कंप्लेंट केस की पुलिस रिपोर्ट पर संज्ञान लेकर सम्मन जारी करना गैर-कानूनी – हाईकोर्ट
कंप्लेंट केस की पुलिस रिपोर्ट पर संज्ञान लेकर सम्मन जारी करना गैर-कानूनी – हाईकोर्ट
सम्मन आदेश रद, न्यायिक मजिस्ट्रेट को नये सिरे से आदेश देने का निर्देश
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दर्ज एफआईआर को असंज्ञेय अपराध बताते हुए कंप्लेंट केस कायम करने की पुलिस चार्जशीट पर संज्ञान लेकर सम्मन जारी करने को गैर कानूनी करार देते हुए रद कर दिया है और न्यायिक मजिस्ट्रेट गाजीपुर को नये सिरे से आदेश पारित करने का निर्देश दिया है।
यह आदेश न्यायमूर्ति पद्म नारायण मिश्र ने अनंत गुप्ता व तीन अन्य की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है।
याचिका पर अधिवक्ता वी के चंदेल व मयंक कृष्ण चंदेल ने बहस की।
इनका कहना था कि सी आर पी सी की धारा २(डी)के अनुसार जब किसी असंज्ञेय अपराध की पुलिस रिपोर्ट में कंप्लेंट केस कायम करने की संस्तुति की गई हो तो मजिस्ट्रेट द्वारा राज्य केस मान अभियुक्तों को सम्मन जारी करना कानून की नजर में गलत है।ऐसा आदेश रद होने योग्य है।
मरगाह थाने में धारा 115(2),352,351(3)बी एन एस के अंतर्गत दर्ज एफआईआर की पुलिस विवेचना की गई। पुलिस ने चार्जशीट दायर की।और कहा कि कंप्लेंट केस चलाया जाय। किंतु मजिस्ट्रेट ने पुलिस रिपोर्ट को संज्ञान में लेकर अभियुक्त को 17मई 25को सम्मन जारी कर दिया।जिसकी वैधता को याचिका में चुनौती दी गई।जिसे गैर कानूनी करार देते हुए रद कर दिया है।


