एक वर्ग विशेष के हितों तक सीमित थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि डॉ. अम्बेडकर का चिंतन व्यापक था, जिसमें धार्मिक, आर्थिक और सामाजिक सभी पहलुओं का समावेश था। वे धार्मिक कुरीतियों और आर्थिक शोषण के प्रखर विरोधी तथा समाज सुधारक थे। उन्होंने यह भी बल दिया कि डॉ. अम्बेडकर के विचारों का मूल आधार अन्याय के विरुद्ध सशक्त रूप से खड़े होना था, अतः उनके विराट व्यक्तित्व को किसी संकीर्ण दायरे में नहीं बाँधा जाना चाहिए।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) रामजियावन ने आयोजन हेतु संग्रहालय परिवार को बधाई देते हुए कहा कि डॉ. अम्बेडकर का मूल मंत्र—समानता, शिक्षा और आत्मसम्मान—आज भी उतना ही प्रासंगिक है और समाज के प्रत्येक वर्ग को इसे अपनाने की आवश्यकता है। कार्यक्रम का सफल संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. वामन ए. वानखेड़े द्वारा किया गया।
डॉ. भीमराव अम्बेडकर का जीवन सामाजिक न्याय, समानता और मानवाधिकारों की स्थापना के लिए समर्पित रहा है । भारतीय संविधान के निर्माण में उनकी केंद्रीय भूमिका ने देश को एक सशक्त लोकतांत्रिक ढांचा प्रदान किया है। उनकी जयंती केवल एक महापुरुष के जन्मदिवस का उत्सव नहीं, बल्कि समाज में समता, शिक्षा और जागरूकता के मूल्यों को आत्मसात करने का प्रेरणादायक अवसर है।
कार्यक्रम में संग्रहालय के अधिकारीगण सहित शहर के अनेक गणमान्य नागरिकों की गरिमामयी उपस्थिति रही, जिसने आयोजन की महत्ता को और अधिक बढ़ा दिया।

