कस्टडी के लिए हेबियस कॉर्पस याचिका पर ‘गार्जियंस एंड वार्ड्स एक्ट’ बाधा नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि बच्चे की कस्टडी से जुड़े मामलों में हेबियस कॉर्पस याचिका दायर करने पर ‘गार्जियंस एंड वार्ड्स एक्ट’ कोई बाधा नहीं है। यदि यह बच्चे के सर्वोत्तम हित में हो, तो हाईकोर्ट अपने असाधारण अधिकार का उपयोग करते हुए रिट जारी कर सकती है।
अदालत ने एक सिंगल जज के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें एक मां की हेबियस कॉर्पस याचिका खारिज कर दी गई थी। मां ने अपने बच्चे की कस्टडी पिता से दिलाने की मांग की थी।
हाईकोर्ट ने कहा कि केवल इस आधार पर याचिका खारिज नहीं की जा सकती कि याचिकाकर्ता के पास ‘गार्जियंस एंड वार्ड्स एक्ट’ के तहत कोई वैकल्पिक कानूनी उपाय उपलब्ध है।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में सबसे महत्वपूर्ण मानदंड बच्चे का कल्याण (वेलफेयर) होता है। यदि अदालत को लगता है कि बच्चे के हित में हस्तक्षेप जरूरी है, तो वह हेबियस कॉर्पस रिट के माध्यम से उचित आदेश दे सकती है।
इस फैसले के जरिए हाईकोर्ट ने यह संकेत दिया कि तकनीकी आधारों के बजाय बच्चे के हित को सर्वोपरि रखा जाना चाहिए।

