आईजीआरएस प्रकरणों के गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध निस्तारण हेतु मण्डलायुक्त की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक सम्पन्न

शासन की मंशा के अनुरूप आईजीआरएस निस्तारण प्रक्रिया को और रिज़ल्ट ओरिएंटेड बनाने तथा जनमानस की शिकायतों के त्वरित निस्तारण हेतु मण्डलायुक्त श्रीमती सौम्या अग्रवाल की अध्यक्षता में आयुक्त कार्यालय स्थित गांधी सभागार में सभी संबंधित अधिकारियों की उपस्थिति में बैठक संपन्न हुई जिसमें विभागवार आए प्रकरणों की समीक्षा करते हुए जहां भी प्रकरणों के निस्तारण का फीडबैक असंतोषजनक पाया गया था उनके कारणों की जानकारी लेते हुए आवश्यक कार्यवाही के निर्देश दिए गए।
समीक्षा के दौरान यह संज्ञान में आने पर की कई विभागीय ऑपरेटर एवं कर्मचारियों द्वारा प्रकरणों का गलत तरीके से निस्तारण किया जा रहा, जिसके कारण भी असंतोषजनक फीडबैक एवं लंबित प्रकरणों की संख्या में वृद्धि हो रही है, मण्डलायुक्त ने सभी विभागों के नोडल अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे अपने अधीन कार्यरत लॉगिन ऑपरेटरों एवं संबंधित कर्मचारियों को निस्तारण प्रक्रिया की पूर्ण जानकारी उपलब्ध कराना सुनिश्चित करते हुए प्रत्येक प्रकरण का निस्तारण नियमानुसार कराएं।
कई प्रकरणों के निस्तारण बिना उचित आख्या अपलोड किए बिना भी किए जा रहे हैं जिसके कारण फीडबैक असंतोषजनक प्राप्त हो रहा है यह संज्ञान में आने पर उन्होंने प्रकरणों के निस्तारण से पूर्व अनिवार्य रूप से आख्या अपलोड कराने की जिम्मेदारी सभी विभागीय नोडल अधिकारियों को दी तथा नाराजगी व्यक्त करते हुए भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति न होने यह सुनिश्चित करने को कहा। मण्डलायुक्त ने प्रकरणों का निस्तारण गुणवत्तापूर्ण कराने को कहा जिससे कि शिकायतकर्ता संतुष्ट हो सके और बार-बार असंतोषजनक फीडबैक देकर पुनः शिकायत करने की स्थिति उत्पन्न न हो।
जिन प्रकरणों का निस्तारण नोडल स्तर पर संभव न हो अथवा जिनमें स्पेशल क्लोज की आवश्यकता हो, ऐसे मामलों में उच्च विभागीय अधिकारियों को अवगत कराते हुए नियमानुसार स्पेशल क्लोज करने हेतु अनुरोध करने को भी कहा। यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर अधिकारियों को परेशान करने के उद्देश्य से बार-बार शिकायत करता है और इसके स्पष्ट साक्ष्य उपलब्ध हों, तो संबंधित व्यक्ति का नंबर ब्लैकलिस्ट करते हुए प्रकरणों को बंद करने की कार्यवाही करने के भी निर्देश दिए गए।
मण्डलायुक्त ने सभी नोडल अधिकारियों को हार्ड वर्क के साथ-साथ स्मार्ट वर्क करने की सलाह देते हुए निर्देशित किया कि सभी प्रकरणों का निस्तारण 15 दिवस के भीतर सुनिश्चित किया जाए, ताकि शासन की मंशा के अनुरूप आमजन को त्वरित एवं प्रभावी न्याय मिल सके।

