एस आर एन अस्पताल में गलत खून चढ़ाने से हुई महिला की मौत

राज्य सरकार को निर्देश बतायें कितना मुआवजा तय हो
मेडिकल कॉलेज प्राचार्य को भविष्य में घटना की पुनरावृत्ति न होने देने के लिए कमेटी गठित करने का निर्देश
प्रयागराज। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के अधिवक्ता सौरभ सिंह सोमवंशी की मां को गलत ब्लड चढ़ाए जाने से हुई मृत्यु को लेकर दायर याचिका की सुनवाई के दौरान एस आर एन अस्पताल ने गलती स्वीकार की,कहा गलत खून चढ़ाया गया था। न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन तथा न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने याचिका की सुनवाई की। सरकार का पक्ष अपर महाधिवक्ता राहुल अग्रवाल तथा याचिकाकर्ता का पक्ष सुप्रीम कोर्ट की एडवोकेट रीना एन सिंह ने रखा।
याची अधिवक्ता ने कहा कि अस्पताल प्रशासन की लापरवाही से ही एक महिला की मौत हो गई।जिसका इलाज न्यूरोलॉजी डिपार्टमेंट में चल रहा था ।वहां गलत ब्लड चढ़ाए जाने पर किडनी फेल होने की वजह से नेफ्रोलॉजी में शिफ्ट कर दिया गया,।
जिसके बाद अस्पताल प्रशासन की ओर से अपर महाधिवक्ता ने यह बात स्वीकार की ,कि गलत ग्रुप का ब्लड चढ़ाने के कारण मृत्यु हुई है।
कोर्ट ने कहा कि मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य का यह कर्तव्य था कि वह सुनिश्चित करें कि अस्पताल में भर्ती मरीजों के अधिकारों की रक्षा हो लेकिन यह घटना उनकी विफलता को दर्शाती है।
कहा कि अपर महाधिवक्ता और याचिकाकर्ता के अधिवक्ता मिलकर मुआवजे की राशि तय करें। साथ ही कोर्ट ने ऐसी घटना दोबारा न हो ,इसके लिए मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाने का निर्देश दिया।
संविधान के अनुच्छेद 21 का जिक्र करते हुए कोर्ट ने कहा कि मेडिकल कॉलेज प्रशासन को ऐसा प्रबंध करना चाहिए कि भविष्य में सुविधाओं की कमी न हो और स्टाफ की लापरवाही की वजह से किसी मरीज की मौत न हो। कोर्ट ने अपर महाधिवक्ता को देय मुआवजा राशि की जानकारी लेकर बताने को कहा है।
मामले की अगली सुनवाई 23 मार्च को 2 बजे होगी।

