विभूति एक्सप्रेस रविवार से एलएचबी (लिंक हॉफमैन बुश) रेक से लैस हो गई

प्रयागराज। प्रयागराज रामबाग से हावड़ा जाने वाली विभूति एक्सप्रेस रविवार से एलएचबी (लिंक हॉफमैन बुश) रेक से लैस हो गई। इस दौरान यहां ट्रेन के लोको पायलट अशोक कुमार और ट्रेन मैनेजर आनंद कुमार का माला पहनाकर स्वागत किया गया। एलएचबी रेक लगने से विभूति एक्सप्रेस में यात्रा करने वाले यात्रियों का सफर पहले के मुकाबले ज्यादा आरामदायक हो गया।
27 दिसंबर को हावड़ा से चलने वाली 12333 विभूति एक्सप्रेस में पहली बार एलएचबी रेक लगाया गया। कोहरे की वजह से यह ट्रेन दोपहर 12 बजे की जगह 3:55 बजे प्रयागराज रामबाग के प्लेटफॉर्म संख्या एक पर पहुंची। यहां स्टेशन मैनेजर एके श्रीवास्तव, राहुल पटेल, संतोष कुमार आदि ने ट्रेन के लोको पायलट व ट्रेन मैनेजर का स्वागत किया। प्रयागराज रामबाग से गाड़ी संख्या 12334 विभूति एक्सप्रेस शाम 6:55 बजे हावड़ा के लिए रवाना हुई। इस दौरान प्रयागराज रामबाग से जिन यात्रियों का विभूति में रिजर्वेशन था, वे चमचमाती ट्रेन को देखकर खुश हो गए। तमाम लोगों ने ट्रेन के साथ सेल्फी भी ली।
एलएचबी रेक मिलने के बाद विभूति में अब 17 कोच हैं। हालांकि, पहले के मुकाबले इसमें 50 बर्थ कम हो गई हैं। पहले पुराने आईसीएफ कोच के साथ इसका संचालन होता था। तब इसमें स्लीपर श्रेणी के आठ कोच में 576 बर्थ थीं। अब एलएचबी हो जाने के बाद स्लीपर कोच की संख्या सात रह गई है। इसमें अब बर्थ की संख्या 560 हो गई है। एलएचबी के एक स्लीपर कोच में बर्थ की संख्या 80 रहती है। आईसीएफ कोच में यह संख्या 72 थी। इसी तरह एसी थ्री के पहले चार कोच थे जो अब घटकर तीन रह गए हैं। पहले एसी थ्री के कोच में बर्थ की संख्या 256 थी जो अब घटकर 216 हो गई है। वहीं, एसी टू के एक कोच में 46 के बजाय अब बर्थ की संख्या 52 हो गई है। जनरल कोच की संख्या पहले की तरह चार ही है। विभूति एक्सप्रेस में पहले कुल 878 आरक्षित बर्थ थीं जो अब घटकर 828 रह गई हैं।

